चिकनगुनिया की जांच

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 05, 2013
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कई बार डॉक्‍टर लक्षण देखकर चिकनगुनिया की पहचान नहीं कर पाते। इसलिए वे जांच कर बुखार की पुष्टि करते हैं। चिकनगुनिया की जांच से इस बीमारी के बारे में पता लग जाता है और डॉक्‍टर चिकित्‍सा की दिशा उस ओर मोंड़ देते हैं।


रक्‍त जांचबुखार किसी भी तरह का हो उसे जांचने के लिए हमारे पास एकमात्र तरीका डॉक्टर पर भरोसा करना ही होता है। आमतौर पर डॉक्टर बुखार के लक्षण देखकर या तो अंदाजा लगा लेते हैं कि मरीज किस प्रकार के बुखार से पीडि़त है। अगर वे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाते हैं तो बुखार की पुष्टि करने के लिए जांच का सहारा लिया जाता है। 

आजकल जिस तरह की नई-नई बीमारियों के बारे में सुनने को मिल रहा हैं, उनमें तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि डॉक्टर ब्लड टेस्ट कराने के बाद ही मरीज को दवाईयां दें। मरीजों को भी इस बात के लिए जागरूक होना चाहिए कि उन्हें अपने बुखार और सही बीमारी को जानने के लिए टेस्ट करवाने चाहिए।

चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया के लिए जांच अलग-अलग स्तरों पर की जाती है। आइये जानें चिकनगुनिया को डायग्नोस करने वाले टेस्ट के बारे में


चिकनगुनिया वायरल को डायग्नास करने के लिए आमतौर पर तीन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है आरटी पीसीआर, वायरस आइसोलेशन, सीरोलॉजिकल टेस्ट


टेस्ट का तरीका

 

आरटी पीसीआर टेस्ट-नेस्टेआड प्राइमर पेयर्स का इस्तेमाल करते हुए व्यक्ति के शरीर में से रक्ती लेकर चिकनगुनिया के विशेष जींस को बढ़ाकर देखा जाता है इस टेस्ट की रिपोर्ट आने में एक से दो दिन लगते है।


वायरस आइसोलेशन टेस्ट -इस टेस्ट को चिकनगुनिया को डायग्नोस करने के लिए सबसे भरोसे का टेस्ट माना जाता है इसकी रिपोर्ट आने में एक से दो सप्ताह लगता है और इस टेस्ट को बायोसेफ्टी लेवल 3 की लेबोरेटरी में किया जाता है इसमें व्यक्ति के शरीर से ब्लड लेकर यह देखा जाता है कि चिकनगुनिया का वायरस व्यलक्ति के शरीर में किस तरह का रिस्पां स कर रहा है।


सीरोलॉजिकल डायग्नोसि‍स टेस्ट– इस टेस्ट में पहले दो टेस्ट के मुकाबले व्यक्ति के शरीर से ज्यादा ब्लड लेने की जरूरत पड़ती है इससे ब्लड में चिकनगुनिया का खास आईजीएम लेवल देखा जाता है इस टेस्ट‍ की रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लगता है।


हालांकि यह भी कहा जाता है कि चिकनगुनिया का होने वाला टेस्ट लगभग डेंगू के बुखार के लिए होने वाले टेस्ट से काफी मिलता-जुलता है साथ ही लेबोरटरी टेस्ट में चिकनगुनिया के कारणों का पता लगाना भी बहुत मुश्किल हो जाता है।

 

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