चर्म रोग से बचने के घरेलू उपाय

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 06, 2012
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Quick Bites

  • एक्जिमा, सोरायसिस आदि कई प्रकार का हो सकता है चर्म रोग।
  • बारिशों में अधिक परेशान कर सकते हैं त्‍वचा संबंधी रोग।
  • गेंदे का फूल त्‍वचा संबंधी रोगों में होता है बहुत लाभकारी।
  • कैमेमाइल का उपयोग त्‍वचा को जलन से देता है राहत।

 

charm rog se bachane ke gharelu upchar

चर्म रोग आपको कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। बारिशों और गर्मी के मौसम में इस तरह की समस्याएं अधिक होती हैं। ऐसे में त्वचा का बचाव करना बहुत जरूरी होता है। नहीं तो चर्म रोग होने की संभावना ज्यादा होती है। आइए हम आपको चर्म रोग से बचने के कुछ घरेलू उपाय के बारे में जानकरी दे रहे हैं।

 

चर्म रोग से बचने के घरेलू उपचार –

गेंदा

गेंदा गहरे पीले और नारंगी रंग का फूल होता है। यह त्‍वचा की समस्‍याओं का प्रभावशाली घरेलू उपाय है। यह छोटे-मोटे कट, जलने, मच्‍छर के काटने, रूखी त्‍वचा और एक्‍ने आदि के लिए शानदार घरेलू उपाय है। गेंदे में एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं। यह सूजन को कम करने में भी मदद करता है। इसके साथ ही गेंदा जख्‍मों को जल्‍दी भरने में मदद करता है। यह हर प्रकार की त्‍वचा के लिए लाभकारी होता है। गेंदे की पत्तियों को पानी में उबालकर उससे दिन में दो-तीन बार चेहरा धोने से एक्‍ने की समस्‍या दूर होती है।   

कैमोमाइल/ बबूने का फूल

कैमोमाइल का फूल त्‍वचा पर लगाने से जलन को शांत करता है और साथ ही अगर इसका सेवन किया जाए तो आंतरिक शांति प्रदान करता है। इसके साथ ही यह केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली पर भी सकारात्‍मक असर डालता है। यह एक्जिमा में भी काफी मददगार होता है। इसके फूलों से बनी हर्बल टी का दिन में तीन बार सेवन आपको काफी फायदा पहुंचाता है। इसके साथ ही एक्जिमा और सोरायसिस जैसी बीमारियों से उबरने में भी यह फूल काफी मदद करता है। एक साफ कपड़े को कैमोमाइल टी में डुबोकर उसे त्‍वचा के सं‍क्रमित हिस्‍से पर लगाने से काफी लाभ मिलता है। इस प्रक्रिया को पंद्रह-पंद्रह मिनट के लिए दिन में चार से छह बार करना चाहिए। कैमोमाइल कई अंडर-आई माश्‍चराइजर में भी प्रयोग होता है।  इससे डार्क सर्कल दूर होते हैं

 

कमफ्रे

इस फूल के पत्‍ते और जड़ें सदियों से त्‍वचा संबंधी रोगों को ठीक करने में इस्‍तेमाल की जाती रही हैं। यह कट, जलना और अन्‍य कई जख्‍मों में काफी लाभकारी होता है। इसमें मौजूद तत्‍वा तवचा द्वारा काफी तेजी से अवशोषित कर लिए जाते हैं। जिससे स्‍वस्‍थ कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसमें त्‍वचा को आराम पहुंचाने वाले तत्‍व भी पाए जाते हैं। अगर त्‍वचा पर कहीं जख्‍म हो जाए तो कमफ्रे की जड़ों का पाउडर बनाकर उसे गर्म पानी में मिलाकर एक गाढ़ा पेस्‍ट बना लें। इसे एक साफ कपड़े पर फैला दें। अब इस कपड़े को जख्‍मों पर लगाने से चमत्‍कारी लाभ मिलता है। अगर आप इसे रात में बांधकर सो जाएं, तो सुबह तक आपको काफी आराम मिल जाता है। इसे कभी भी खाया नहीं जाना चाहिए, अन्‍यथा यह लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। गहरे जख्‍मों पर भी इसका इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे त्‍वचा की ऊपरी परत तो ठीक हो जाती है, लेकिन भीतरी कोशिकायें पूरी तरह ठीक नहीं हो पातीं।

अलसी के बीज

अलसी के बीजों में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है जो हमारे इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसमें सूजन को कम करने वाले तत्‍व मौजूद होते हैं। यह स्किन डिस्‍ऑर्डर, जैसे एक्जिमा और सोरायसिस को भी ठीक करने में मदद गरता है। दिन में एक-दो चम्‍मच अलसी के बीजों के तेल का सेवन करना त्‍वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है। बेहतर रहेगा कि इसका सेवन किसी अन्‍य आहार के साथ ही किया जाए।

 

अन्‍य उपाय

हल्दी, लाल चंदन, नीम की छाल, चिरायता, बहेडा, आंवला, हरेडा और अडूसे के पत्ते  को एक समान मात्रा में लीजिए। इन सभी सामानों को पानी में पूरी तरह से फूलने के लिए भिगो दीजिए। जब ये सारे सामान पूरी तरह से फूल जाएं तो पीसकर ढ़ीला पेस्ट बना लीजिए। अब इस पेस्ट से चार गुना अधिक मात्रा में तिल का तेल लीजिए।
तिल के तेल से चार गुनी मात्रा में पानी लेकर सारे सामानों को एक बर्तन में मिला लीजिए। उसके बाद मिश्रण को मंद आंच पर तब तक गर्म करते रहिए जब तक सारा पानी भाप बनकर उड़ ना जाए। इस पेस्ट को पूरे शरीर में जहां-जहां खुजली हो रही हो वहां पर या फिर पूरे शरीर में लगाइए। इसके लगाते रहने से आपके त्वचा से चर्म रोग ठीक हो जाएगा।

 


एग्जिमा, सोरियासिस, मस्सा, ल्यूकोर्डमा, स्केबीज या खुजली चर्म रोग के प्रकार हैं।किसी भी प्रकार का चर्म रोग जब तक ठीक नही हो जाता है, बहुत कष्टदायक होता है। जिसके कारण से आदमी मानसिक रूप से बीमार हो जाता है। चर्म रोग की समस्या होने पर आप चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।

 

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इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

टिप्पणियाँ
  • rishi kumar sen13 Mar 2013

    good site

  • ramesh12 Dec 2012

    mere ling ke upar lal rang ke dane nikal aye hai jo khujalatein hai kya karu

  • vijay chauhan22 Nov 2012

    ye simple hai apki skin shayad bhut hi sensitive hai apke liye sabse best hai apo use karo olay all day effect... adhik jankari ke liye visit kare ....www.khoobsurati.com

  • harish21 Nov 2012

    sardi ke mousam me khujli hone lagti hai.suraj ki dhup me bahut jayda hone lagti hai,body per laal nishaan hone lagte hai.koi ghrelu upay ?

  • vipin19 Nov 2012

    mera naam vipin h mere pair ke anguthe me jalan rehti hai main isse bahut pareshan hu ye 18 mahine se hai mere anguthe pe ek dog ke pille ne dant se punch mara tha par koi khun nahi aya tha iske baad se hi isme jalan hai maine kai baar anguthe ko kaat ke usme mirche dali par jalan waisi hi hai agar aapke pass koi upchaar hai to please send it on my email id. i shall be thankful to u

  • Md.Samiullah07 Nov 2012

    main 35 years old aik engineer hoon mujhe lagbhag 15 saalon se एग्जिमा hai.. hamare peeth pe aur naak ke dono daraf aur sir mein bhi hai jo dandruf jaisa ho jaata hai ya phir fish skin jaisa bada- bada ho jata hai jisse kaafi baal bhi gir gaye hai. maine skin ke doctor se consult kya tha aur treatment liya jab medicine leta rahta toon to thik rahta hai aur jab medicine chor deta hoon to phir wapas aa jata hai,kabhi kabhi itching bhi feel karta hoon kindly advise dein thank you

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