मलेरिया से मस्तिष्काघात

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 08, 2011
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mosquito मस्तिष्काघात जैसी गंभीर बीमारी में अतिरिक्‍त देखभाल की जरूरत पड़ती है। कई बार किन्हीं कारणों से देखभाल सही तरीके से नहीं हो पाती तो व्यक्ति तो उसके दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ते है। मलेरिया एक गंभीर बीमारी है, लेकिन मलेरियाग्रस्त व्यक्ति यदि मलेरिया के उपचार के वक्त जरा सी भी चूक करता है तो वह  मस्तिष्काघात का शिकार हो सकता है। आइए जाने है मलेरिया मस्तिष्काघात के बारे में।

[इसे भी पढ़ें : मलेरिया से रोकथाम के उपाय]

 

  • मस्तिष्काघात जैसा की इसके नाम से ही विदित है मलेरिया के दौरान मस्तिष्क‍ पर प्रभाव पड़ना या दिमागी रूप से विकार पैदा होना।
  • मलेरिया का प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम रूप सबसे खतरनाक होता है। यदि मलेरिया प्लामज्मोडियम के परजीवी दिमाग में पहुंच जाते है तो मलेरियाग्रस्त व्‍यक्ति को ब्रेन हैमरेज हो सकता है।
  • आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में हर पांच में से एक बच्चा मलेरिया मस्तिष्काघात का शिकार होता है और लगभग साढ़े सात लाख बच्चों की मस्तिष्काघात से मौत हो जाती है।
  • मलेरिया के कीटाणु प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम का शरीर पर इतना प्रभाव पड़ता है कि इससे मनुष्य  न सिर्फ अपनी याददाश्त खो सकता है बल्कि चक्कर आने और बेहोशी की हालात का भी शिकार हो सकता है।
  • दरअसल, मस्तिष्क मलेरिया एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें परजीवी मस्तिष्क के ऊतकों के जरिए रक्त पहुंचाने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं। इसकी जांच करना काफी मुश्किल होता है क्योंकि मरीज या तो बेहोश हो सकता है या वह गंभीर रूप से बीमार हो सकता है।

 

[इसे भी पढ़ें : मलेरिया का इतिहास]

 

  • मस्तिष्क मलेरिया से मरने वाले मरीजों की दर 25-50 प्रतिशत होती है। लेकिन समय रहते मस्तिष्‍क  मलेरिया की पहचान कर ली जाए तो उसका निदान भी संभव है।
  • शोधों के मुताबिक ये तथ्ये भी सामने आया है कि मस्तिष्क मलेरिया के मरीजों का दृष्टिपटल (रेटीना) का परीक्षण करने से मस्तिष्‍क मलेरिया की पहचान की जा सकती है।
  • यदि दृष्टिपटल पर अपारदर्शी धब्बे और रक्त नलिकाओं का रंग सफेद होने के निशान तो इसका मतलब  है दृष्टिपटल से स्राव हो रहा है आंखों की नसों में सूजन आ गई है। जो कि मलेरिया मस्तिष्काघात के लक्षण है। ये परीक्षण विशेष उपकरण ‘ऑप्थलमोस्कोप’ के जरिए किया जाता है। हालांकि अभी भी इस उपकरण पर शोध जारी है क्योंकि आंखों के परीक्षण में इस जांच के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

मलेरिया में मस्तिष्क क्षति के कई कारण हो सकते है। मरीज की सही तरह से देखभाल न होना, हेल्दी डाइट न लेना, तरल पदार्थों की माञा कम होना। मलेरिया की जांज में कमी और उसके उपचार में कमी भी मस्तिष्काघात का कारण बन सकती है।

 

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