अग्नाशय कैंसर क्यों होता है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 27, 2013
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Quick Bites

  • अग्‍नाशय यानी पाचक ग्रंथि मानव शरीर का महत्‍वपूर्ण अंग है।
  • अग्‍नाशय में कैंसर युक्‍त कोशिकाओं से होता है यह कैंसर।
  • अधिकतर 60 वर्ष से ऊपर के लोगों में यह पाया जाता है।
  • उम्र बढ़ने के साथ डीएनए में कैंसर पैदा करने वाले बदलाव होते हैं।

अग्‍नाशय मानव शरीर का बहुत ही महत्‍वपूर्ण अंग होता है, इसे पाचक ग्रंथि भी कहते है। पाचक ग्रंथि उदर के पीछे 6 इंच की लंबाई वाला अवयव होता है। मछली के आकार वाला अग्नाशय नर्म होता है। यह उदर में क्षितिज की समांतर दिशा में एक सिरे से दूसरे सिरे तक फैला होता है। इसका सिरा उदर की दायीं तरफ होता है, जहां उदर छोटी अंतड़ियों के पहले हिस्से से जुड़ा होता है।

अग्नाशय कैंसरपैनक्रीएटिक कैंसर बहुत ही गंभीर रोग है। यह कैंसर का ही एक प्रकार है। अग्‍नाशय में कैंसर युक्‍त कोशिकाओं के जन्‍म के कारण पैनक्रीएटिक कैंसर की शुरूआत होती है। यह अधिकतर 60 वर्ष से ऊपर की उम्र वाले लोगों में पाया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ ही हमारे डीएनए में कैंसर पैदा करने वाले बदलाव होते हैं। इसी कारण 60 वर्ष या इससे ज्‍यादा उम्र के लोगों में पैनक्रीएटिक कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इस कैंसर के होने की औसतन उम्र 72 साल है।

महिलाओं के मुकाबले पैनक्रीएटिक कैंसर के शिकार पुरुष ज्‍यादा होते हैं। पुरुषों के धूम्रपान करने के कारण इसके होने का ज्‍यादा खतरा रहता है। धूम्रपान करने वालों में अग्‍नाशय कैंसर के होने का खतरा दो से तीन गुने तक बढ़ जाता है। रेड मीट और चर्बी युक्‍त आहार का सेवन करने वालों को भी पैनक्रीएटिक कैंसर होने की आशंका बनी रहती है। कई अध्‍ययनों से यह भी साफ हुआ है कि फलों और सब्जियों के सेवन से इसके होने की आशंका कम होती है।

 

 

अग्नाशय कैंसर के लक्षण

इसे 'मूक कैंसर' भी कहा जाता है। इसे मूक कैंसर इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि इसके लक्षण छिपे हुए होते हैं और आसानी से नजर नहीं आते। फिर भी अग्‍नाशय कैंसर के कुछ लक्षण निम्‍नलिखित हैं।

  • पेट के ऊपरी भाग में दर्द रहना।
  • स्किन, आंख और यूरिन का कलर पीला हो जाना।
  • भूख न लगना, जी मिचलाना और उल्‍टियां होना।
  • कमजोरी महसूस होना और वजन का घटना।

 

 

पैनक्रीएटिक कैंसर होने का कारण

चिकित्‍सा विज्ञान अग्‍नाशय कैंसर होने का सटीक कारण अभी तक नहीं खोज पाया है। फिर भी इसके होने के कुछ प्रमुख कारण माने जाते हैं-

  • अधिक धूम्रपान करने से अग्‍नाशय कैंसर का खतरा बना रहता है।
  • पीढ़ी दर पीढ़ी अग्‍नाशय की चली आ रही समस्‍या को भी अग्‍नाशय कैंसर का कारण माना जाता है।
  • रेड मीट और चर्बी युक्‍त भोजन का सेवन करने से पैनक्रीएटिक कैंसर होने का खतरा रहता है।
  • लंबे समय तक अग्‍नाशय में जलन भी इसका कारण हो सकती है।
  • ज्‍यादा मोटापा भी पैनक्रीएटिक कैंसर का कारण हो सकता है।
  • कीटनाशक दवाईयों की फैक्‍ट्री या इससे संबंधित काम करने वालों को भी अग्‍नाशन कैंसर होने की आशंका रहती है।

 

 

 

अग्‍नाशय कैंसर का उपचार

यदि आप नियमित रूप से अपना स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण और स्‍क्रीनिंग कराते हैं तो इस रोग के खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है। आजकल कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के द्वारा डॉक्‍टर अग्‍नाशय कैंसर का उपचार करते हैं। इससे कई रोगियों को जीवन मिला है। फिर भी इस प्रकार के कैंसर से बचाव के कुछ घरेलू उपाय निम्‍न लिखित हैं।

फलों का रस: ताजे फलों का और ज्‍यादा से ज्‍यादा मात्रा में सब्जियों का सेवन करने से अग्‍नाशय कैंसर में फायदा मिलता है।

ब्रोकोली: पैनक्रीएटिक कैंसर के उपचार के लिए ब्रोकोली को उत्तम माना जाता है। ब्रोकोली के अंकुरों में मौजूद फायटोकेमिकल, कैंसर युक्‍त कोशाणुओं से लड़ने में सहायता करते हैं। यह एंटी ऑक्सीडेंट का भी काम करते हैं और रक्‍त के शुद्धिकरण में भी मदद करते हैं।

अंगूर: अग्‍नाशय कैंसर के खतरे से बचाने में अंगूर भी कारगर होता हैं। अंगूर में पोरंथोसाईंनिडींस की भरपूर मात्रा होती है, जिससे एस्ट्रोजेन के निर्माण में कमी होती है और फेफड़ों के कैंसर के साथ अग्‍नाशय कैंसर के उपचार में भी लाभ मिलता है।

जिन्सेंग: जिन्सेंग एक प्रकार की जड़ी बूटी है और शरीर में बाहरी तत्वों के खिलाफ प्रतिरोधक शक्‍ित का निर्माण करता है।

ग्रीन टी: यदि आप प्रतिदिन एक कप ग्रीन टी का सेवन करते हैं तो अग्‍नाशय कैंसर होने का खतरा कम होता है। साथ ही यह इसके उपचार में भी मददगार है।

एलोवेरा: एलोवेरा यूं तो बहुत से रोगों में फायदा पहुंचाता है लेकिन पैनक्रीएटिक कैंसर में भी यह फायदेमंद है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से लाभ मिलता है।

सोयाबीन: सोयाबीन के सेवन से अग्‍नाशय कैंसर में फायदा मिलता है। इसके साथ ही सोयाबीन के सेवन से स्‍तन कैंसर में भी फायदा मिलता है।

लहसुन: लहुसन कई रोगों में फायदा पहुंचाता है, इसमें औषधीय गुण होते हैं। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट के साथ ही एलीसिन, सेलेनियम, विटामिन सी, विटामिन बी आदि होते हैं। जिसकी वजह से यह कैंसर से बचाव करता है और कैंसर हो जाने पर उसे बढ़ने से रोकता है।

व्हीटग्रास: व्हीटग्रास कैंसर युक्‍त कोशाणुओं को कम करने में भी सहायक होती है। इसके साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है।

अग्‍नाशय कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लिए महज घरेलू उपचार पर ही निर्भर न रहें। घरेलू उपचार के अलावा चिकित्‍सक से परामर्श करके उचित इलाज भी करवाएं।

 

 

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अग्नाशय कैंसर के लक्षण
इसे 'मूक कैंसर' भी कहा जाता है। इसे मूक कैंसर इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि इसके लक्षण छिपे हुए होते हैं और आसानी से नजर नहीं आते। फिर भी अग्‍नाशय कैंसर के कुछ लक्षण निम्‍नलिखित हैं।

- पेट के ऊपरी भाग में दर्द रहना।
- स्किन, आंख और यूरिन का कलर पीला हो जाना।
- भूख न लगना, जी मिचलाना और उल्‍टियां होना।
- कमजोरी महसूस होना और वजन का घटना।

पैनक्रीएटिक कैंसर होने का कारण
चिकित्‍सा विज्ञान अग्‍नाशय कैंसर होने का सटीक कारण अभी तक नहीं खोज पाया है। फिर भी इसके होने के कुछ प्रमुख कारण माने जाते हैं-

- अधिक धूम्रपान करने से अग्‍नाशय कैंसर का खतरा बना रहता है।
- पीढ़ी दर पीढ़ी अग्‍नाशय की चली आ रही समस्‍या को भी अग्‍नाशय कैंसर का कारण माना जाता है।
- रेड मीट और चर्बी युक्‍त भोजन का सेवन करने से पैनक्रीएटिक कैंसर होने का खतरा रहता है।
- लंबे समय तक अग्‍नाशय में जलन भी इसका कारण हो सकती है।
- ज्‍यादा मोटापा भी पैनक्रीएटिक कैंसर का कारण हो सकता है।
- कीटनाशक दवाईयों की फैक्‍ट्री या इससे संबंधित काम करने वालों को भी अग्‍नाशन कैंसर होने की आशंका रहती है।

अग्‍नाशय कैंसर का उपचार
यदि आप नियमित रूप से अपना स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण और स्‍क्रीनिंग कराते हैं तो इस रोग के खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है। आजकल कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के द्वारा डॉक्‍टर अग्‍नाशय कैंसर का उपचार करते हैं। इससे कई रोगियों को जीवन मिला है। फिर भी इस प्रकार के कैंसर से बचाव के कुछ घरेलू उपाय निम्‍न लिखित हैं।

फलों का रस: ताजे फलों का और ज्‍यादा से ज्‍यादा मात्रा में सब्जियों का सेवन करने से अग्‍नाशय कैंसर में फायदा मिलता है।

ब्रोकोली: पैनक्रीएटिक कैंसर के उपचार के लिए ब्रोकोली को उत्तम माना जाता है। ब्रोकोली के अंकुरों में मौजूद फायटोकेमिकल, कैंसर युक्‍त कोशाणुओं से लड़ने में सहायता करते हैं। यह एंटी ऑक्सीडेंट का भी काम करते हैं और रक्‍त के शुद्धिकरण में भी मदद करते हैं।

अंगूर: अग्‍नाशय कैंसर के खतरे से बचाने में अंगूर भी कारगर होता हैं। अंगूर में पोरंथोसाईंनिडींस की भरपूर मात्रा होती है, जिससे एस्ट्रोजेन के निर्माण में कमी होती है और फेफड़ों के कैंसर के साथ अग्‍नाशय कैंसर के उपचार में भी लाभ मिलता है।

जिन्सेंग: जिन्सेंग एक प्रकार की जड़ी बूटी है और शरीर में बाहरी तत्वों के खिलाफ प्रतिरोधक शक्‍ित का निर्माण करता है।

ग्रीन टी: यदि आप प्रतिदिन एक कप ग्रीन टी का सेवन करते हैं तो अग्‍नाशय कैंसर होने का खतरा कम होता है। साथ ही यह इसके उपचार में भी मददगार है।

एलोवेरा: एलोवेरा यूं तो बहुत से रोगों में फायदा पहुंचाता है लेकिन पैनक्रीएटिक कैंसर में भी यह फायदेमंद है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से लाभ मिलता है।

सोयाबीन: सोयाबीन के सेवन से अग्‍नाशय कैंसर में फायदा मिलता है। इसके साथ ही सोयाबीन के सेवन से स्‍तन कैंसर में भी फायदा मिलता है।

लहसुन: लहुसन कई रोगों में फायदा पहुंचाता है, इसमें औषधीय गुण होते हैं। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट के साथ ही एलीसिन, सेलेनियम, विटामिन सी, विटामिन बी आदि होते हैं। जिसकी वजह से यह कैंसर से बचाव करता है और कैंसर हो जाने पर उसे बढ़ने से रोकता है।

व्हीटग्रास: व्हीटग्रास कैंसर युक्‍त कोशाणुओं को कम करने में भी सहायक होती है। इसके साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है।
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