अल्सर होने के कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 09, 2013
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Quick Bites

  • अनियमित जीवनशैली के कारण हो सकता है अल्‍सर या छाले।
  • पेट में जलन और सिर चकराना हो सकते हैं अल्‍सर के लक्षण।
  • जीवाणु भी हो सकता है पेट में अल्‍सर का संभावित कारण।
  • मसालेदार भोजन भी अल्‍सर का एक कारण हो सकता है।

 

अल्सर एक दर्दभरा घाव या जख्‍म होता है। पेप्टिक अल्सर, पेट या छोटी आंत में होने वाले घाव होते हैं। इन्‍हें डूआडीनम भी कहते हैं।

पेट के अल्सर का दृष्य

 

अल्सर और भी कई प्रकार के होते हैं जैसे पेप्टिक अल्सर, गैसट्रिक अल्सर, डियोडीनल अल्सर तथा माउथ अल्सर व कुछ बहुत कम होने वाले इसोफेजिल अल्सर, ब्लीडिंग अल्सर आदि। अल्सर होने के कुछ प्रमुख कारण होते हैं। इस लेख को पढ़ें और अल्सर के कारणों के बारे में जानें।

अल्सर होने पर अक्सर खट्टी डकारें आती हैं और पेट में जलन होती है, साथ ही उल्टियां, सिर चकराना आदि भी पेप्‍टिक अल्‍सर के लक्षण होते हैं। पेप्टिक अल्‍सर के मरीज को भोजन अच्छा नहीं लगता, कब्ज की शिकायत भी रहती है। इसके अलावा दस्त के साथ खून आता है और शरीर में कमजोरी आ जाती है और मन बेचैन रहने लगता है।

 

अल्सर होने के कारण-

अनियमित भोजन

अनियमित दिनचर्या और खराब खान-पान के कारण अक्सर पेट में जख्म बन जाते हैं, जिन्हें अल्सर कहते हैं। इसके अलावा चाय, कॉफी, सिगरेट व शराब आदि का ज्यादा सेवन करने से भी अल्सर होते हैं। अधिक खट्टी, मसालेदार या गर्म चीजों का सेवन करने से अल्सर हो जाते हैं। यदि चिन्ता, ईर्ष्या गुस्सा, काम का बोझ, मानसिक तनाव हो तो इन कारणों से भी यह समस्या हो सकती है।

 

पेट में दूषित द्रव्‍य इकट्ठा होना

कभी-कभी पेट में दूषित द्रव्य इकट्ठा होकर आमाशय और पक्वाशय में जख्म बना देता है। इस तरह आमाशय में घाव होने से पाचक रसों का बनना रुक जाता है और अल्सर बन जाते हैं। सालों से डॉक्टरों का यह मानना है कि तनाव, मसालेदार भोजन, और शराब जैसे कारक सबसे अधिक अल्सर का कारण बनते हैं। लेकिन अधिकांश पेप्टिक अल्सर पेट तथा छोटी आंत में होने वाले बैक्टीरिया इनफेक्‍शन, कुछ दवाओं के कारण या धूम्रपान के कारण होते हैं।

 

जीवाणु

पेट तथा छोटी आंत में बार-बार अल्सर होने का एक कारण इनकी सतह में हेलिकोबेक्टर, जिसे एच. पाइलोरी भी कहा जाता है, नामक जीवाणु का संक्रमण होना भी है। इसके लक्षणों के तौर पर पेट के ऊपरी-मध्य हिस्से में दर्द, जिसके साथ उल्टी होना तथा काले रंग का मल आना शामिल है। अनेक सालों तक यह धारणा प्रचलित थी कि अल्सर तनाव के कारण होते हैं। तनाव को दूर करो, अल्सर स्वत: ही ठीक हो जाएंगे परंतु तनाव बढऩे पर यह फिर से हो जाएंगे। अब इस धारणा को सही नहीं माना जाता है।

 

मुंह के छाले

अगर बात माउथ अल्सर यानी मुंह के छाले की करें तो इन्हें कंकर सोर्स के नाम से भी जाना जाता है। यह साधारण अल्सर, गंभीर अल्सर तथा हेरपेटीफॉर्म अल्सर तीन प्रकार के होते हैं। इनके लक्षणों को आसानी से पहचाना जा सकता है। यदि आप के होठों, मसूढ़े या मुंह के किसी अन्य हिस्सों में कोई सफेद घाव जैसा दिखाई दे या मुंह से खून आ जाए तो आपको माउथ अल्सर है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यदि आप समय से इसका उपचार शुरू कर दें तो आमतौर पर ये दस दिन में ठीक हो जाते हैं।

 

मसालेदार भोजन

यदि आप ज्यादा तला और मसालेदार खाना खाते हैं या ज्यादा एसिड वाला भोजन करते हैं और अपने दांतों की सही तरीके से सफाई नहीं करते तो माउथ अल्सर होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा गाल भीतर से बार-बार कटने से भी इसका संक्रमण फैल सकता है। शरीर में विटामिन बी और आयरन की मात्रा कम होने पर भी यह समस्या हो सकता है।

 

तनाव से संबंध

अभी तक अल्सर के होने पर तनाव के प्रभाव को तय नहीं किया गया है, लेकिन अब यह पता चल चुका है कि पेट तथा छोटी अंतड़ी में बार-बार होने वाले अल्सर का कारण एक जीवाणु से होने वाला संक्रमण है। अब अल्सर के इलाज में एंटीबायोटिक्स का प्रयोग हो रहा है। एंटीबायोटिक के प्रयोग से अल्सर के इलाज में काफी फायदा हुआ है।

 

अल्सर के संक्रमण का पता श्‍वास तथा खून की जांच करके पता लगाया जा सकता है। अल्सर की वजह से पेट या छोटी आंत में गंभीर हैमरेज भी हो सकता है इसलिए आवश्यक है कि समय रहते जांच करवा ली जाए और आवश्यक चिकित्सा की मदद भी ली जाये। यदि खून की उल्टी हो या काला रंग का मल आए तो समस्या गंभीर हो सकती है और तुरंत आपातकालीन चिकित्सीय सहायता देने की जरूरत पड़ सकती है।

 

 

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