गर्भावस्था के दौरान साइटिका दर्द के कारण और उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 06, 2016
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Quick Bites

  • गर्भवती होने का मतलब साइटिका नहीं है।
  • साइटिका होने के दौरान एक ही स्थिति में घंटों न बैठें।
  • साइऐटिका में अपने पोस्चर पर ध्यान दें।
  • साइटिका में हमेशा सक्रिय बने रहें।

साइटिका वास्तव में महज एक समस्या के लिए सम्बोधित किया जाने वाला शब्द नहीं है। इसकी बजाय यह कई समस्याओं के लक्षण के समूह के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला चिकित्सकतीय शब्द है। साइऐटिक नर्व लोअर बैक से निकलती है जो कि पैरों से नीचे की ओर जाती है और इसके बाद पांव की कई शाखाओं तक पहुंचती है। साइटिक नर्व के जरिये ही पांव में उत्तेजना और मसल्स में हलचल महसूस की जाती है। साइऐटिका की असली वजह जलन और पीठ पर पड़ रहे दबाव में छिपी है। ऐसा होने से साइऐटिक नर्व में अत्यधिक दर्द होने लगता है। ऐसा असल में मेरुदण्ड यानी स्पाइन में चोट लगने से या फिर स्लिप डिस्क के कारण होता है। इसके अलावा कई बार कमजोरी के कारण भी साइऐटिका की समस्या देखने को मिलती है। साइऐटिका के साथ साथ पीठ में दर्द हो, ऐसा जरूरी नहीं है। यह दर्द कई बार सिर्फ एक पैर तक भी पहुंच सकता है। बहरहाल गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अकसर साइऐटिका के रूबरू होती हैं। लेकिन इससे सम्बंधित तमाम समस्याएं गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के जहन में कौंधते हैं। यहां हम इसी पर चर्चा करेंगे।

 


गर्भावस्था के दौरान साइटिका

गर्भवती होने का मतलब साइऐटिका होना नहीं है। असल में गर्भधारण का साइऐटिका से कोई सम्बंध नहीं है। हालांकि गर्भधारण के दौरान पैल्विक और कमर में दर्द होना आम बात है। इनके लक्ष्ण भी साइऐटिका जैसे ही नजर आते हैं। लेकिन जैसा कि पहले ही जिक्र किया जा चुका है कि साइऐटिका स्लिप डिस्क के कारण होता है। अतः गर्भावस्था के दौरान साइऐटिका हो, यह कतई जरूरी नहीं है। शिशु के नर्व पर दबाव डालने के कारण भी साइऐटिका नहीं होता। स्पाइन में सूजन के कारण साइऐटिका हो सकता है। आपको यह भी बताते चलें कि गर्भावस्था का मतलब किसी तरह के दर्द को न्योता देना भी नहीं है। खासकर साइऐटिका का तो बिल्कुल नहीं है। कई बार घंटों बैठे रहने के कारण भी साइऐटिका हो सकता है। अतः गर्भावस्था के दौरान एक ही पोजिशन में घंटों कतई न बैठें और सक्रिय बने रहें ताकि किसी भी तरह का दर्द आपको अपने चपेटे में न ले सके।


कैसे पता चले

यदि आपको तीव्र दर्द हो, जलन हो जो कि बार बार आता-जाता है तो समझें कि ये साइऐटिका के लक्ष्ण हैं। इसके अलावा यह अकसर एक ही अंग विशेष को प्रभावित करता है। निचले कमर में काफी ज्यादा दर्द का एहसास होता है। साथ ही जांघ में, पैरों के निचले हिस्से में भी दर्द बना रहता है। कई दफा साइऐटिका में दर्द नितंब तक पहुंच जाता है और विकराल रूप भी धारण कर सकता है। पैरों में सिहरन के साथ साथ पिन चुभने का एहसास भी इसमें सामान्य होता है। यह भी जान लें कि साइऐटिका बेहद थकाऊ होता है और इसमें स्थायी रूप से दर्द बना रहता है।


साइटिका का समाधान

साइऐटिका के विषय में जानने के लिए किसी सामान्य व्यक्ति पर भरोसा न करें। बेहतर होगा कि फिजियोथैरेपिस्ट से सीधे सीधे संपर्क करें। फिजियोथैरेपिस्ट पेल्विक फ्लोर, टमी मसल्स और पीठ को मजबूत बनाने के लिए कुछ एक्सरसाइज दे सकते हैं। साथ ही साइऐटिका से निपटने के लिए सही पोस्चर पर भी जोर दिया जाता है। गर्भावस्था के दौरान यह सब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दौरान नर्व के फंक्शन पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। आधे से भी ज्यादा साइऐटिका के मरीज दस से बारह दिनों में ठीक होने लगते हैं। इसे पूरी तरह ठीक होने में अधिकतम 4 से 12 सप्ताह तक लग सकते हैं। साइऐटिका के दर्द से राहत के लिए पेन किलर लिया जा सकता है। पैरासिटामोल इसका बेहतरीन विकल्प है। लेकिन ध्यान रखें कि किसी भी प्रकार की दवाई लेने से पहले फिजियोथैरेपिस्ट से अवश्य संपर्क करें। गर्भावस्था के दौरान ईबुप्रोफेन लेने की सख्त मनाही होती है। खासकर यदि आप अपने पहले तिमाही से गुजर रही हैं।


आत्मनिर्भर कैसे बनें

  • यदि आप साइटिका से गुजर रहे हैं तो इसके लिए कुछ उपाय आप घर पर भी कर सकते हैं मसलन-
  • जिस अंग विशेष में दर्द हो रहा है उसे गर्म कपड़े से सिकाई करें ताकि दर्द का एहसास कुछ कम हो सके।
  • सक्रिय बने रहें। जितना आप काम करेंगे, उतना आपको आराम होगा। यह आपके गर्भावस्था के लिए भी फायदेमंद है।
  • अपने पोस्चर पर हमेशा ध्यान रखें। संभव हो तो पीठ को हल्का सा आर्क शेप में रखें। इससे दर्द कम होने लगता है। बैठने के दौरान छोटे से कूशन का इस्तेमाल करें।
  • किसी भी तरह के भारी चीज को न उठाएं। यह आपके डिस्क के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यदि आपको कुछ उठाना ही पड़े तो पीठ झुकाने की बजाय अपनी गर्दन झुकाकर सामान उठाएं ताकि पीठ पर अतिरिक्त दबाव न पड़ सके।
  • अपने शरीर की सुनें। जिस भी काम को करने में या फिर कोई खास पोस्चर में दर्द का एहसास हो तो वह काम कतई न करें।
  • सोते वक्त अपने घुटनों के बीच में कुशन रखें ताकि पैरों को आराम मिल सके।


 साइऐटिका दर्द के कारण प्रसव पीड़ा भी हो सकती है। लेकिन यह कुछ खास पोजिशन पर निर्भर करता है। अतः अपने फिजियोथैरेपिस्ट से संपर्क करें।

 

 

Image Source-Getty 

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