आसान हुई मोतियाबिंद की पहेली

By  ,  दैनिक जागरण
Nov 08, 2011
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ashana hui motiyabinda ki paheli

न्यूयार्क, प्रेट्र : उम्रदराज होने पर आंखों में मोतियाबिंद होना आम बात है। यह बीमारी कार्निया पर जाला पड़ने से शुरू होती है और धीरे-धीरे आंखों की रोशनी जाने के साथ अंतत: अंधेपन पर जाकर खत्म होती है। अब वैज्ञानिक इस बीमारी के होने का एक महत्वपूर्ण कारण जान गए हैं। उनका कहना है कि इस कारण का पता चल जाने पर बीमारी का इलाज खोजना भी आसान हो जाएगा।

मिसौरी यूनिवर्सिटी में प्रमुख शोधकर्ता, भारतीय मूल के के. कृष्ण शर्मा के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने यह कारण तलाशा है। शर्मा के मुताबिक उम्रदराज होने पर एक खास तरह का प्रोटीन बनने से आंखों की क्रियात्मकता कम हो जाती है। फलस्वरूप 10 से 15 एमीनो एसिड्स से बने छोटे-छोटे पेप्टाइड बनने लगते हैं। ये पेप्टाइड मोतियाबिंद की रफ्तार बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।


शर्मा का कहना है कि अब अगले चरण में हम पेप्टाइड को बनने से रोकने के तरीके तलाशेंगे। वह कहते हैं- यदि हम इसमें सफल रहते हैं तो उम्र के साथ आंखों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रोक सकते हैं।
गौरतलब है कि 70 से 80 साल की उम्र के 42 फीसदी और 80 साल से अधिक उम्र के 68 फीसदी लोगों में मोतियाबिंद की समस्या पाई जाती है।

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