विभाज्‍य व्‍यक्तित्‍व विकार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 17, 2011
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विभाज्‍य व्‍यक्तित्‍व विकार ऐसा मनोवैज्ञानिक विकार है जिसमें, मनुष्य अपनी शश्‍सियत तक भूल जाता है। इससे मनुष्‍य की मनः स्‍थिति ऐसी हो जाती है कि व्यक्ति अपने व्यक्तिगत सम्बन्धों में बहुत ही अनिश्चित हो जाता है। जैसे अचानक गुस्सा आ जाना, भावुक ना होना और बिना किसी कारण स्वयं में परित्याग की भावना का होना।


अमेरिकन साइकैट्रिस्ट एसोसिएशन के अनुसार आज लगभग 2 प्रतिशत जनसंख्या बी एस डी की शिकार है। इस बीमारी से ग्रसित मरीज़ अपनी संवेदनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाते। ऐसा भी हो सकता है कि वो शांत रहें और लम्बे समय तक समझदारी दिखाएं। बी पी डी से ग्रसित लोगों के लक्षण:

 

  • बी पी डी से ग्रसित लोग कभी कभी अपने आपको बुरा और अयोग्य समझते हैं और उन्हें ऐसा अनुभव होता है कि लोग उनसे ठीक से बर्ताव नहीं कर रहे हैं ।
  • अपनी ज़िम्मेदारियों से बचने के लिए वो बचाव के तरीके अपनाते हैं जैसे किसी सामान को फाड़ना या चिल्लाना । ऐसा करते समय ऐसे लोग दूसरों का अवमूलन करते हैं और कभी कभी ऐसे मरीज़ बचाव के दूसरे तरीके भी अपनाते हैं जैसे प्रोजेक्टिव आइडेंटिफिकेशन।
  • यह ऐसी स्थिति है जब मरीज़ अपने अहसासों को भी पहचानना नहीं चाहता।यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों में हो सकती है।
  • पुरूषों की तुलना में महिलाओं में यह बीमारी ज़्यादा पायी गयी है और लगभग 75 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रसित पायी गयी हैं ।
  • बी पी डी के मरीज़ अकसर लम्बे समय तक इम्पलसिव होते हैं और इनकी भावनाएं तीव्र गति से बदलती रहती हैं। बहुत सी स्थितियों में जब बी पी डी जैसी बीमारी युवावस्था में होती है तो यह उम्र के ढलने के साथ ठीक भी हो जाती है।
  • अगर यह बीमारी 30 से 40 वर्ष की उम्र में होती है तो ऐसी स्थिति में इलाज बहुत ज़रूरी हो जाता है । बी पी डी से मूड डिज़ार्डर और डीप्रेशन जैसी दूसरी दिमागी समस्याएं भी जुड़ी होती हैं।

 

बी पी डी से जुड़ी अन्‍य समस्याएं :

 

  • अकसर परेशान रहना या अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिव डिज़ार्डर से ग्रसित होना।
  • बी पी डी का पता लगाने से पहले चिकित्सक के लिए मरीज़ की मेडिकल हिस्टरी जानना भी ज़रूरी होता है। मरीज़ की बीमारी का कारण जानने के लिए फिज़िकल इक्जिमिनेशन किया जाता है ।
  • कभी कभी मरीज़ से सवाल भी किये जाते हैं जैसे कि क्या उन्हें अपने रिश्तों में अस्थिरता दिखती है।
  • क्या उनका खुद का बिंब उन्हें बदलता सा लगता है।
  • क्या वो कभी आवेग में दूसरों से विध्वंसक होकर बातें करते हैं ।
  • क्या वो कभी आत्महत्या करने की कोशिश करते हैं।
  • क्या उनका मूड अचानक बदलता रहता है।
  • बी पी डी का पता तब लगता है जब कोई व्यक्ति लम्बे समय तक ऐसा बर्ताव करता है।  इस तरह के आवेग का असर अकसर कुछ स्थितियों में होता है जैसे सेक्स ,मादक द्रव्यों का सेवन, लापरवाही से ड्राइविंग करना, अपने आपको नुकसान पंहुचाना, खाली खाली सा महसूस करना और गुस्से पर नियंत्रण ना होना।

 

बार्डरलाइन पर्सानालिटी डिज़ार्डर की चिकित्सा के तरीके:

 

  • बार्डरलाइन पर्सानालिटी डिज़ार्डर की चिकित्सा के लिए व्यक्तिगत या सामूहिक साइकोथेरेपी दी जाती है।
  • हाल में कुछ सालों में काग्निटिव बिहेवियर थेरेपी को डायलेटिकल बिहेवियर थेरेपी कहा जाने लगा है।
  • यह थेरेपी मरीज़ के अनुभव और उसके दूसरे लोगों से रिश्ते पर निर्भर करती है।
  • मरीज़ को उसके व्यवहार पर नियंत्रण करना सिखाया जाता है। कुछ मरीज़ों को विशेष प्रकार की दवा लेने से भी आराम मिलता है । एण्टी डिप्रेसेंट जैसे सेलेक्टिव सेरोटोनिन ,मोनोअमीन आक्सिडेज़ इनहिबिटर्स और एण्टीसाइकोटिक्स को भी थेरेपी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में सिज़ोफेरनिया को ठीक करने वाली दवाएं भी ली जा सकती हैं।
  • लीथियम से अस्थिर मनोदशा ठीक रहती है और एण्टीकन्वल्सेन्ट्स की मदद से डीप्रेशन को ठीक किया जा सकता है साथ ही मूड को भी नियंत्रित किया जा सकता है।  गंभीर परिस्थितियों में मरीज़ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है।  मानसिक स्वास्थ्य के राष्ट्रीय संस्थान के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत साइकैट्रिक अस्पताल बार्डरलाइन पर्सानालिटी डिज़ार्डर से जुड़े होते हैं ।

 

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