खून की जांच बता देगी गर्भस्थ शिशु का लिंग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 25, 2011
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • बच्‍चे के लिंग निर्धारण कि लिए ले सकते हैं ब्‍लड टेस्‍ट का सहारा।
  • डीएनए, सोनोग्राम जैसे जांच की तुलना में यह ज्‍यादा सुरक्षित है।
  • सात हफ्ते के शिशु का लिंग निर्धारण कर सकते हैं इस जांच से।
  • बच्‍चे के 11 महीना पूरा होने के बाद ही हो सकता है अलट्रासाउंड।

लिंग निर्धारण के लिए खून की जांच भरोसेमंद साबि‍त हो सकती है। कई शोधों में यह बात सामने आयी है कि बच्‍चे के लिंग के निर्धारण के लिए रक्‍त के नमूने की जांच काफी है। रक्‍त की जांच करके बच्‍चे के लिंग का निर्धारण किया जा सकता है।

Blood Test Can Tell Fetus's Sexब्‍लड टेस्‍ट के जरिए सात हफ्ते के गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता लगाया जा सकता है और इससे भ्रूण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। यह सबसे कम समय में होने वाल टेस्‍ट है, जबकि अल्‍ट्रासाउंड के लिए कम से कम गर्भधारण के बाद 11 हफ्ते का समय गिना जाता है। अल्‍ट्रासाउंड की तुलना में यह ज्‍यादा भरोसेंमद जांच है। आइए हम आपको इसके बारे में विस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं।

 

क्‍या कहता है शोध  

अमेरिका में हुए एक अध्ययन में कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं के खून का डीएनए परीक्षण करने से सात हफ्ते के गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता लगाया जा सकता है और इससे भ्रूण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। अध्ययन के परिणाम ‘अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ की पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इसमें कहा गया है ‘शिशु के लिंग का पता करने के लिए महिला के रक्त से कोशिका मुक्त भ्रूण, डीएनए का परीक्षण, मूत्र परीक्षण या सोनोग्राम की तुलना में काफी सटीक और गर्भवती महिला की गर्भाशय जांच से अधिक सुरक्षित है।’

गर्भस्थ शिशु का अल्ट्रासाउंड भी 11 से 14 हफ्ते का होने पर ही किया जा सकता है लेकिन रक्त के डीएनए परीक्षण के जरिए सात हफ्ते के गर्भस्थ शिशु का भी लिंग ज्ञात किया जा सकता है। यह डीएनए परीक्षण गर्भवती महिला के गर्भ की जांच करने से अधिक सुरक्षित है। गर्भाशय जांच में भ्रूण के इर्द गिर्द की थैली से तरल पदार्थ लिया जाता है जिसमें कभी- कभार गर्भपात की आशंका रहती है। अध्ययन में कहा गया है ‘भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए भरोसेमंद विकल्प की उपलब्धता से गर्भपात की आशंका कम होगी और इस विधि का उन गर्भवती महिलाओं द्वारा स्वागत किया जाएगा जिन्हें भ्रूण के विकृति युक्त होने का जोखिम रहता है।’

 

अन्‍य जांच

गर्भस्‍थ शिशु के लिंग का निर्धारण करने के लिए ब्‍लड टेस्‍ट के अलावा कई अन्‍य तरीके भी हैं। अल्‍ट्रासाउंड, डीएनए का परीक्षण, मूत्र परीक्षण या सोनोग्राम का भी प्रयोग किया जा सकता है। इन सबमें सबसे ज्‍यादा प्रयोग में लाया जाने वाला यंत्र है अल्‍ट्रासाउंड। अल्‍ट्रासाउंड की तकनीके के जरिए लिंग का निर्धारण आसानी से किया जा सकता है। इन जांचों का फायदा भी है। इसके जरिए आप बच्‍चे के विकास और स्‍वास्‍थ्‍य की जानकारी कर सकते हैं। कुछ मामलों में यह सुरक्षित होता है, लेकिन अल्‍ट्रासाउंड के दौरान निकलने वाली किरणें बच्‍चे के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। इसलिए ऐसी जांच कराने से बचना चाहिए।

 

 

हालांकि लिंग निर्धारण में पूरी तरह से पिता की भूमिका होती है। पिता के गुणसूत्रों से ही लड़का और लड़की का निर्धारण होता है, महिला में केवल एक्‍स गुणसूत्र होता है जबकि पुरुष में एक्‍स और वाई गुणसूत्र होते हें। यदि एक्‍स-एक्‍स गुणसूत्र मिलें तो लड़का और यदि महिला का एक्‍स और पुरुष का वाई गुणसूत्र मिलें तो लड़की पैदा होती है।

 

 

Read More Articles On Pregnancy Test In Hindi

Write a Review Feedback
Is it Helpful Article?YES108 Votes 61776 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर