जानें कैसे साइनसा‍इटिस में फायदेमंद है तुलसी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 03, 2016
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Quick Bites

  • जुकाम, एलर्जी, के कारण साइनस में संक्रमण हो जाता है।
  • साइनस की समस्या बढ़कर बन जाती है साइनसाइटिस।
  • नाक के अंदर की हड्डी का बढ़ जाना आदि होते है लक्षण।
  • तुलसी और कालीर्मिच के सेवन से कर सकते है नियंत्रण।

साइनसाइटिस आज के समय की एक आम समस्या है जो साइनस में संक्रमण द्वारा होने वाली सूजन से होती है।साइनोसाइटिस की समस्या का मूल कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनसिस्टम) का कमजोर होना माना जाता है। सर्दी-जुकाम, एलर्जी या नाक के भीतर निकलने वाला फोड़ा आदि में से कुछ भी इस समस्या की जड़ हो सकता है।जब किसी कारणवश साइनस के संकरे प्रवेश मार्ग में रुकावट आ जाती है तो ये समस्या बढ़ जाती है।मॉर्डन मेडिकल साइंस ने साइनसाइटिस को क्रोनिक और एक्यूट दो तरह का माना है। इस समस्या में तुलसी बहुत राहत देती है।

क्यों और कैसे होता है साइनसाइटिस

  • नाक के आसपास चेहरे की हड्डियों में नम हवा के रिक्त स्थान होते हैं जिन्हें साइनस कहते हैं। इन साइनस की अंदरुनी सतह में एलर्जी या किसी अन्य कारण से सूजन आ जाए तो साइनसाइटिस की समस्या हो जाती है। यह सूजन बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण से पैदा होती है।
  • इस रोग में नाक के अंदर की हड्डी का बढ़ जाती है या तिरछा हो जाती है जिसके कारण श्वास लेने में रुकावट आती है। ऐसे मरीज को जब भी ठंडी हवा या धूल, धुवां उस हड्डी पर टकराता है तो व्यक्ति परेशान हो जाता है।बदलते मौसम, जुकाम, एलर्जी, प्रदूषण के कारण साइनस में संक्रमण हो जाता है।
  • नाक या गले के पिछले हिस्से से गाढ़े पीले या हरे रंग का स्त्राव, सूंघने व स्वाद पहचानने की क्षमता में कमी, चेहरा या सिर में दर्द रहना,चेहरे और सिर में बार-बार हल्की-सी टीस उठना आदि इसके प्रमख लक्षण होते है। कई बार हम इन लक्षणों को मामूली जुकाम या खांसी समझकर इसका इलाज कराने में लापरवाही बरत देते है।

 

तुलसी से मिले आराम

 

  • तुलसी में कमाल की कासरोधक (कफ़ कम करने में मददकारी), कफ़ उत्सारक (सीने से बलगम निकालने में मददकारी), जीवाणुरोधी और फ़ंगलरोधी क्षमता होती है।ह आपके इम्युन सिस्टम (प्रतिरोधी क्षमता) को मज़बूत करके आपके शरीर को संक्रमण से लड़ने की क्षमता देता है।
  • जुकाम के दौरान अक्सर छाती में कफ या म्यूकस बैठ जाता है गले से खरखराने जैसी आवाज निकलती है उसको साफ करने में सहायता करती है। तुलसी में एन्टी-बैक्टिरीयल गुण होता है जो श्वास संबंधी बैक्टिरीयल इंफेक्शन को बढ़ने से रोकती है। इसमें एसेनशियल ऑयल जैसे कैमफेन, यूजेनॉल और सिनॉले होता है चेस्ट कॉन्जेशन से राहत दिलाने के साथ-साथ म्यूकस को भी बाहर निकालता है।
  • शहद और तुलसी की पत्तियों का पीसकर मिश्रण तैयार करें और प्रतिदिन सुबह सुबह इसका सेवन करें।तुलसी का रस और शहद चाटने से साइनस रोगियों को व सांस फूलने की समस्या वाले लोगों को आराम मिलता है। इससे सांस की बंद नलियां तुरंत ही खुल जाती हैं।
  • तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर उनमें पिसी काली मिर्च डालकर खाने के साथ देने से साइनसाइटिस नियंत्रण में रहता है। अगर साइनसाटिस आपको ज़्यादा परेशान कर रहा हो तो आप दिन में तीन बार यह काढ़ा पी सकते हैं।



इन सबके अलावा, इसमें थोड़ा ठंडापन भी होता है जो साइनसाइटिस से जुड़े दर्द को दूर करने में प्राकृतिक रूप से कारगर है।

 

Image Source-Getty

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