ध्‍यान से कम होते हैं आत्‍महत्‍या के विचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 31, 2014
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Quick Bites

  • जीवन की असफलताओं से निराश लोग करते हैं आत्‍महत्‍या।
  • एनसीसीएम ने ध्‍यान और आत्‍महत्‍या को लेकर किया शोध।
  • रोज ध्‍यान लगाने लोग खुद को नहीं पहुचाते हैं नुकसान।
  • ऐसा विचार आने पर दोस्‍तों और घरवालों से बात कीजिए।

जीवन में सफलता और असफलता के साथ-साथ हर तरह की स्थितियां सामने आती हैं, कुछ लोग इनका सामना जिंदादिली से करते हैं और जो बुजदिल होते हैं वे इसके आगे नतमस्‍तक हो जाते हैं। जो लोग इसका सामना नहीं कर पाते उनके मन में जीवन को समाप्‍त करने वाले विचार यानी आत्‍महत्‍या के विचार आते हैं।

आत्‍महत्‍या का विचार सबसे ज्‍यादा छात्रों में देखी जाती है, परीक्षा में फेल होने के बाद उनके मन में आत्‍महत्‍या का विचार आता है। इसके अलावा जिन लोगों को उपेक्षित सफलता नहीं मिलती और जो लोग सताये हुए होते हैं वे भी आत्‍महत्‍या का विचार अपने मन में लाते हैं। एक शोध में यह बात सामने आयी है कि ध्‍यान करने वाले लोगों के मन में आत्‍महत्‍या का विचार कम आता है। इस लेख में विस्‍तार से जानिये कि कैसे ध्‍यान आत्‍महत्‍या के विचार से व्‍यक्ति को दूर रखता है।

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शोध के अनुसार

नेशनल सेंटर फॉर कम्‍प्‍लीमेंटरी एंड ऑल्‍टरनेटिव मेडिसिन द्वारा स्‍कूल जाने वाले बच्‍चों (15 से 20 साल के बच्‍चों) पर कराये गये एक शोध के अनुसार, जो बच्‍चे सप्‍ताह में 6 दिन ध्‍यान लगाते हैं उनका दिमाग शांत होता है और आत्‍महत्‍या करने और खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचार उनके मन में बिलकुल नहीं आते।

जबकि ऐसे बच्‍चे जो ध्‍यान नहीं लगाते असफल होने के बाद उनके दिमाग में ऐसे विचार आते हैं और इस परिस्थिति में वे खुद को नुकसान पहुंचाने से भी पीछे नहीं हटते। इस अध्‍ययन के लिए 100 से अधिक बच्‍चों पर शोध किया गया। जिन लोगों ने ध्‍यान में हिस्‍सा लिया उनके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचार नहीं आये। इस शोध में यह बात सामने आयी कि अगर आप नियमित रूप से ध्‍यान लगाते हैं तो आत्‍महत्‍या का विचार आपके मन में कभी नहीं आयेगा।

 

क्‍यों आता है आत्‍महत्‍या का विचार

परीक्षा में फेल होना, प्‍यार में असफल होना, बॉस द्वारा सताया जाना, घर का माहौल ठीक न होना, जीवन में उपेक्षित सफलता न मिलना, आदि कुछ ऐसे कारण हैं जिनके कारण आत्‍महत्‍या का विचार आता है। ऐसे लोगों को लगता है यह उनके जीवन का अंत है और भविष्‍य में उनके जीने का कोई उद्देश्‍य नहीं बचा और वे आगे कुछ भी नहीं कर पायेंगे। वे लोग जीवन से निराश होकर आत्‍महत्‍या करने का विचार कर लेते हैं।

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ऐसा विचार आने पर क्‍या करें

  • परिवार अथवा मित्रों से बात कीजिए। अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र अथवा किसी सहयोगी से बात कर लेने से आपको बहुत राहत मिल सकती है। हो सकता है इससे आपके मन में आने वाला विचार दूर हो जाये।
  • अगर आप घरवालों से इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहते तो ऐसे लोगों से बात कीजिए जिसे आप नहीं जानते। ऐसे लोग भी आपके मन में उत्‍पन्‍न हो रहे विचार को दूर करने में मदद कर सकते हैं।
  • डॉक्टर से बात कीजिए। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से हीन भावना से ग्रस्त है अथवा आत्महत्या करने की सोच रहा है तो वह एक मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। रासायनिक असंतुलन के कारण इस प्रकार की चिकित्सकीय परिस्थिति उत्पन्न होती है और दवाइयों और अथवा चिकित्सा पद्धति के माध्यम से डॉक्टरों द्वारा सामान्यतः इसका उपचार किया जा सकता है।


लेकिन नियमित रूप से ध्‍यान और योग करने से मन शांत रहता है, मन विचलित नहीं होता और मन में बुरे खयाल भी नहीं आते हैं, इसलिए अपनी नियमित दिनचर्या में ध्‍यान को शामिल कीजिए।

 

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