बहुत कुछ सिखा सकते हैं 'मनोरोगी'

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 21, 2013
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bahut kuch sikha sakte hai manorogi

'मनोरोगी' की बात करते ही हमारे जेहन में एक खतरनाक तस्‍वीर बनती है। लेकिन, इसे पढ़ने के बाद शायद आपके विचार बदल जाएं।

 

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रायोगिक मनोविज्ञानी प्रोफेसर केविन डटन मनोरोग को लेकर बिलकुल अलग राय रखते हैं। उनका कहना है कि वास्‍तव में मनोरोग हमारे मस्तिष्‍क में बनी पारंपरिक छवि से बिलकुल अलग भी हो सकता है। अपनी नई किताब 'विज़डम आफ साइकोपैथ' में प्रोफेसर डटन ने बताया है कि मनोरोगियों में पाए जाने वाले कुछ गुणों को अपनाने से हमारी कार्यक्षमता बढ़ सकती है।

 

केविन कहते हैं कि आमतौर पर जब मनोविज्ञानी मनोरोगी शब्द का प्रयोग करते हैं, तो ज्यादातर लोगों के जेहन में सबसे पहले पागल हत्यारों की छवि ही उभरती है। लेकिन, केविन मानते हैं कि निर्दयी, निडर, आत्मविश्वासी, एकनिष्ठ, मानसिक दृढ़ता, चमत्कारिक या आकर्षक व्यक्तित्व जैसे गुण मनोरोगियों में भी पाये जाते हैं।

 

केविन यहां तक कहते हैं कि ये सभी गुण अपने आप में कोई मुसीबत नहीं हैं। समस्या तब होती है जब इन सारे गुणों की अति होने लगती है। और ऐसे लोग दूसरों का जीवन बर्बाद कर देते हैं। बीबीसी की हिन्‍दी वेबसाइट पर प्रकाशित खबर में वे कहते हैं कि मनोरोगियों में एक बड़ा गुण यह होता है कि वे किसी काम को टालते नहीं हैं। वे किसी चीज को निजी तौर पर नहीं लेते और किसी काम के बिगड़ जाने पर वो खुद को तकलीफ नहीं पहुंचाते।

 

मनोरोगियों के पेशे

 

मनोरोगी आमतौर पर दूसरों को होने वाली तकलीफों की परवाह नहीं करते, लेकिन, कई पेशों में यह गुण काफी लाभकारी हो सकता है। प्रोफेसर डटन कहते हैं, ''मान लीजिए कि आपमें बढ़िया सर्जन बनने की योग्यता है, लेकिन रोगी की सर्जरी करते समय आप उसके कष्ट की अनदेखी नहीं कर पाते।'' यानी लोगों के प्रति लापरवाह होना कई क्षेत्रों में आपकी सफलता सुनिश्चित कर सकता है।

 

प्रोफेसर डटन बताते हैं कि सफल राजनीतिज्ञों में भी कई बार मनोरोगियों की प्रवृत्तियां पाई जाती हैं। राजनीतिज्ञ कई बार विरोध के बावजूद पूरी कड़ाई से फैसले लेते हैं। अगर देखा जाए तो अधिकतर सफल राजनेता वही लोग होते हैं, जो जनता को पसंद आने वाली बातें कहते हैं। राजनीतिज्ञ लोगों की भावनाओं को समझने में माहिर होते हैं। आप कह सकते हैं कि वो दिमाग में झांक लेने वाले लोग होते हैं।

 

हालांकि इस बीच कुछ ऐसे भी लोग हैं जो डटन की बातों से इत्तेफाक नहीं रखते। आमतौर पर मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि दुनिया में मनोरोगियों की संख्‍या एक फीसदी से ज्‍यादा नहीं है, लेकिन जिस तरह डटन मनोरोगियों को परिभाषित कर रहे हैं, उससे इसका दायरा काफी बड़ा हो जाता है। लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट स्कूल के प्रोफेसर कैरी कूपर कहते हैं, ''क्लीनिकल साइकॉलजी में जिन अर्थों में मनोरोगी शब्द का प्रयोग होता है उसके आधार पर इन लोगों को मनोरोगी कहना गलत होगा। मनोविज्ञान में 'मनोरोग' एक परिभाषित अवधारणा है।''

 

'मनोरोगियों' को परिभाषित करने के सवाल को दरकिनार करते हुए चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ पर्सनल एंड डेवलपमेंट के प्रोफेसर जॉनी गिफर्ड की राय डटन के समान ही है। वह मानते हैं कि इन व्यावहारिक प्रवृत्तियों से काफी कुछ सीखा जा सकता है। गिफर्ड कहते हैं कि हममें से बहुत से लोग सक्रिय राजनीति में नहीं जाना चाहते, लेकिन हमें सच स्वीकार करते हुए यह मान लेना चाहिए कि राजनीति में जाने के लिए थोड़ी कुटिलता जरूरी है। वे कहते हैं कि हमें कई बार उचित राह पर चलने के लिए कड़ाई से पेश आना होता है। यह कहना आसान है कि आप अपने मूल्यों के अनुसार काम करें लेकिन संभव है कि आपके मूल्य किसी काम के न हों।

 

गलाकाट प्रवृत्ति वाले लोग

 

ऐसे लोग जो अपने साथियों की परवाह किए बगैर सिर्फ अपनी प्रगति के बारे में सोचते हैं वो छोटा—मोटा लाभ कमा सकते हैं लेकिन लंबे दौर में ऐसे लोग संस्थान के लिए नुकसानदेह होते हैं।

 

गिफर्ड कहते हैं कि वे खुद तो बहुत अच्छे होते हैं लेकिन उनकी टीम को उनके कारण कष्ट सहना पड़ता है। इस पर प्रोफेसर डटन का कहना है कि एक बड़ी कंपनी चलाने के लिए आपको कई बार निर्दयी और असहिष्णु होना पड़ता है।

 

जिन लोगों को लगता है कि उनके बॉस में मनोरोग की प्रवृत्तियां कुछ ज्यादा ही हैं तो उनके लिए प्रोफेसर डटन के पास एक ही सलाह है। यदि आपका बॉस अपने से नीचे वालों को दबाए रखता है, लेकिन अपने से ऊपर के लोगों को खुश करने की हर कोशिश करता है तो आपको दूसरी नौकरी खोज लेनी चाहिए।



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