बढ़े हुए थायराइड के बारे में पांच बातें जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 03, 2012
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Quick Bites

  • थायराइड ग्रंथि करती है मेटाबॉलिज्‍म को नियंत्रित।
  • इससे बच्‍चों के विकास पर भी पड़ता है बुरा असर।
  • महिलाओं को आता है बहुत अधिक पसीना।
  • थायराइड की अधिकता होने पर जोड़ों में पानी भर जाता है।

थायराइड ग्रंथि कार्टिलेज से ठीक नीचे होती है। इसका काम मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के लिए हार्मोन बनाना है जो शरीर की सभी कोशिकाओं को नियंत्रित करता है। जब इस ग्रंथि में कोई गड़बड़ी होती है तो इसमें से बहुत अधिक मात्रा में या कुछ कम मात्रा में हार्मोन्स निकलने लगते हैं, जिसकी वजह से थायरॉइड की समस्या शुरू होती है।

thyroid factsथायरॉइड हार्मोन्स जब शरीर में कम काम करे तो उस स्थिति में हाइपोथायरॉइडिज्म की समस्या उत्पन्न होती है।  यह समस्या 20 से 40 आयुवर्ग के लोगों में अधिक होती है। थायराइड से संबंधित समस्याओं में आज न सिर्फ हाइपोथयराइड, हाइपरथायराइड, गॉइटर, थायराइडाइटिस के अलावा थायराइड कैंसर जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।



थायराइड के बारे में पांच बातें


1. बहुत से छोटे-छोटे बदलाव आपके शरीर में होते हैं जिनपर वैसे तो ध्यान नहीं जाता। लेकिन जब डॉक्टर इन लक्षणों के आधार पर थायराइड की बीमारी बताता है तो होश उड़ जाते हैं। थायराड के कारण शारीरिक व मानसिक विकास का धीमा पड़ सकता है। 12 से 14 साल के बच्चे की शारीरिक वृद्धि रुक जाती है।
 
2. थायरॉइड हार्मोन्स ज्यादा बनने लगता है। धड़कन की गति धीमी पड़ जाती है। जोड़ों में पानी आ जाता है जिससे दर्द होता है और चलने में भी दिक्कत होती है। शरीर में सूजन भी आ जाती है। दूसरों की अपेक्षा अधिक ठंड लगती है।  

3. गर्दन में गांठ, गर्दन के निचले हिस्से में दर्द। बोलने में दिक्कत, सांस लेने व बोलने में दिक्कत जैसी कठिनाइयां। बालों का ज्यादा झड़ना और दर्द होना।

4. भूख पर कंट्रोल नहीं और नींद गायब। कार्यक्षमता कम हो जाती है। मेटाबॉलिक रेट कम हो जाता है। डिप्रेशन महसूस होना। वह बात-बात में भावुक हो उठना, कमजोरी, काम में अरुचि, थकान महसूस होना। बालों का झड़ना और पतला होना, चेहरा सूजा हुआ लगना, रूखी आवाज, बहुत धीरे-धीरे और वक्त लगाकर बात करना।

5. महिलाओं को ऐसे में पसीना अधिक आता है। उनके प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। मासिक धर्म के दौरान अधिक खून जाता है। खून के थक्के अधिक आते हैं। मासिक चक्र नियमित नहीं रहता है। भूख अच्छी लगती है, महिला खूब खाती है, लेकिन मोटापे की शिकार नहीं होती। थोड़े-थोड़े दिनों के अंतराल में दस्त भी आते हैं। ऐसे लक्षण सामने आते हैं जैसे मरीज डरा हुआ है आंखें फटी-फटी प्रतीत होती हैं।

 

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