बच्चों में अस्थमा के जुडे कुछ भ्रम

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 17, 2015
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Quick Bites

  • बच्चों के विकास को प्रभावित करते है अस्थमा से जुड़े भ्रम।
  • दिशानिर्देश में अस्थमा रोगी बच्चे भी कर सकते है व्यायाम।
  • अस्थमा की समस्या से मानसिक रोग का कोई संबंध नहीं।
  • सांस लेने में तकलीफ होना ही केवल अस्थमा की लक्षण नहीं।

बच्चों में अस्थमा से जुडे कई तरह के भ्रम प्रचलित है। जिससे इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की ठीक प्रकार से देखभाल नहीं हो पाती है। बच्चों में अस्थमा से  जुड़ी बीमारियों को  समझना जरूरी है ताकि आप आसानी से बच्चों की देखभाल का सके इस बीमारी से, बचपन में अस्थमा बहुत ही कष्टककारक बीमारी है बच्चों के लिए और साथ ही साथ अभिभावको के लिए भी, आप पहले अस्थमा के प्रमुख कारणों को जान ले, ताकि आप अपने बच्चो की अच्छी देखभाल कर सकें।

Asthma in Hindi

बचपन में अस्थमा से पीडि़त बच्चा व्यायाम नहीं कर सकता

व्या‍याम एक स्वस्‍थ उपाय है अस्थमा के मरिजों और अस्‍थमा वाले बच्चों के लिए, बस आपको यह जानकारी होनी चाहिए की अस्थमा की बीमारी में कौन से व्यायाम नहीं करने चाहिए, जिससे अस्थमा अटैक न आए। अगर आपका बच्चा व्यायाम के बाद सांस की कमी की तकलीफ के गुजर रहा है या सर्दी जुकाम से पिडि़त है या सीने की दर्द की शिकायत कर रहा है तो व्यारयाम ना करने दें, आप अपने बच्चे के केयर करने वाले से सलाह लेकर उसे 15 मिनट पहले इनहेलर दे व्यायाम शुरू करने के पहले, ताकि उसको सांस लेने में कोई परेशानी ना।

अस्थमा अटैक में बच्चों का फेफड़ा कार्य करता है

अस्थमा कोई मानसिक बीमारी नहीं है, बल्कि इसका कारण ज्यादा हंसने, रोने, दुखी होने जैसे भावात्मक बातों के कारण नहीं होता, बल्कि यह सामान्य है और आपको तुरंत उपचार की जरूरत पड़ सकती है। कुछ लोगों का मानना है कि अस्थमा अटैक के समय बच्चों को मेडीसिन नहीं देनी चाहिए, उनका फेफड़ा ज्यादा मजबूत हो जाता है। यह सबसे बडा भ्रम है बच्चों से जुड़े अस्थमा की। एक बार का अस्थमा अटैक इतना हानिकारक नहीं होता जितना बार बार हुए अटैक से शरीर को हानि पहुंचती है।
Asthma in Hindi


तकलीफ से सांस ना लेने का मतलब अस्थमा ना होना

तकलीफ से सांस लेना अस्थमा की सबसे आम निशानी है। सबसे आम बात कफ का हमेशा होना भी माना जा सकता है, पर हर वो बच्चा जो अस्थमा से पीडि़त है जरूरी नही की वह कफ की बीमारी से भी परेशान हो। अस्थमा का उपचार रोज की देखभाल मागंता है, साथ ही इसे आपातकालिन उपचार एवं देखभाल की भी जरूरत पड़ती है।


शुरूआती दौर में इसको अनदेखी करना आपके बच्चे को ज्यादा तकलीफ पहुंचा सकता है। अगर आप रोज अपने बच्चे को मेडिसन देते है तो यह उसके ठीक होने के लिए लाभदायक होगा, इस बीमारी से सही उपचार ही समाधान है।

 

Image Source-Getty

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