बार-बार गुस्‍से से बढ़ता है रक्‍तचाप

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 17, 2013
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baar baar gusse se badta hai raktchap

अगर आप मोटापे के शिकार नही है और आपको मधुमेह भी नही है बावजूद इसके बात-बात पर गुस्‍सा आता है तो उच्‍च रक्‍तचाप का पहला लक्षण है।

 

यह आपकी सेहत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है। इंडियन साइकिल एसोसिएशन के अध्‍ययन कहते है कि लगातार तनाव के शिकार लोगों में ब्रेन स्‍ट्रोक की आशंका भी 40 फीसदी बढ़ जाती है। जबकि उच्‍च रक्‍तचाप की वजह से लगातार बढ़ती दिल की धड़कने हृदयघात के लिए पहले से ही खतरा मानी गई हैं।

 

अध्‍ययन में यह भी सामने आया है कि कामकाजी युवाओं में उच्‍च रक्‍तचाप बढ़ता जा रहा है जो उनके तनाव की पहली सीढ़ी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान के न्‍यूरोलॉजी विभाग की डॉ पद्ममा श्रीवास्‍तव ने बताया कि संस्‍थान में हर साल ब्रेन स्‍ट्रोक के 400 मरीज भर्ती किए जाते हैं। जिसमें 60 फीसदी मरीजों में उच्‍च रक्‍तचाप पाया गया है।

 

रॉकलैंड अस्‍पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ़. हर्ष महाजन कहते है कि ऑफिस में 8 से 10 घंटे बिताने वाले 45 प्रतिशत युवा तनाव के करीब हैं। बचाव के लिए 18 साल के बाद उच्‍च रक्‍तचाप नियंत्रित रखने व‍ि नियमित बीपी जांच करानी चाहिए।

 


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