एचआईवी के लिए आयुर्वेदिक उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 28, 2011
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एचआईवी / एड्स एक वैश्विक महामारी बन गया है और आधुनिक चिकित्सा में भी एचआईवी / एड्स के लिए कोई सिद्ध इलाज नही है। एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी को हाल ही में एड्स के इलाज के लिए प्रयोग किया गया है। हालांकि इसके साथ कई साइड इफेक्ट, प्रतिरोध के विकास जुड़े है और यह बहुत महंगा है। एलोपैथिक दवाओं की इन सीमाओं के कारण, आयुर्वेदिक उपचार एचआईवी/एड्स से रोगियों के लिए दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए उपयोगी विकल्प बन गया हैं। अधिकांश आयुर्वेदिक उपचार के गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होते और काफी किफायती भी हैं।


आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ, पौष्टिक आहार, व्यायाम और योगा, अवसरवादी संक्रमण के लिए समय पर एलोपेथिक उपचार और नियमित रूप से परामर्श लेना एड्स के रोगियों के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं। एचआईवी/एड्स के उपचार के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी बूटी में, अमालाकी, अश्वगंधा, और तुलसी है। आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग रोगियो में एड्स के वायरस को खत्म करने, इम्यून डेवलपर, या शरीर को साफ करने के लिए किया जा सकता है।



वायरस किलर के रूप में आयुर्वेदिक दवाएं : विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयां जैसे कि ऐरी चथुरा, त्रिफला, सक्षमा त्रिफला शक्तिशाली वायरस किलर है जो एचआईवी वायरस को भी मार सकते है। ये दवाएं संयुक्त हो सकती है या एलोपेथिक दवाओं के साथ इस्तेमाल में लाई जा सकती है।



इम्यून डेवलपर्स के रूप में आयुर्वेदिक दवा: ये आयुर्वेदिक दवाएं इम्यूनिटि को बढ़ाती है, सीडी4 सेल के साथ साथ सीडी8 कोशिका को भी एचआईवी से लड़ने के लिए जाना जाता है। च्यवनप्राश, अश्वगंधा रसायन, अजमामसा रसायन, कनमाड़ा रसायन, शोनिथा बस्कारा अरिश्ठा ऐसी दवाए है जो कि प्रतिरक्षा को बढ़ावा देती है।



शारीरिक क्लींसर के रूप में आयुर्वेदिक दवा: इन आयुर्वेदिक दवाओं शरीर को साफ करने, नसों, यहां तक कि कोशिकाओं को साफ करती है। शोनीथा बस्कारा अरिष्ठा, ननार्य अरिष्ठा, क्शीरा बाला कुछ आयुर्वेदिक दवाएं है जोकि प्रतिऱक्षा को बढ़ाती है और बॉडी क्लींसर के रूप में कार्य करती है।


आयुर्वेद के साथ सावधानीः आयु्र्वेदिक दवाएँ एचआईवी/एड्स के रोगियों के उपचार में उपयोगी है लेकिन ये दवाएं पूरी तरह से इलाज नही कर सकती। एंटीरिट्रोवाइरल औषधियां के विपरित वे जल्दी असर नही दिखाती है। कुछ आयुर्वेदिक दवाएं आपके एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी से सबंधित हो सकती है। आयुर्वेदिक दवाओं के चयन से पहले अपने डॉ. से पूछे बिना एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी लेना बंद न करें।

 

 

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