आयुर्वेद से करें एक्जिमा का उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 28, 2011
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Quick Bites

  • एक प्रकार का चर्म रोग है एक्जिमा।
  • रोग की शुरुआत में तेज खुजली होती है।
  • चिकित्सा के अभाव में तेजी से शरीर में फैलता है।
  • करेले और नीम का सेवन लाभकारी होता है।

एक्जिमा एक प्रकार का चर्म रोग है। त्वचा के उत्तेजक, दीर्घकालीन विकार को एक्जिमा के नाम से जाना जाता है। इस रोग में त्वचा शुष्क हो जाती है और बार-बार खुजली करने का मन करता है क्योंकि त्वचा की ऊपरी सतह पर नमी की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा को कोई सुरक्षा नहीं रहती, और जीवाणुओं और कोशाणुओं के लिए हमला करने और त्वचा के भीतर घुसने के लिए आसान हो जाता है। एक्जिमा के गंभीर मामलों में त्वचा के ग्रसित जगहों से में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। यह रोग डर्माटाईटिस के नाम से भी जाना जाता है।

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मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेजी से शरीर में फैलता है। एक्जिमा का रोग अपने रोगियों को उम्र और लिंग के आधार पर नहीं चुनता। एक्जिमा के रोग से ग्रस्त रोगी अन्य विकारों के भी शिकार होते हैं। यह किसी भी उम्र के पुरुष या महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाकर इस समस्‍या के लक्षणों को कम किया जा सकता है।


खदिरारिष्ट

२० मिलीलीटर खदिरारिष्ट को २० मिलीलीटर पानी में मिलाकर खाना खाने के बाद दिन में दो बार लेने से फायदा होता है।


गुदुच्याड़ी तेल

एक औषधियुक्त तेल जिसे ग्रसित जगह पर लगाने से लाभ मिलता है।


पञ्चनिम्बडी चूर्ण

खाना खाने के बाद आधे से एक चमच पानी के साथ लेने से भी लाभ होता है।


साफी

रक्त शुद्धी की एक बहुत ही प्रचलित औषधि, जिसके एक दो चम्मच खाली पेट पर लेने से एक्ज़िमा काफी हद तक ठीक हो जाता है।


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शुद्ध गुग्गूल

आयुर्वेद की बहुत ही प्रचलित जड़ी बूटी, गुग्गूल में शुद्धि और तरोताजा करने के लिए अत्यधिक ओजस्वी शक्तियों का समावेश होता है।

 

चन्दन

एक चम्मच कपूर के साथ एक चम्मच चन्दन की लई मिलाकर एक्जिमा से ग्रसित जगह पर लगाने से भी बहुत फायदा होता है।


नीम

नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिला लें। इसे प्रतिदिन सुबह पीने से खून की खराबी दूर होकर एक्जिमा ठीक होने लगता है।


हरड़

4 हरड़ को गौमूत्र में पीसकर लेप बना लें। यह लेप प्रतिदिन दो से तीन बार एक्जिमा पर लगाने से लाभ होता है।

 

आहार और खान पान


  • दही और अचार जैसे खट्टी चीज़ों का सेवन बिलकुल ना करें।
  • करेले और नीम के फूलों का सेवन भी लाभकारी होता है।
  • शुद्ध हल्दी भी एक्जिमा की चिकित्सा में लाभ प्रदान करती है। इसे एक्जिमा के चकतों पर लगाया जा सकता है और दूध में मिलाकर भी पीया जा सकता है।

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क्या करें क्या ना करें


  • डिटरजेंट (कपडे धोने का पाउडर) को बिलकुल भी ना छुएं, पर अगर मजबूरी से छूना भी पड़े तो सूती दस्तानों का प्रयोग करें।
  • एक्जिमा से ग्रसित जगह पर तंग कपडे ना पहनें।
  • सिंथेटिक कपड़ों का भी बिलकुल प्रयोग ना करे, क्योंकि इससे पसीने के निष्काशन में कठिनाई होती है।
  • तरबूज जैसे फलों का नियमित रूप से सेवन करें।
  • गाजर और पालक के रस का मिश्रण पीने से भी एक्जिमा के ठीक होने में लाभ मिलता है।
  • पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करें और चाहें तो संतरे का रस भी पी सकते हैं।
  • अध्ययनों से पता चला है कि टमाटर का रस भी एक्जिमा को चंद दिनों में ठीक करने में सहायक सिद्ध होता है।


Image Courtesy : Getty Images

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टिप्पणियाँ
  • vinay27 May 2014

    I like your blog and this article, this is a good knowledge.

  • Arijit Mandal02 Feb 2013

    thank you for your most valuable tips.

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