अस्‍थमा शरीर को कैसे प्रभावित करता है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 18, 2015
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Quick Bites

  • श्वास नलिकाओं के सिकुड़ने से होता है अस्थमा रोग।
  • बच्चों की शारीरिक गतविधियों को करता है प्रभावित ।
  • बुढ़ापे में हो सकती है क्रोनिक ब्रोंकाइटिस की समस्या ।
  • अस्थमा रोगी गर्भवती महिलाएं रखें ज्यादा सावधानी ।

अस्थमा एक गंभीर बीमारी है। इसको मामूली बीमारी समझकर इसकी उपेक्षा करना उचित नहीं है। अस्थमा श्वास संबंधी रोग है। इसमें श्वास नलिकाओं में सूजन आने से वे सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। अस्थमा का अटैक आने पर श्वास नलिकाएं पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो सकती है। यह चिकित्सकीय रूप से आपातस्थिति है। आइए जानें कैसे अस्थमा शरीर को प्रभावित करता है।

बच्चों पर अस्‍थमा का असर

बच्चों पर अस्‍थमा का असर

बच्चों में अस्थमा उनकी शारीरिक गतिविधियों को सीमित कर देता है, उनके लिए भारी खेल और भागना गंभीर रूप से मुश्किल हो जाता है यहां तक कि उनको इसकी अनुमति भी नहीं होती है। बदलते मौसम के साथ-साथ अस्थमा की गंभीरता में और भी परिवर्तन आते है, और यह बच्चों और उनके माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।माता पिता, अस्‍थमै‍टिक बच्चों को ऐसी गतिविधियों का प्रदर्शन करने के लिए दबाव नही डालते जिनसे उन्‍हें मुश्किल हो। यहां तक ​​कि अस्‍‍थमा बच्चे की दैनिक गतिविधियों को भी प्रतिबंधित कर देता है। वह ऐसे खेल खेलने में कठिनाई पाते है जिनमें शारीरिक श्रम शामिल हो।


बुजुर्गों पर अस्‍थमा का असर

बुढ़ापे में, अस्थमा गंभीर जटिलताओं का कारण बनता है। एक व्यक्ति, जो मध्यम आयु या बूढ़े वर्ग के होते है उन्‍हें अस्थमा के दौरे, के दौरान सिर्फ खांसने का अनुभव ही नही होता बल्कि वह गंभीर हो जाता है, उनकी सांस भी उखड़ने लगती और साथ ही साथ घरघराहट का भी अनुभव होता है। जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ती जाती है अस्थमा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है जिससे वायरल संक्रमण, चिंता और अवसाद आदि अतिसंवेदनशील हो जाते हैं। क्रोनिक अस्थमा के दौरे ब्रोंकाइटिस और अन्य क्रोनिक श्वसन समस्याओं को भी पैदा कर सकते हैं।

गर्भावस्था में

गर्भवती महिलाएं, जो अस्थमा से पीडि़त है, उनको बहुत सावधान रहने की जरूरत है। अस्थमा का दौरा पड़ने पर मातृ जटिलताओं की संभावना में भी काफी वृद्धि होती है। गर्भवती महिलाओं में अस्थमा के दौरे होने पर कुछ समस्‍याएं जैसे योनि रक्तस्त्राव, समय से पहले प्रसव आदि हो सकती है। अस्थमा के दौरे के दौरान, फेफड़ों में ब्रोन्कियल नलियों के कसने पर वायुमार्ग पर दबाव पड़ने से सांस लेने की दर में वृद्धि होती है। गर्भावस्था के दौरान अस्थमा का दौरे से खून में एसिड का उत्पादन होने लगता है जिससे मां के साथ-साथ भ्रूण को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति क्षीण हो जाती है।

अस्थमा के बारे में अपनी और या अपने बच्चे की जानकारी बढाएं इससे इस बीमारी पर अच्छी तरह से कंट्रोल करने की समझ बढेगी। एलर्जी की जांच कराएं इसकी मदद से आप अपने अस्थमा ट्रिगर्स मूल कारण की पहचान कर सकते है |

 


Image Source- Getty

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