अरुण जेटली ने करवाया किडनी ट्रांसप्लांट, जानिए क्यों पड़ती है इसकी जरूरत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 14, 2018
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किडनी ट्रांसप्लांट के लिए शनिवार को दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का ऑपरेशन सफल हुआ है। जेटली किडनी का गंभीर बीमारी के चलते पिछले एक महीने से डायलिसिस पर थे। अपनी किडनी की बीमारी के बारे में खुद जेटली ने 6 अप्रैल को ट्विटर पर जानकारी दी थी। वजन बढ़ना कई बीमारियों को जन्म देता है और इससे पहले भी जेटली सितंबर 14 को वजन ज्यादा बढ़ जाने के कारण बैरियाट्रिक सर्जरी से गुजर चुके हैं।

किडनी प्रत्यारोपण आज के समय एक आम समस्या बन गई है। हर मनुष्य के शरीर में 2 किडनी होती है। जिनका स्वस्थ रहना बहुत जरूरी होता है। किसी भी व्यक्ति की किडनी अचानक से खराब नहीं हो जाती है। बल्कि यह बहुत पहले ही अपने लक्षण देने ल गती है। जिसे व्यक्ति जाने अनजाने में नजरअंदाज कर देता है। जिसका खामियाजा बाद में बड़ी बीमारी के रूप में भुगतना पड़ता है। किडनी ट्रांस्प्लांट के बाद अब जेटली और उनके किडनी दाता दोनों को स्वस्थ बताया जा रहा है। किडनी का प्रत्यारोपण बहुत मंहगा होता है इसलिए हर कोई इस खर्च को नहीं उठा सकता है। ऐसे में आपको किडनी रोगों और इससे बचाव के बारे में जरूर जानना चाहिए, ताकि आपकी अपनी किडनियों को स्वस्थ रख सकें।

क्या है जेटली की समस्या

जेटली की सेहत की मौजूदा स्थिति बैरिएट्रिक सर्जरी के कारण हो सकती है। वर्ष 2014 में केंद्र में राजग के सत्ता में आने के बाद उन्होंने यह सर्जरी कराई थी। यह ऑपरेशन उन्होंने वजन पर नियंत्रण के लिए कराया था। पहले यह ऑपरेशन मैक्स अस्पताल में हुआ, लेकिन जटिलताओं के कारण उन्हें बाद में एम्स में भर्ती कराया गया था। सूत्रों ने कहा कि एम्स के डॉक्टर जेटली के आवास पर उनकी निगरानी कर रहे हैं। अभी यह फैसला नहीं लिया गया है कि उन्हें किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत है या नहीं।

इसे भी पढ़ें:- पुरुषों में क्रॉनिक किडनी की बीमारी के लक्षण

किडनी खराब होने के लक्षण 

  • हाथों और पैरों में सूजन उत्पन्न हो जाती है।
  • रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है। हड्डियों में दर्द होता है।
  • कमजोरी, जी मिचलाना और उल्टी महसूस होती है।
  • रोग के बढ़ जाने पर सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।
  • उनींदापन महसूस होता है।
  • किन्हीं गंभीर स्थितियों में पीड़ित व्यक्ति कोमा या बेहोशी में जा सकता है। रोगी की जान पर बन आ सकती है।
  • शरीर में रक्त की कमी होना।

कब पड़ती है किडनी के प्रत्यारोपण की जरूरत

हालांकि किडनी खराब होने के कई कारण हो सकते हैं जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। अगर इस रोग के इलाज की बात करें तो करीब 90 प्रतिशत लोग अंग्रेजी दवाओं और इलाज का रुख करते हैं। किडनी फेल होने के शुरुआती स्टेज में आपको डॉक्टर बल्ड प्रेशर का कंट्रोल, डायट में प्रोटीन्स का रेस्ट्रिक्शन, नमक कम करने आदि चीजों से परहेज करने बोलेंगे। इससे आपकी किडनी फेल्योर की बीमारी रुकेगी की तो नहीं लेकिन स्लो हो जाएगी। अगर आपकी किडनी फेल्योर हो ही गई है तो इसके दो उपाय हैं।

पहला किडनी ट्रांसप्लांट किया जाता है। दूसरा नियमित तौर पर डायलसिस किया जाता है। डायलसिस में हफ्ते में एक बार कराया जाता है जिसमें खून की सफाई की जाती है। ये रेग्युलर बेसिस पर ताउम्र कराई जाती है। एक अन्य तरह की डायलसिस होती है जिसको हम सीएपीडी कहते हैं। ये होम डायलसिस होती है। इसमें पेट में कैथेटर लगाकर पेट की सफाई की जाती है। किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा वर्तमान में अधिकतर शहरों में हो गई है। ये डायलसिस की तुलना में बेहतर इलाज है।+

क्या है डायलिसिस की प्रक्रिया

गुर्दे की किसी बीमारी का या ऐसी किसी बीमारी का जिससे गुर्दे प्रभावित हो सकते हैं अगर लंबे समय तक इलाज नहीं किया जाता है तो इससे शरीर में गंभीर समस्याएं शुरू हो जाती हैं और गुर्दा फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। मरीज के दोनों गुर्दे फेल हो जाएं तो वो नहीं जी सकता इसलिए गुर्दों के पूरी तरह से फेल होने से पहले ही डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। अगर मरीर को एक्यूट किडनी फेल्योर हुआ है तो डायलिसिस की प्रक्रिया थोड़े समय के लिए होती है। आमतौर पर गुर्दों के ठीक हो जाने के बाद या नया गुर्दा लग जाने के बाद इस प्रक्रिया को बंद कर दिया जाता है। मगर यदि मरीज को क्रॉनिक किडनी फेल्योर हुआ है और गुर्दे इस स्थिति में नहीं हैं कि उन्हें बदला जा सके तो डायलिसिस की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है।

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स्वस्थ किडनी के उपाय

  • किडनी की समस्‍या से ग्रस्‍त लोगों को अपने आहार में नमक व प्रोटीन की मात्रा कम रखनी चाहिए जिससे किडनी पर कम दबाव पड़ता है।
  • प्रतिदिन नियमित रूप से एक्‍सरसाइज और शारीरिक गतिविधियां को करने से रक्तचाप व रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखा जा सकता हैं, जिससे डायबिटीज और उससे होने वाली क्रोनिक किडनी की बीमारी के खतरे को कम ‍किया जा सकता है।
  • मैग्नीशियम की कमी से उच्‍च रक्तचाप और विषाक्त पदार्थों के बढ़ जाने से किडनी का काम प्रभावित होने लगता है। इसलिए पर्याप्‍त मात्रा में मैग्‍नीशियम को अपने आहार में शामिल करें। 
  • डायबिटीज को किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है। या आप यह कह सकते है कि डायबिटीज किडनी का सबसे बड़ा शत्रु है। इसलिए ब्‍लड में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहना आवश्यक होता है।
  • कम मात्रा में पानी पीने से किडनी को नुक़सान होता है। पानी की कमी के कारण किडनी और मूत्रनली में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। जिससे पोषक तत्वों के कण मूत्रनली में पहुंचकर मूत्र की निकासी को बाधित करने लगते हैं। 

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