अर्थराइटिस के मरीज अब दर्द से पाएगें राहत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 04, 2013
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Arthritis ke marij ab dard se paayege rahat

अर्थराइटिस में दर्द से तड़प रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। वैज्ञानिकों ने ऐसा सिंथेटिक पॉलीमर बनाने में सफलता हासिल की है, जो जोड़ों के लिए लुब्रिकेंट का काम करेगा। इससे अर्थराइटिस के मरीजों को काफी लाभ मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है।


बोस्‍टन यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल इंजीनियर के नेतृत्‍व में एक टीम ने एक ऐसा ज्‍वाइंट लुब्रिकेंट बानाने में कामयाबी हासिल की है, जो दुनिया भर में अर्थराइटिस के लाखों मरीजों के लिए राहत का काम कर सकता है।


इस नए सिंथेटिक पॉलीमर में सिनोविल फ्लूइड (तरल पदार्थ) होता है, जो जोड़ों में प्राकृतिक तौर पर लुब्रिकेंट का काम करता है। यह तरीका अभी तक मौजूद परंपरागत तरीकों के मुकाबले अधिक कारगर साबित होने की उम्‍मीद है।

 

प्रोफेसर डब्‍ल्‍यू. ग्रिनस्‍टाफ (बीमई, एमएसई, रसायन शास्‍त्र) ने कहा, इस समय जो बाजार में सर्वश्रेष्‍ठ लुब्रिकेंट मौजद हैं, वे अर्थराइटिस के लक्षणों से अस्‍थायी राहत तो दिलाते हैं, लेकिन वे अपर्याप्‍त मात्रा में लुब्रिकेशन पैदा कराते हैं। इससे जोड़ों की उपास्थि को नुकसान पहुंचता रहता है।

 

साइंस डेली की रिपोर्ट के अनुसार दोनों लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिए ग्रिनस्‍टाफ, बेथ इस्राइल डीकॉनेस मेडिकल सेंटर/हॉवर्ड मे‍डिकल स्‍कूल ऑर्थोपेडिक के सर्जन ब्रायन स्‍नाइडर और बॉस्‍टन यून‍िवर्सिटी की रसायन एवं इंजीनियरिंग की टीम और कुछ अन्‍य लोगों ने मिलकर यह अति उपयोगी सिंथेटिक स्‍नोविल फ्लूड बनाता है।

 

अमेरिकन केमिकल सोसायटी के जर्नल में भी उन्‍होंने इस खास तत्‍व की कार्यक्षमता के बारे में बताया है।


ग्रिनस्‍टाफ ने बताया कि जब हमनें इस नए पॉलीमर का इस्‍तेमाल किया तो जोड़ों की उपास्थियों के बीच घर्षण कम था। इससे जोड़ों की उपास्थियों को कम नुकसान होगा। एक प्रकार से यह जोड़ों के लिए ऑयल की तरह है।

 

 

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