क्‍या खराब हो रहे हैं आपके कान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 28, 2014
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Quick Bites

  • तेज संगीत सुनने के कारण सुनने की क्षमता कम हो रही है।
  • कानों में दर्द, सूजन, तरल पदार्थ निकलना प्रमुख समस्‍यायें हैं।
  • खराब जीवनशैली के कारण युवाओं में बढ़ रही कानों की समस्‍या।
  • ईयरफोन का कम प्रयोग करें, शोर-शराबे से दूरी बनाये रिखये।

जीवनशैली ने हमारे शरीर के अन्‍य अंगों की तरह कानों को भी प्रभावित किया है। अधिक तेज स्‍वर में संगीत सुनने और ईयरफोन पर घंटों गाना सुनने के कारण कान की बाहरी परत क्षतिग्रस्‍त हो जाती है और इसके कारण सुनने की क्षमता कम हो जाती है। कानों की समस्‍यायें युवाओं में अधिक देखी जा रही हैं।  कानों में दर्द होना, धीमी आवाजें न सुनाई देना, किसी तरह का दबाव महसूस होना, सूजन आना या कान से तरल पदार्थ का बहना कानों की प्रमुख समस्‍यायें हैं। इसलिए अगर आपके कान खराब हो रहे हैं तो उन्‍हें नजरअंदाज न करें।
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शोध के अनुसार

अमेरिका के जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोध की मानें तो केवल अमेरिका में ही लगभग 48 मिलियन लोग कानों की समस्‍याओं से परेशान हैं। शोध के अनुसार 20 से 40 आयु वर्ग के 80 प्रतिशत लोगों में मोबाइल फोन के अधिक प्रयोग के कारण कानों की समस्‍यायें बढ़ रही हैं। गाडि़यों के बढ़ते उपयोग से ध्वनि प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ गया है जो कानों को नुकसान पहुंचा रहा है। भारतीय स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के आंकड़ों की मानें तो भारत के 20-22 प्रतिशत लोग कान की किसी न किसी बीमारी से ग्रस्‍त हैं। ये समस्याएं एक या दोनों कानों को प्रभावित कर रही हैं।

कानों की संरचना को समझें

कान के तीन हिस्से हैं - बाहरी, मध्‍य और आंतरिक। बाहरी आवरण यानी आउटर ईयर वातावरण से ध्वनि तरंगों के रूप में आवाज ग्रहण करता है, ये तरंगें ईयर कैनाल से होती हुई ईयरड्रम तक पहुंचती हैं और इनकी वजह से ईयरड्रम में कंपन होता है। इस कंपन से मध्‍य आवरण यानी मिडल ईयर में मौजूद तीन छोटी हड्डियों में गति आ जाती है, इसके कारण ही कान के अंदरूनी हिस्से में मौजूद द्रव हिलना शुरू करते हैं। आंतरिक आवरण में कुछ कोशिकाएं होती हैं जो सुनने में मदद करती हैं यानी ये कोशिकायें इस द्रव की गति से थोड़ी मुड़ जाती हैं और इलेक्ट्रिक पल्स के रूप में सिग्नल दिमाग को भेजती हैं। ये सिग्नल ही हमें शब्दों और ध्वनियों के रूप में सुनाई देते हैं।

ईयरफोन का प्रयोग कम करें

तेज आवाज में ईयरफोन लगाकर गाने सुनने का चलन युवाओं में अधिक देखने को मिलता है। इनके लगातार इस्तेमाल से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक तेज ध्वनि सुनने से कान के पर्दे की मोटाई प्रभावित होती है और धीमी आवाजें सुनाई नहीं देती। अगर कोई व्यक्ति रोज एक घंटे से अधिक 80 डेसीबल्स से तेज वॉल्यूम में संगीत सुनता है तो उसे अगले पांच वर्षों में सुनने में कठिनाई हो सकती है या स्थाई तौर पर बहरा हो सकता है।

स्‍वीमिंग में सावधानी

स्‍वीमिंग पूल में बालों को ही नहीं कानों कानों को भी नुकसान होता है। पूल में पानी को साफ रखने के‍ लिए क्‍लोरीन का प्रयोग किया जाता है जो कानों में चला जाता है। इससे कानों में दर्द होना या तरल पदार्थ बहने की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए ईयर प्लग का इस्तेमाल करना जरूरी है।
Ear Problems in Hindi

शोर-शराबे से दूरी

मशीनों, फैक्ट्रियों और खासतौर पर ऑटोमोबाइल से निकलने वाले शोर के कारण वातावरण में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इस शोर के कारण सुनने की क्षमता कम हो रही है। इन फैक्‍ट्रीयों से निकलने वाला रेडियेशन त्‍वचा के साथ कानों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। टीवी और रेडियो तेज आवाज में न सुनें। तेज आवाज से बाहर आने के बाद 10 मिनट तक ऐसी जगह रहें जहां बिलकुल भी शोर न हो।

कानों को ईयरवैक्‍स से बचाने के नियमित रूप से सफाई करें, उसमें कोई नुकीली जीज न डालें, नहाने के बाद कानों को अच्‍छे से सुखायें, कानों में तेल न डालें और कानों में किसी प्रकार की समस्‍या होने पर चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए।

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