बढ़ती उम्र में हो सकती है ये त्वचा समस्याएं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 01, 2015
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Quick Bites

  • त्वचा में होने वाली समस्याएं को सोलर लेन्टीजाइनस भी कहा जाता है।
  • सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें मैलेनिन का निर्माण तेज करती हैं।
  • मैलेनिन एक पिगमेंट है जो त्वचा को इसका कुदरती रंग देता है।
  • सूरज की किरणों के सीधे संपर्क में आने से बचें, सनस्क्रीन लगायें।

बढ़ती उम्र के साथ त्वचा संबंधी समस्याएं होना सामान्य बात है इसमें झुर्रियां व त्वचा में ढीलापन प्रमुख है। इसके अलावा कई और समस्याएं होती हैं जो यह एहसास करती है कि आपकी उम्र बढ़ रही है। बढ़ती उम्र त्वचा पर भी अपना असर दिखाने लगती है,जिससे त्वचा बेजान, रूखी लगने लगती है। झुर्रियां लुक को खराब करती हैं।आम तौर पर बढ़ती उम्र में त्वचा पर पड़ते प्रभावों को लेकर चिंता अधिक होती है।लेकिन अगर थोड़ी सी सावधानियां बरती जाएं तो बढ़ती उम्र में भी त्वचा को जवां रखा जा सकता है। जानें क्या हैं वे स्मस्याएं।

एज स्पॉट्स या लिवर स्पॉट्स

 

इन्हें सोलर लेन्टीजाइनस भी कहा जाता है, ये त्वचा पर चपटे स्पॉट्स हो सकते हैं जो रंग में ग्रे, काले या भूरे हो सकते हैं। ये एजिंग के सबसे कॉमन संकेत हैं लेकिन ये 40 की उम्र से पहले लोगों में अपना असर नहीं करते। ये रंग और आकार में अलग-अलग हो सकते हैं और त्वचा के उन हिस्सों पर ज़्यादातर प्रकट होते हैं जो आमतौर से सन एक्सपोजर का शिकार होते हैं जैसे चेहरा, हाथ, कंधे और बाहें। ये स्पॉट्स नुकसान नहीं करते लेकिन ये कैंसर विकास जैसे लगते हैं और त्वचा कैंसर के लिये इनकी जांच ज़रूरी है।

कारण

सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें मैलेनिन का निर्माण तेज करती हैं। मैलेनिन एक पिगमेंट है जो त्वचा को इसका कुदरती रंग देता है। ज़्यादा मैलेनिन बनने से टैनिंग हो जाती है जिसे सूरज के हानिकारक रेडिएशन से बचाव के लिये बनाया जाता है। एज स्पॉट्स तब प्रकट होते हैं जब ज़्यादा मैलेनिन एक जगह "इकट्ठा" हो जाता है या सामान्य से अधिक मात्रा में बनता है। एजिंग के साथ भी मैलेनिन अधिक बनने लगता है जिससे एज स्पॉट्स उभरते हैं।आपमें एज स्पॉट्स होने या न होने में जेनेटिक्स की भी भूमिका होती है। गोरी या हल्के रंग की त्वचा होने पर एज स्पॉट्स होने की संभावना अधिक होती है हालांकि ये किसी भी त्वचा कलर पर उत्पन्न हो सकते हैं। पहले लगातार सन एक्सपोजर रहा हो।

उपचार

धूप में बाहर ज़्यादा निकलना सीमित करें। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर जाने से बचें क्योंकि इस समय सूरज की किरणें अत्यधिक हानिकारक होती हैं।धूप में बाहर जाने से आधा घंटा पहले कम से कम 30 एसपीएफ वाली सनस्क्रीन का उपयोग करें। एज स्पॉट्स नुकसान नहीं पहुंचाते लेकिन त्वचा कैंसर न होने की इनमें पहचान की जानी चाहिये। यदि आप एज स्पॉट्स को लेकर तनावग्रस्त हैं तो नीचे आपके लिये उपाय दिये गये हैं।ब्लीचिंग क्रीमें जैसे कि हाईड्रोक्विनोन को अकेले या रेटिनॉयड व किसी माइल्ड स्टेरॉयड के साथ उपयोग किया जा सकता है जिससे कुछ महीनों के वक्त में एज स्पॉट्स हल्के पड़ सकते हैं। लेज़र ट्रीटमेंट मेलानोसाईट नामक ज़्यादा पिगमेंट निर्मित करने वाली सेल्स को नष्ट करता है। फुल ट्रीटमेंट के लिये कई सिटिंग की ज़रूरत होती है व स्पॉट्स धीरे-धीरे महीनों में धूमिल पड़ जाते हैं।



बचाव करने वाले कपड़े और गीयर- लम्बी बाहों वाली शर्ट, लम्बी पैंट तथा हैट पहन कर बाहर निकलें ताकि आपका शरीर विकिरण (रेडिएशन) से बचा रह सके।

 

Image Source-Getty

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