एनोरेक्सिया व डायबिटीज में संबंध

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 25, 2013
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स्लिम और फिट दिखने के लिए संतुलित भोजन करना अलग बात है, लेकिन इसके लिए खाने से ही दूरी बना लेना, एक गंभीर बीमारी भी हो सकती है। मेडिकल भाषा में इसे एनोरेक्सिया कहा जाता है। इसमें व्‍यक्ति के सिर पर खुद को स्लिम दिखाने की इतनी धुन सवार होती है कि वह खाने-पीने दूरी बना लेता है। लेकिन, इसके कई दुष्‍परिणाम हो सकते हैं। जानिए क्‍या एनोरेक्सिया के कारण मधुमेह जैसी बीमारी भी हो सकती है-


किशोर उम्र के लड़के-लड़कियां मोटे होने के भय से तथा अपने आपको स्लिम दिखाने के चक्कर में जानबूझ खानपान कर कम कर देते हैं। ऐसा वे इसलिए करते हैं, ताकि उनका वजन न बढ़े। लेकिन, जब यह आदत लत बन जाए तो बीमारी का रूप ले सकती है। एनोरेक्सिया इसी को कहते हैं। शरीर की जरूरत के मुताबिक सही समय पर संतुलित भोजन ना लेना काफी खतरनाक हो सकता है। एनोरेक्सिया की मुख्य वजह गलत जीवन-शैली, खान-पान की बुरी आदतें हैं। कुछ शारीरिक व मानसिक समस्याएं एनोरेक्सिया का कारण बन सकती हैं- जैसे कुछ विशेष दवाओं का सेवन, खाना समय पर न लेना या कई बार खाना छोड़ देना, अत्यधिक वसा वाले भोजन का सेवन तथा ज्यादा मसाले वाले भोजन का सेवन आदि हैं। इसके अलावा शारीरिक श्रम न करना, खाने के तुरंत बाद सोना आदि भी इस डिसऑर्डर का कारण हो सकते हैं। मानसिक कारणों में डिप्रेशन, तनाव में रहना, एंजाइटी आदि प्रमुख हैं।

 

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एनोरेक्सिया व मधुमेह में संबंध

खान-पान सम्‍बन्‍धी अनियमिताओं व ज्यादा से ज्यादा शारीरिक मेहनत से वजन घटने के साथ ही यह काफी खतरनाक हो सकता है। ये कारक व्यकित के शरीर में हाइपोग्लाइसिमिया को जन्म देते हैं जो मधुमेह का कारण बनता है। इस तरह एनोरेक्सिया अप्रत्यक्ष रूप से मधुमेह का कारण हो सकता है। अगर किसी रोगी में यह दोनों बीमारियां पाई जातीं हैं, तो उनमें डायबिटीज रेटीनोपैथी का खतरा बढ़ जाता है। इसके असर से व्‍यक्ति अपनी आंखें भी खो सकता है।

एनोरेक्सिया मुख्य रुप से एक प्रकार का ईटिंग डिस्‍ऑर्डर है, जिसमें लोग अनियमित खानपान व दोषपूर्ण जीवनशैली जीते हैं। मधुमेह रोगियों में भी संतुलित व पोषक आहार ना लेना इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जाती है। एनोरेक्सिया में लोग खुद को पतला दिखाने के लिए भोजन की मात्रा कम कर देते हैं और बाद में भूख लगने पर वे कई अस्वास्थ्कारी चीजों का सेवन कर लेते हैं, इससे मधुमेह का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे पदार्थों का सेवन जो रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है, वह टाइप वन डायबिटीज का कारण हो सकता है। इसके अलावा संतुलित भोजन ना करने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे व्‍यक्ति आसानी से बीमारियों का शिकार हो जाता है। एनरेक्सिया में व्यक्ति के शरीर के कुछ अंग काम करना बंद कर सकते हैं जैसे पैनक्रियाज (जो इंसुलिन का निर्माण करता है) जिससे वह आसानी से मधुमेह की चपेट में आ जाता है।

[इसे भी पढ़ें: डायबिटीज से बचाव के प्रकृतिक उपचार]

क्या है समाधान

जीवनशैली में सुधार व संतुलित आहार के जरिए एनोरेक्सिया से कुछ हद तक निजात पाया जा सकता है। नियमित व्यायाम व खान-पान में सुधार करने से और अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। भोजन के दौरान पानी या अन्य तरल पदार्थ का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। वजन कम करने के लिए भोजन छोड़ना सबसे खराब विकल्‍प है। एक ही बार में ज्‍यादा भोजन करने से बचें। थोड़ा-थोड़ा खाना, कई बार खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। अगर मानसिक तनाव के कारण भूख न लगे तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

 

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