आंध्र प्रदेश रिजल्ट : परीक्षा में कम अंक के कारण बच्चे न लें तनाव, स्वास्थ्य होगा प्रभावित

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 06, 2018
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Quick Bites

  • रिजल्‍ट के समय पैरेंट्स बेहद तनावपूर्ण स्थिति से गुजरते हैं।
  • कई बार बच्चे पेरेंट्स के दबाव के चलते भी तनाव में आ जाते हैं।
  • जब रिजल्ट आता है तो बच्चे उम्मीद करता है कि उसके नम्बर अच्छे आएंगे।

आंध्र प्रदेश के 12वीं के परीक्षा का परिणाम शुक्रवार यानि कि आज घोषित हो गया है। बताया जा रहा है इस बार परीक्षा में 11वीं और 12वीं कक्षा के करीब 9 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। जब रिजल्ट आता है तो हर कोई उम्मीद करता है कि उसके नम्बर अच्छे आएंगे। लेकिन जिन बच्चों के नंबर अच्छे आते हैं वो तो बहुत खुश होते हैं लेकिन जिन बच्चों के नंबर कम आते हैं वो काफी चिंतिति हो जाते हैं। जिसके चलते बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं और कुछ बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं। बच्चों को ये बात जाननी बहुत जरूरी है कि परीक्षा में चाहे नंबर कम आएं या ज्यादा इसका असर उनके स्वास्थ्य पर नहीं पड़ना चाहिए। आज हम आपको तनाव लेने के चलते स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्परिणामों के बारे में बता रहे हैं। 

रिजल्ट के बाद बच्चों में तनाव

कई बार बच्चे पेरेंट्स के दबाव के चलते भी तनाव में आ जाते हैं। जब की इच्‍छा है कि उनका बच्‍चा परीक्षा में अव्‍वल आये और ज्‍यादा से ज्‍यादा स्‍कोर करें। हालांकि बच्चों को यह पता होता है कि माता-पिता की यह इच्‍छा उसके सुनहरे भविष्‍य के सपने से जुड़ी हैं और इस सपने का होना स्‍वाभाविक भी हैं। लेकिन इससे उसको अनावश्‍यक दबाव महसूस हो रहा है और अब जब उसका रिजल्‍ट आने वाला है तो उसका विवेक और सब्र खोने लगा है। यह समस्‍या न जाने रोहन जैसे कितने ही दसवीं और बाहरवीं के रिजल्‍ट को इंतजार करने वाले बच्‍चों की होगी। इसलिए यह समय बच्चों का साथ देने का होता है, न कि उन पर और ज्यादा दबाव बनाने का। तो चलिये जानें कि कैसे बोर्ड रिजल्ट के तनाव से अपने बच्चे को बचाया जा सकता है।

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इन टिप्स से तनाव को कहें बॉय

बच्‍चों के मन में रिजल्‍ट को लेकर बहुत तनाव रहता हैं। पेपर कितना भी अच्छा हुआ हो, लेकिन रिजल्ट का बेस्रबी और तनाव के साथ इंतजार करते हैं। कई बार बच्चे अच्छा रिजल्ट न आने की पीड़ा के साथ ही परिवार के सदस्यों की नाराजगी का सामना नहीं कर पाते। ये स्थिति उन्हें गहरी निराशा, डिप्रेशन, घर छोड़ कर कहीं चले जाने के फैसले ही नहीं बल्कि कई बार तो आत्महत्या के कगार तक ले जाती है। ऐसे में जरूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्‍चे के साथ खड़े हो, बच्‍चे को मोटिवेट करें और इमोशनल सहारा दें।

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  • जब रिजल्‍ट आने वाले हो तो पैरेंट्स को चाहिये कि वे बच्चे के कंधे पर हाथ रखें, उसके साथ खड़े हों और कहें कि कोई भी रिजल्‍ट जिंदगी से बड़ा नहीं होता, उठो और आगे के बारे में सोचो। ऐसे रास्तों के बारे में सोचो, जो तुम्हें तुम्‍हारे बेहतर कल की ओर ले जायें। हार के बाद भी जीत संभव है, बशर्ते अगर तुम दिमाग की परीक्षा से गुजरना न बंद करो।
  • पैरेंट्स और समाज द्वारा अनुचित रूप से बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाना आज के युवाओं में तनाव और उच्च रक्तचाप का कारण बनता हैं। इसलिए इन सब बातों से दूर अपने बच्चे की क्षमताओं व रुचियों को पहचानना बेहद जरूरी होता है।
  • रिजल्‍ट के समय पैरेंट्स बेहद तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे बच्‍चों पर दबाव बनाने की बजाय बच्‍चों को प्रोत्साहित करने, उनका समर्थन व सराहना करने तथा समझदार बनने की आवश्यकता होती है। बच्चों की परवाह करना जरूरी होता है, लेकिन जरूरी नहीं कि रिजल्ट के समय घर जंग के मैदान जैसा बना दिया जाए।
  • अपने बच्‍चे में बोर्ड रिजल्‍ट के तनाव को कम करने के लिए रमा ने बहुत ही समझदारी दिखाई उसने अपने बच्‍चे से कहा कि वह उससे बहुत प्‍यार करती हैं। क्या नंबर आएंगे, इससे उसको कोई फर्क नहीं पड़ता। इसके अलावा अपने बच्‍चे को महान हस्तियों के उदाहरण देकर समझाने की कोशिश करें कि वो भी ऐसे बन सकते हैं।
  • बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट वाले दिन पैरेंट्स को अपने बच्चों का खास ख्याल रखने की जरुरत है। उम्मीद के मुताबिक रिजल्ट न आने पर बच्चे अक्सर डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, और गलत कदम उठा लेते हैं, ऐसे में पैरेंट्स के लिए जरुरी है कि बच्चों को विश्वास में लें कि रिजल्ट चाहे जो भी आये वह हमेशा उनके साथ हैं। बच्चों को यह समझाना भी बेहद जरूरी है कि खराब नतीजे को भविष्य में सुधारा जा सकता है।

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