पायल पहनने के हैं सेहत से जुड़े ढेरों फायदे, जानिए

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 19, 2017
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Quick Bites

  • सोलह श्रृंगार में शामिल पायल, पैरों की सुंदरता बढ़ाती है।
  • सुंदरता के साथ पैरों की हड्डियां भी मजबूत बनाती है।
  • इसके अलावा शरीर का तापमान संतुलित रखती है।

भारतीय परंपरा में महिलाओं का पायल पहनना अनिवार्य माना जाता है। इसके पीछे बुजुर्ग कुछ आदर-सम्मान और शुभ-अशुभ के कारण गिनाते हैं। लेकिन पायल शुभ-अशुभ परिणाम देने के अलावा भी कुछ स्वास्थ्य संबंधी लाभदायक परिणाम भी देती है, जो महिलाओं को स्वस्थ रखने का काम करती हैं। इन परिणामों के बारे में इस लेख में विस्तार से चर्चा करते हैं।

 

पैरों की सुंदरता बढ़ाए

इसमें कोई संदेह नहीं कि पायल पैरों की सुंदरता में चार चांद लगा देती है। आज भी महिलाओं के पायल की छनछन पुरुषों को अपनी ओर आकर्षित करने का अचूक उपाय है। इस कारण ही पायल को महिलाओं के सोलह श्रृंगार में शामिल किया गया है।

 

पुरुषों को करती थी सतर्क

पुराने जमाने में घर की हर महिला को पायल पहनाई जाती थी। ऐसा इसलिए कि उनके पायल की आवाज से पहले ही घर के पुरुषों को पता चल जाता था कि घर की कोई महिला आ रही है और वो व्यवस्थित हो जाते थे। जिससे पायल की आवाज महिला और पुरुष दोनों को किसी भी असहज होने वाली स्थिति से बचा लेती थी। इस कारण पुराने जमाने में घर में महिलाओं का पायल पहनना अनिवार्य माना जाता था।

स्वास्थ्य लाभ

परंपराओं को निभाने के अलावा पायल महिलाओं को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी देती है। लेकिन ये स्वास्थ्य लाभ सोने या चांदी से बनी पायल से ही प्राप्त होती हैं। दरअसल पायल हमेशा पैरों से रगड़ती है। जिसके कारण पायल के धातु के तत्व त्वचा से रगड़ खाकर शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और हड्डियों को सोने-चांदी जैसी मजबूती देते हैं। इसी वजह से माना जाता है कि पायल पहनने से हड्डियां मजबूत बनती हैं।

आयुर्वेद में भी कई दवाओं में इन धातुओं के भस्म का उपयोग किया जाता है। धातुओं की भस्म से जिस तरह के स्वास्थ्यवर्द्धक फायदे होते हैं वैसे ही स्वास्थ्य फायदे पैरों में पायल पहनने से होते हैं।

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शरीर का तापमान बैलेंस रखें

लेकिन पैरों में सोने की पायल पहनने की मनाही है। इसके पीछे लोग सोने के पूज्यनीय होने का कारण देते हैं। जबकि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। सोने की तासीर गर्म होती है जबकि चांदी की तासीर ठंडी होती है। आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य का सिर ठंडा और पैर गर्म होने चाहिए। इसी कारण सिर पर सोना और पैरों में चांदी पहनी जाती है। इससे सिर से उत्पन्न गर्म ऊर्जा पैरों में और पैरों से पैदा हुई ठंडी ऊर्जा सिर में चली जाती है जिससे पूरे शरीर का तापमान संतुलित रहता है।
लेकिन अगर महिलाएं पैरों में भी सोने की पायल पहनने लगे तो पैर और शरीर दोनों में एक ही तरह की ऊर्जा प्रवाहित होने लगेगी जिससे महिलाएं रोगग्रस्त हो सकती हैं।

 


कम करता है नकरात्मक शक्तियों का प्रभाव

वास्तुशास्त्र के अनुसार पायल की आवाज से घर की नकरात्मक शक्तियां कम हो जाती हैं और दैवीय शक्तियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं।


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