सूजन के बारे में पूरी जानकारी होना है बेहद जरूरी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 11, 2014
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Quick Bites

  • शरीर में खून की कमी के कारण भी हो सकती है सूजन।
  • किसी भी प्रकार की सूजन को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • पेट में सूजन लिवर की बीमारी का संकेत हो सकता है।
  • फाइलेरिया नामक बीमारी में एक पैर में सूजन हो सकती है।

सूजन का अर्थ है शरीर के किसी भाग का अस्थायी रूप से बढ़ जाना। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे चोट लगना, ट्यूमर या कोई अन्य बीमार। लेकिन किसी भी प्रकार की सूजन को अनदेखा कतई नहीं करना चाहिए। देखा जाता है कि अक्सर लोग सूजन होने पर आधी-अधूरी जानकारी के साथ उसका इलाज करने लगते हैं, जो हानिकारक है। सूजम के विषय में सही जानकारी होना पबेहद जरूरी होता है। तो चलिये जानें सूजन क्या है, क्यों होती है, कितने प्रकार की होती है और इसका इलाज क्या है।

 

 

Inflammation in Hindi

 

 

सामान्य तौर पर शरीर में खून की कमी, पेट सम्बंधी विकार, लीवर की खराबी या फिर शारीरिक कार्य कम करने के कारण शरीर में सूजन होती है। लेकिन इसके बढ़ जाने पर कई अन्य रोग भी पनप सकते हैं इसलिए इस बारे में विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। शरीर में सूजन होने पर सही अपचार व आहार लिया जाए तो इस समस्या से निपटा जा सकता है।

 

सूजन के प्रकार

सूजन प्रायः दो प्रकार की होती है। एक शरीर के किसी खास हिस्से में तो दूसरी पूरे शरीर में एक साथ होती है। पैर में सूजन की शुरुआत हृदय से संबंधी बीमारियों को दर्शाती है। इस प्रकार की सूजन दोनों पैरों से शुसू होकर पूरे शरीर में फैल जाती है। यदि सूजन की शुरुआत सुबह के समय चेहरे पर हो और फिर दिन ढ़लने के साथ समाप्त हो जाए तो इसे गुर्दे की बीमारी का संकेत माना जाता है। यदि इस प्रकार की सूजन पेट में हो तो समझिए आपका लीवर घतरे में है। इसमें लीवर सिकुड़ने के कारण सूजन की शुरुआत पेट से होती है। वहीं आयोडीन, विटामिन बी-वन व प्रोटीन की कमी के कारण भी सूजन हो सकती है। फाइलेरिया नामक बीमारी में भी किसी एक पैर में सूजन हो सकती है, लेकिन यह पैरों तक ही सिमित रहती है।

 

Inflammation in Hindi

 

 

क्यों होती है सूजन

हम चारों ओर बेक्टीरिया, फंगस (कवक), वायरस, विषाणु, परजीवी (पेरेसाइट्स) की मौजूदगी वाले वातावरण में रहते हैं। और ये हमारे शरीर में मौजूद नौ रास्तों में से किसी से भी प्रवेश कर सकते हैं। इनके अलावा रोजमर्रा के दौरान किये जाने वाले कामों से भी कभी-कभी शरीर की सुरक्षा परत यानी त्वचा कटने, छिलने, रगड़ खाने, चोट लगने आदि के कारण कट या छिल जाती है। और त्वचा संवेदनशील हो जाती है। जिस कारण इस प्रभावित भाग में रक्त का संचरण बढ़ जाता है और वहां लालिमा व गरमी बढ़ जाती है। और इस क्षेत्र की बारीक रक्त नलियों (केपेलरीज) में प्रोटीनयुक्त पदार्थ का स्राव बढ़ने से सूजन आ जाती है।

 

बढ़ भी सकती है सूजन

सामान्यतः प्रोटीनयुक्त पदार्थ का स्राव बढ़ने और सूजन आने से उस जगह हमारे रक्षा सैनिक श्वेत रक्त कण (ल्यूकोसाइट्स) बाहरी संक्रमण से लड़ने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं। ये बाहरी संक्रमण के कारक को नष्ट करने की कोशिश करते हैं। इनके सफल होने पर सूजन धीरे-धीरे अपने आप कम होकर सामान्य हो जाती है। लेकिन यदि संक्रमण अधिक शक्तिशाली हो तो सूजन बढ़कर धीरे-धीरे श्वेत रक्त कणों के मृत कोशाओं में बदल देती है और पस पड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में संक्रमण के कारक के हिसाब से एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। साथ ही भौतिक उपाय यानी मल्हम, तेल, गरम या ठंडा सेंक आदि उपचारों भी किये जाते हैं।

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