एड्स की रफ्तार थमी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 01, 2011
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Aidsएड्स (एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम) का मुख्य कारण एचआईवी (हृयूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वाइरस) है। दरअसल एचआईवी संक्रमण की अंतिम अवस्था ही एड्स है। ताजा आंकड़ो की मानें तो एचआईवी संक्रमित मरीजों में यानी एड्स के मामलों में खासी कमी आई है। एचआईवी कैसे शरीर में फैलता है, एड्स के क्‍या कारण  है, भारत में एड्स जैसी महामारी की क्या स्थिति है इत्यादि बातों को विश्व एड्स दिवस पर जानना जरूरी हैं। आइए जानें एड्स की रफ्तार भारत में थमी है या बढ़ी है।

 

  • सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर एड्स क्या है यह हमारे शरीर पर कैसे हमला करता है। यह तो सभी जानते हैं कि बाहरी और संक्रमित बीमारियों से लड़ने के लिए हमारा इम्यून सिस्टम होता है जिसे प्रतिरक्षा तंत्र भी कहा जाता है। इम्यून सिस्टम में बहुत सी कोशिकाएं पाई जाती हैं इनमें से एक प्रमुख कोशिका है सीडी 4। ऐसा माना जाता है कि एक हेल्दी व्यक्ति 500 से लेकर 1800 तक सीडी 4 (सीयूएमएल) सेल्स होते हैं। जो कि बीमारियों से हमारी रक्षा करता है।
  • एचआईवी जब सीडी 4 सेल्स पर आक्रमण करता है तो धीरे-धीरे ये सेल्स कम होने लगती है और जब सेल्स4 नष्ट  होती है तो इम्यून सिस्टम भी कमजोर होने लगता है। जिससे शरीर में बहुत सी बीमारियों और संक्रमण की चपेट में आ जाता है, इसी स्थिति को एड्स कहा जाता है। एचआईवी इतना प्रभावशाली वायरस होता है कि इससे व्यक्ति की कई बार असमय मौत भी हो जाती है।
  • दुनियाभर में एचआईवी संक्रमित मरीज 3.3 करोड़ के आसपास माने जा रहे हैं।
  • भारत में लगभग एड्स पीडि़तों की संख्या 23.90 तक आ गई है। इस आंकड़े में लगभग 9.3 लाख महिलाएं एड्स पीडि़त है और किशोर/ बच्चे 3.5 फीसदी।
  • देश में इस समय लगभग 9,26,197 महिलाएं और 1,469,245 पुरूष एचआईवी पॉजिटिव से संक्रमित है।
  • दिल्ली की बात की जाए तो, देश की राजधानी में लगभग 34,216 एड्स मरीज ऐसे हैं यानी दिल्ली की कुल आबादी में से 0.21 फीसदी लोग एड्स पीडि़त है।
  • जहां सन् 2000 में जहां 0.41 तक का आंकड़ा था वहीं 2009 तक यह आंकड़ा 0.31 तक आ पहुंचा है जो कि एक बहुत बड़ी बात है। एड्स मरीजों की संख्या 2.7 से घटकर 1.2 तक पहुंच गई है। इन आंकड़ों में आई लगभग 56 फीसदी गिरावट से कहा जा सकता है कि वाकई एचआईवी संक्रमित पीडि़तों की संख्यान में कमी आ रही है।
  • भारत में नए एड्स मरीजों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। देश में नए एड्स मरीजों की गिरावट में भारी इजाफा हुआ है, यानी पिछले दशक के मुकाबले 56 फीसदी की कमी आई है।
  • आमतौर पर एड्स पीडि़तों की शुरूआत में पहचान करना मुश्किल होता है क्योंकि एचआईवी वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद भी पांच – छह महीनों से निष्क्रिय रहता है जिससे एड्स की शुरूआती अवस्था में पहचान करना मुश्किल होता है। एड्स की इस अवस्था को विंडो स्टेज के नाम से जाना जाता है।
  • इन आंकड़ों को देखकर कर एड्स के संदर्भ में कहा जा सकता है कि दुनियाभर में एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आ रही है, इसके अलावा एचआईवी संक्रमण के नए मामलों में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

Read More Articles On Sexual Health In Hindi.
Write a Review
Is it Helpful Article?YES10 Votes 43434 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर