रोते हुए बच्‍चे को एक्‍यूपंक्‍चर की मदद से करें शांत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 18, 2017
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बच्‍चा जब मां की गोद में होता है तो उसे देखकर मां का दिल खुश हो जाता है लेकिन जब बच्‍चा रोता है तो वो परेशान हो जाती है कि रोते बच्‍चे को कैसे चुप कराया जाएं। रोते हुए बच्‍चे को शांत करना बहुत ही मुश्किल काम है। कई बार बहुत कोशिशों के बावजूद भी मां बच्‍चे को चुप नहीं करवा पाती। अगर आपकी भी यही परेशानी है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि एक नए शोध के अनुसार एक्‍यूपंक्‍चर की मदद से आप अपने बच्‍चों को आसानी से शांत कर सकते हैं।

crying baby in hindi
शोध के अनुसार, बच्‍चों का अधिक रोना पांच में से एक परिवार की समस्‍या है, और इससे बच्‍चे का दर्द और माता-पिता का तनाव बढ़ता है। लेकिन शोध के निष्‍कर्षों में स्वीडन में लुंड यूनिवर्सिटी के काज्सा लंडग्रेन ने कहा "जिन शिशुओं का रोजाना तीन घंटे से अधिक देर रोना जारी रहा उनके लिए एक्यूपंक्चर एक प्रभावी उपचार के विकल्प हो सकता है।

आपके बच्चे के पैरों पर कुछ ऐसे पॉइंट्स होते हैं जिन्हें दबाकर आप अपने बच्चे का शांत कर सकते हैं। इसमें शरीर के कुछ पॉइंट्स पर प्रेशर दिया जाता है ताकि शारीरिक समस्‍याओं और बीमारियों को दूर किया जा सके। जब कुछ पॉइंट्स को नियमित रूप से दबाया जाता है तब शरीर में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं और तकलीफ कम होती है।  

शोध के दौरान सबसे पहले यह समझा गया कि आखिर बच्‍चे रोते क्यों है? जब बच्‍चे छोटे होते हैं और जब तक बोलना नहीं जानते तब तक वह अपनी समस्‍या के बारे में बता नहीं पाते और लगातार रोने लगते हैं। यानी जब बच्चे को कुछ ऐसी तकलीफ होती है जो उसके पेरेंट्स को दिखाई नहीं देती जैसे सिरदर्द, पेट दर्द, जी मचलाना आदि तब वे रोने लगते हैं। अगर बच्चा लगातार या एक घंटे से रो रहा है तो हो सकता है कि गैस के कारण उसके पेट में दर्द हो या सर्दी या साइनस के कारण उसके सिर में दर्द हो।

इस स्थिति में बच्चे के पैरों की उंगलियों को धीरे-धीरे दबाई गई। हर उंगली को लगभग 3 मिनट तक दबाने से उसका सिरदर्द कम हुआ। अगर बच्चे को इससे आराम नहीं मिला तो हो सकता है उसे गैस में गैस हो। इसके लिए बच्चे के पैर के मध्य भाग के ठीक नीचे दबाने से बच्चे को गैस के कारण होने वाले दर्द से आराम मिला। एक बार बच्चे के दर्द में आराम मिलते ही उसका रोना बंद हो गया। बच्‍चों की सहनशक्ति और प्राचीन पद्धति ने अच्‍छी तरह से काम किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि रोना और परेशान करना बच्‍चों का किसी चीज के बारे में बताने का नॉर्मल माध्‍यम है, इसलिए सामान्‍य स्‍तर पर कमी (चुप्पी की तुलना में) उपचार के लक्ष्य है। यह शोध जर्नल एक्‍यूपंक्‍चर इन मेडिसिन में प्रकाशित हुआ था।  


Image Source : Getty

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