विश्व पृथ्वी दिवस: आपकी रोज की वो 5 आदतें जो पर्यावरण को पहुंचा रही हैं नुकसान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 20, 2018
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Quick Bites

  • 22 अप्रैल को हर साल विश्व पृथ्वी दिवस यानि वर्ल्ड अर्थ डे के रूप में मनाया जाता है।
  • पेपर यानि कागज पेड़ों को काटकर बनता है।
  • ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनसे हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

22 अप्रैल को हर साल विश्व पृथ्वी दिवस यानि वर्ल्ड अर्थ डे के रूप में मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है?
ताकि लोगों को जागरूक करके इसे बचाया जा सके।
बचाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
क्योंकि इसे नष्ट किया जा रहा है।
कौन नष्ट कर रहा है?
हम और आप मिलकर नष्ट कर रहे हैं।

दरअसल विज्ञान का हमारा अब तक का ज्ञान यही बताता है कि ब्रह्मांड में पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है, जहां जीवन संभव है। यानि एक मात्र ऐसा ग्रह जहां हवा भी है, पानी भी है, तापमान भी हमारे अनुसार है और वायुमंडल भी है। अगर ये सब पृथ्वी पर नहीं होते, तो न हम और आप होते और न कोई अन्य जीव। इसे ऐसा भी कह सकते हैं कि हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवित रहने के लिए पृथ्वी का जीवित रहना बहुत जरूरी है। मगर क्या आप जानते हैं कि ऐसे बहुत से काम हैं जिनसे हम इस पृथ्वी को नुकसान पहुंचा रहे हैं और धीरे-धीरे इस पृथ्वी की प्राकृतिक संपदाओं और पर्यावरण को नष्ट करते जा रहे हैं।
पृथ्वी पर मौजूद अन्य जीव-जंतुओं के मुकाबले हम मनुष्यों की संख्या बेहद कम है मगर इस पृथ्वी को सबसे ज्यादा नुकसान हम मनुष्य ही पहुंचा रहे हैं। पृथ्वी का जीवन नष्ट करने वाले जो भी बड़े कारक हैं भले हम उन्हें न रोक पाएं मगर कम से कम अपनी आने वाली संतान, अपनी पीढ़ियों और उनके शरीर के रूप में अपने वंश को जीवित रखने के लिए हम अपनी कुछ छोटी-छोटी आदतें तो बदल ही सकते हैं।

बिना जरूरत बिजली का इस्तेमाल

हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि रूम से बाहर अगर थोड़े समय के लिए जाना है तो पंखा,लाइट, कूलर, एसी आदि को बंद नहीं करते हैं। ऐसे ही कई बार देखने वाला कोई नहीं होता मगर टीवी चलती रहती है। आप चूंकि बिजली के लिए पैसा अदा करते हैं इसलिए आप समझते हैं कि बिजली पर आपका हक है और आप उसे चाहे जैसे इस्तेमाल करें। मगर आपको बता दें कि इससे हमारे देश और हमारी पृथ्वी के बहुत बड़े संसाधन का नुकसान होता है। इसलिए अगली बार जब भी कमरे से बाहर जाएं, बिजली से चलने वाली चीजों को ऑफ करना न भूलें।

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कागज का ज्यादा इस्तेमाल

हालांकि पेपर के इस्तेमाल में अक्सर हमें कोई गलत बात नहीं समझ आती है क्योंकि ये पॉलिथिन की तरह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता है। मगर जहां तक संभव हो इन्हें कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए और हो सके तो पेपर से बनी चीजों को एक बार से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। पेपर यानि कागज पेड़ों को काटकर बनता है यानि आप जितना ज्यादा कागज का इस्तेमाल करेंगे उतने ही ज्यादा पेड़ काटने पड़ेंगे। इसलिए कागज का गैर जरूरी इस्तेमाल न करें। कम से कम पर्यावरण की रक्षा के लिए इतना तो कर सकते हैं न?

पानी का ज्यादा इस्तेमाल

सोचिये अगर आपको तेज प्यास लगी हो और पीने के लिए कहीं भी पानी न हो, तो क्या होगा? विज्ञान के मुताबिक बिना पानी के आप ज्यादा से ज्यादा 3 दिन तक जिंदा रह सकते हैं। अगर पानी हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण है, तो इसका बचे रहना भी बहुत जरूरी है। पीने के अलावा बड़े स्तर पर पानी का जो घरेलू इस्तेमाल है उसमें नहाना, कपड़े धुलना, बर्तन धुलना और खाना बनाना शामिल हैं। ये मूलभूत काम हैं इसलिए इन्हें करें मगर कम से कम पानी में करें। वहीं कुछ लोग पानी का दुरुपयोग करते हैं जैसे जमीन धुलना, घर के बाहर छिड़कना, जल्दी-जल्दी गाड़ी धुलना या नल खुला छोड़े देना। अगर कभी-कभी आप भी भूल से ऐसा करते हैं, तो संकल्प लें कि अब ऐसा नहीं करेंगे ताकि आपके बच्चों को पानी पेट्रोल से मंहगे कीमत पर घंटों लाइन में खड़े रहकर न खरीदना पड़े।

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प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल

सामानों को ले आने-ले जाने और संभालकर रखने के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल आप भी करते होंगे। प्लास्टिक का प्रयोग सुविधाजनक है और ये काफी वजन को उठा सकता है। इसलिए इनका इस्तेमाल धड़ल्ले से हम सब करते हैं। मगर इस प्लास्टिक का हमारे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि ये सैकड़ों सालों तक मिट्टी के नीचे दबी रहने के बावजूद पूरी तरह गलती नहीं हैं। हमारी धरती के नीचे और हमारे समंदर के अंदर इस तरह का कचरा बहुत मात्रा में दफ्न है जो गल नहीं सकता जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसलिए प्लास्टिक पॉलिथीन की जगह आपको कपड़े या जूट के बैग और पैकेट्स का इस्तेमाल करना चाहिए।

गाड़ियों का गलत इस्तेमाल

गाड़ियों का आविष्कार किया गया ताकि मनुष्य कम समय में लंबी दूरी तय कर सके। ध्यान दें... लंबी दूरी... मगर होता क्या है कई लोगों को घर से 200 मीटर दूर मार्केट भी जाना है तो गाड़ी से जाते हैं। 8 लोगों को ले जा सकने वाली कार में एक आदमी ऑफिस जा रहा है। गाड़ियों के ऐसे इस्तेमाल से जहां एक तरफ धरती ईंधन से खाली होती जा रही है, जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ेगा, वहीं इससे बहुत ज्यादा वायु प्रदूषण होता है। इसका गलत इस्तेमाल रोकने के लिए जितना संभव हो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। कार-पूल सिस्टम भी अपना सकते हैं और छोटी-छोटी दूरियों को पैदल तय करने की आदत डालें। ये आपके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा है।

इसके अलावा भी ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनसे हम पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जैसे ज्यादा फ्रिज का इस्तेमाल, ज्यादा एसी का इस्तेमाल, खाना फेंकना, धुंए वाली चीजें जलाना आदि। इन सभी छोटी-छोटी आदतों से आप भले बहुत बड़ा बदलाव नहीं कर सकते हैं मगर कम से कम पर्यावरण को बचाने में अपना छोटा सा सहयोग तो कर सकते हैं। अगर आप पृथ्वी को बचाने में बहुत बड़ा सहयोग नहीं भी कर पा रहे हैं तो कम से कम इसे मिटाने में तो कम से कम जिम्मेदार बनिए।

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