स्वस्थ और तेज आंखों के लिए वरदान हैं ये 2 योगासन!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 03, 2017
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Quick Bites

  • क्या हैं आंखों में विकार के कारण।
  • ये दो योगासन आंखों को करते हैं सही।
  • सिर दर्द और अन्य रोग भी होते हैं दूर।

बिगड़ते लाइफस्टाइल के चलते आंखों का कमजोर होना कोई चौंकने वाली बात नहीं है। जिस तरह का आजकल खानपान और लोगों का रहन सहन चल रहा है उसमें आइज साइट का शक्तिहीन होना लाजमी है। कई लोग हर वक्त कमजोर आंखों का रोना रोते रहते हैं। लेकिन वो ये नहीं जानते कि इसके जिम्मेदार भी वही हैं। आंखें सिर्फ हमारे शरीर ही नहीं बल्कि हमारे जीवन का भी अभिन्न अंग है। आंखें ही वह एकमात्र साधन है जिससे हम इस दुनिया को देखते हैं।

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आजकल बड़ों के साथ-साथ युवाओं और छोटे-छोटे बच्चों को भी चशमा लगा हुआ है। हर वक्त धुंधला दिखाई देना, आंखों में दर्द होना, आंख में जलन होना, सिर दर्द होना सभी कमजोर आंखों के लक्षण हैं। जाने-अनजाने में हम ही कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे हमारी आंखें कमजारे हो जाती हैं। जिसमें हद से ज्यादा फोन, टैबलेट, टीवी और कंप्यूटर के आगे वक्त बिताना, दूषित और फास्टफूड का सेवन करना, हरी सब्जियों को तिरछी नजरों से देखना, समय पर भोजना ना करना, हर समय चिंता और तनाव में रहना आदि कारण शामिल हैं। ये कुछ ऐसे मुख्य कारण हैं जिनसे हमारी आंखें कमजोरी होती है। आज हम आपको इस लेख में 2 ऐसे योगासन बता रहे हैं जिन्हें नियमित करने से आंखों से संबंधित हर तरह की समस्या दूर होती है। इन 2 आसान और जबरदस्त योगासनों के नाम हैं 'अनलोम-विलोम' और 'भ्रामरी प्राणायम'।


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'अनलोम-विलोम' प्राणायाम और आंखें

अनलोम-विलोग यानि कि सीधा और उल्टा प्राणायाम। यह प्राणायाम सांसो से संबंधित सभी बीमारियों को दूर करने के साथ ही कई और तरह से भी फायदेमंद है। जब भी कोई व्यक्ति योग की शुरुआत करता है तो शायद अनलोम विलोग से ही करता होगा। क्योंकि यह बहुत ही आसान और बेसिक योग है। आसानी से होने वाले इस योग में नाक के एक छिद्र से हवा लेनी होती है और दूसरे से छोड़नी होती है। इस प्राणायाम को सुबह—सुबह किसी खुली जगह पर बैठकर खाली पेट करना चाहिए।

अनलोम विलोम का नियमित प्रयोग हमारी आंखों के लिए भी वरदान साबित हुआ है। नियमित अनलोम—विलोम करने वाले लोगों को आंखों से संबंधित कोई समस्या नहीं होती है। बल्कि जिन लोगों को चशमा लगा हुआ है या जिनकी आंखें कमजोर हैं उन्हें भी अनलोम विलोम करने से फायदा मिलता है। इसके साथ ही तनाव और चिंता से भी आराम मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अनलोम-विलोम प्राणायाम का सीधा संबंध हमारे मस्तिष्क से है। इसलिए जिन लोगों को आंखों से संबंधित कोई भी समस्या है उन्हें रोजाना 10 मिनट 'अनलोम-विलोम' प्राणायाम करना चाहिए। ध्यान रहे 'अनलोम-विलोम' प्राणायाम 10 मिनट से ज्यादा करना सही नहीं है।

भ्रामरी प्राणायम से दूर करें आंखों के रोग


भ्रामरी प्राणायाम मन शांत करने और क्रोध दूर करने के लिए बहुत फायदेमंद है। इस प्राणयाम की सबसे अच्छी खासियत है कि इसे दिनभर में कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है। इस प्राणायाम को करते वक्त दिमाग में मधुमक्खी की तरह गुंजन होता है। इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं। भ्रामरी प्राणायम में कान को अंगूठे से अच्छी तरह बंद करना है। बाकी चार उंगलियों को माथे पर रखना होता है। इसके बाद पूरे ध्यान और लगन से ओम का उच्चारण करना होता है। ऐसा करने से हमारी आंखों को बहुत सुकून और आराम तो मिलता ही है साथ हमारी आंखों की खोई हुई रोशनी को भी वापिस आने में मदद मिलती है।

अनलोम-विलोग और भ्रामरी प्राणायाम के अन्य फायदे

 

  • इससे आपको हार्ट की समस्या कभी नहीं होगी।
  • नियमित करने से आपके सिर में दर्द नहीं होगा।
  • आपकी सोचने-समझने की क्षमता यानि कि याद्दाश्त भी काफी तेज रहेगी।
  • चेहरे पर निखार आएगा।
  • दिमाग शांत रहेगा और सकारात्मक सोच आएगी।

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