हे फीवर, जिसे सीज़नल एलर्जिक राइनाइटिस भी कहा जाता है एक प्रकार का संक्रमण (इन्फेक्शन) है जो नाक के रास्ते , गले और आंख की झिल्ली (कंजंक्टिवा) में होता है जो हवा में तैरते परागकणों और सड़न के प्रति संवेदनशीलता (सेंसेटिविटी) के कारण उत्पन्न होता है। ये परागकण विभिन्न प्रजाति के पेड़ों, घांस, जंगली घास और अन्य ऐसे पौधों से आते हैं जिनका परागण कीटों की अपेक्षा वायु द्वारा अधिक होता है। क्योंकि पराग के अलग-अलग प्रकार अलग-अलग लोगों में लक्षणों को बढ़ाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति में हे फीवर मौसम के मुताबिक होता है और उसका सम्बन्ध उस समय से होता है जब एलर्जी बढ़ाने वाला पौधा खिलने की अवस्था में होता है। उदाहरण के तौर पर ऐसे लोगों के लिए जिन्हें पेड़ों से एलर्जी है और वे समशीतोष्ण उत्तरी अमेरिका में रहते हैं ।
आमतौर पर मार्च से मई तक का वक्त काफी परेशानी भरा होता है क्योंकि यही वह समय होता है जब पेड़ खिल रहे होते हैं। घास से एलर्जी वाले लोगों के लिए जून और जुलाई माह सबसे खतरनाक हैं, जबकि मध्य अगस्त से अक्टूबर तक के लिए जंगली घास से एलर्जिक लोगों के लिए लक्षण सबसे खराब हैं। क्योंकि सड़न नमी और अंधेरे वाली परिस्थितियों पर निर्भर करती है इसीलिए सड़न के प्रति एलर्जी रखने वाले लोगों में मौसम के मुताबिक होने वाली एलर्जी कम होती है। वे आमतौर पर पाते हैं कि उनके लक्षण गर्म और बारिश के मौसम से जुड़े हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में गर्मी और बर्फबारी वाला मौसम इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त होता है।
हे फीवर और उससे जुड़ी बीमारी, बारहमासी एलर्जिक राइनाइटिस (जानवर, रूसी, धूल के कण या तिलचिट्टे (काक्रोच) के प्रति पूरे साल संवेदनशीलता ज़्यादातर ऐसे लोगों में होती है जिनका एलर्जी का पारिवारिक इतिहास या व्यक्तिगत रूप से एलर्जी से जुड़ी स्थितियों वाला इतिहास होता है जैसे एक्जिमा और बचपन में हुआ अस्थिमा। वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 20% लोग या तो मौसमी या बारहमासी एलर्जिक राइनाइटिस से पीड़ित हैं। हालांकि मौसमी एलर्जिक राइनाइटिस सभी वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकती है फिर भी इसके लक्षण आमतौर पर बचपन और किशोरावस्था के दौरान चरम सीमा पर होते हैं।

