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आज हम सभी अपने स्वा स्य्ों को लेकर जागरूक हैं। सर्दी, जु़काम हो या सरदर्द हमें पता है कि इस स्थिसति में क्याक करना है। लेकिन मुंह स्वांस्य्ैं को लेकर आज भी लोगों में जागरूकता की कमी है।
डॅाक्टसर अपर्णा शर्मा का कहना है कि दांतों और मसूड़ों की समस्याजओं से बचने के लिए ब्रशिंग और फ्लॅासिंग के साथ चिकित्साक से मिलना ज़रूरी है। दिन में एक बार फ्लासिंग करें और सोने से पहले ब्रश ज़रूर करें।
दांतों की सामान्य् समस्या एं:
• दांतों में छेद : अधिक मीठा खाने पर या कई अन्यै कारणों से हमारे मुंह में मौजूद बैक्टीरिया एसिड पैदा करने लगते हैं, जिससे दांतों में छेद (कैविटीज़) हो जाती हैं।
• प्लॅााक और टारटर: प्लॅािक हर एक के दांतों में होता है। दांतों की सफाई करने के तुरंत बाद, प्लॅा क का बनना शुरू हो जाता है। अगर इसे रोजाना अच्छी तरह से साफ नहीं किया गया तो इसे कठोर टारटर में तब्दील होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।
• जिंजिवाइटिस:यह मसूड़ों की बीमारी है, जिसमें मसूडें सूज जाते हैं या इनसे खून रिस सकता है।
• पेरिओडोन्टाल रोग: यह मसूड़ों का गंभीर रोग है, जो दांतों से जुड़ी हड्डी तथा उसके आस-पास के उत्तको को भी नष्ट कर देता है।
क्याप आप जानते हैं:
• इनेमल शरीर का सबसे कठोर भाग होता है।
• हमारी जीभ जहां व्यंकजनों का स्वा्द लेने में हमारी मदद करती है वहीं यह चिकित्सगकों को हमारी बीमारी का भी पता देती है।
• हमारा मुंह किसी भी बीमारी को सबसे पहले दर्शाता है।
• मुंह के अंदर की रेखा को ‘ओरल म्यूरकोसा’ कहते हैं और इसका लाल या गुलाबी रंग का होना स्व स्थ शरीर का संकेत देता है।
दांतों का स्वादस्य्ो हमारे संपूर्ण स्वा’स्य्ैं को प्रभावित कर सकता है और गंभीर बीमारियों को भी जन्मक दे सकता है, तो आज से ही सजग हो जायें।

