हार्ट फेल्योर क्‍या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 06, 2013
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heart failure kya haiहार्ट फेल्योर का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के मन में हार्ट अटैक, ह्रदय के रुक जाने और ऐसे ही ह्रदय संबंधी अनेकों डरावने खयाल आने लगते हैं। लेकिन यह पूरा सच नहीं है।  हार्ट अटैक और हार्ट फेलियोर में थोड़ा फर्क है। आइए जानते हैं कि हार्ट फेल्योर और हार्ट अटैक क्‍या है।

heart failure kya haiहार्ट फेल्योरः  

बदलती जीवन शैली और अधाधुंध भाग-दौड़ के चलते आज यह एक समान्य समस्या बन चुकी है। दरअसल, जब हार्ट अच्‍छे से काम नही कर पाता, यानी जब दिल अच्‍छे से खून को पंप नही कर पाता और शरीर में खून की आवश्‍यकता की पूर्ति ठीक से नही होती है तब हार्ट फेल्‍योर की स्थिति आती है।

हार्ट अटैकः


हार्ट अटैक तब पड़ता है जब ह्रदय की मांशपेशी को आक्सीजन पहुंचानी वाली कोई रक्त वाहिका अवरुद्ध हो जाती है, जिससे ह्रदय के एक भाग में रक्त का प्रवाह रुक जाता है। जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

वैसे तो ह्रदय के ठीक से पम्प करने के काम में बाधा डालने वाले और भी जोखिम कारक होते हैं, लेकिन हार्ट अटैक उनमे से एक  प्रमुख कारण है।

इसका मतलब यह नहीं कि हार्ट पूरी तरह से फेल हो गया है। लेकिन ऐसी स्थिति होने पर कुछ परिस्‍ि‍थतियों में आदमी की मौत भी हो सकती है। हार्ट के फेल होने पर सांस लेने में दिक्‍कत होती है। हार्ट अटैक होने के कारण हृदय की कुछ मांसपेशियां मर जाती हैं, जिसकी वजह से ह्रदय की रक्त प्रवाह की क्षमता कम हो जाती है और हार्ट फेल्योर की संभावना बढ़ जाती हैं। हार्ट फेल्योर हाई ब्लड प्रेशर, मदिरा पान और हार्ट वॉल्वों में गड़बड़ी जैसे कारणों से भी होता है।  

आइए जानें हार्ट फेल्‍योर के क्‍या कारण हो सकते हैं।
हार्ट फेल्‍योर अन्‍य दिल की बीमारियों की तुलना में एक चरम अवस्‍था है। इसके कुछ निम्न कारण हैं-

-  कोरोनरी आर्टरी रोग
-  उच्च रक्त चाप(हायपरटेंशन)
-  हृदय के वॉल्व संबंधी समस्याएं(जिसमें रयूमेटिक हृदयरोग भी शामिल है)
-  हृदय संबंधी जन्मजात विकृति या समस्या
-  कार्डियोमायोपैथी(हृदय की मांसपेशियों का रोग)
-  हृदयाघात
-  कार्डियक एरिथ्मिया(हृदयगति एवं/या रिदम संबंधी समस्या)


दिल के फेल होने के लिए ये कारक भी जिम्‍मेदार हो सकते हैं :

शरीर में टॉक्सिनस का प्रवेश, जिसमें अत्यधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन भी शामिल है। हायपरथायरॉयडिज्म, मधुमेह और फेफड़ों संबंधी दीर्घकालिक रोगों से भी हार्ट फेल का खतरा बढ जाता है।

हार्ट फेलयर के कुछ रोगियों में, हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और सही रूप से पंप नहीं कर पाती। दूसरे लोगों में, हृदय की मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं और दो हार्टबीट के बीच हृदय के कोष्ठकों में पर्याप्त रक्त नहीं भर पाता।
अपनी दिनचर्या और खान-पान को ठीक कर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।
हार्ट फेल्योर से बचने के लिए आपको इन कुछ सावधानियों का ध्यान रखना चाहिएः

•  अपने डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
•  यदि आप धूम्रपान करते हैं तो धूम्रपान न करें।
•  बिल्कुल निर्धारित रूप से अपनी दवाई लें।
•  आपके रक्तचाप पर नजर रखें।
•  डॉक्टर द्वारा बताए गए वजन को मेंटेन करें। 
•  अल्कोहल और कैफीन से बचें।
•  नमक कम से कम लें।



हार्ट फेल्‍योर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। संभवतः इसका कारण अधिक उम्र के लोगों की संख्या बढ़ना, और इसके साथ चिकित्सा विज्ञान की प्रगति, जिसके कारण दूसरे हृदय रोगों के रोगियों के जीवन की अवधि बढायी जा सकती है, जिससे हार्ट फेल्यर को पनपने का अवसर मिलता है।

 

[इसे भी पढ़ें : हार्ट फेल्‍योर के लक्षण]

 

 

 

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