स्वास्थ्य बीमा शब्दावली

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 29, 2011
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एजेंट  :

वह व्यक्ति जो बीमा कंपनी द्वारा चयनित किया जाता है और जो बीमा धारक के पक्ष में काम करे । एक एजेंट की प्रामाणिकता आई आर डी ए द्वारा जाँची जाती है।

संपत्तिभ/ एसाइनी :

वो व्यक्ति जो बीमा योजना के लाभ उठा सकता है ।

दावा/ क्लेम :


यह वो प्रार्थना होती है जो कि बीमा धारक द्वारा बीमा कंपनी से की जाती है जिसमें की बीमा निर्माताओं को स्वास्य्ना  की सेवाओं की परिपूर्ति करनी होती है । आम तौर पर यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए होती है जो कि स्वास्य् से बीमा कंपनी को सेवा उपलब्ध कराते हैं । इस सेवा प्रदाता को थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर कहते हैं ।

बीमा का प्रमाण पत्र :

यह वो प्रमाण पत्र होता है जो कि लाभ और कवरेज की प्रक्रियाओं का वर्णन करता है जो कि बीमा योजना के लिए दावा करता है । यह कवर राशि और सम्बन्धित नकदी सीमा को भी बताता है ।

संचयी बोनस/कम्यूलेटिव बोनस  :

यह दावे में किसी प्रकार की छूट के ना होने जैसा है । जिस राशि का बीमा होता है वो प्रति वर्ष 5 प्रतिशत बढ़ती जाती है । लेकिन संचयी बोनस खर्च का वह विषय है जो कि कैपिटल सम एश्योर्ड से 50 प्रतिशत के नीचे नहीं जा सकता और इस योजना का निरंतर नवीकरण होना चाहिए  ।

कैशलेस क्लेम /नगदहीन दावा :

जैसा कि इस शब्द से पता चलता है, यह वो सेवा है जो व्यक्ति को चिकित्सा बिना नगदी के दी जाती है । बीमा कंपनी चिकित्सा संगठनों के बड़े नेटवर्क से जुड़ी होती है जैसे नर्सिंग होम और दूसरे अस्पताल । बीमा धारक अपनी बीमा योजना के अनुसार एक पैसा खर्च किये बिना ही इन नेटवर्क अस्पतालों में चिकित्सकीय सुविधा पा सकता है । लेकिन यह ध्यान रखने योग्य बात है कि कैशलेस मेडिक्लेम सेटलमेंट एक ऐसा विषय है जिसकी बहुत सी सीमाएं हैं ।

कवरेज राशि:

यह वो अधिकतम राशि है जो कि दावे के समय दी जाती है । इस राशि को सम इन्योनेट र्ड या सम एश्योर्ड भी कह सकते हैं । आपके द्वारा जो राशि निश्चित की गयी और जो कवरेज आप देना चाहते हैं उसके अनुसार आप स्वास्य्रा  बीमा योजना का प्रीमियम तय कर सकते हैं ।

क्रिटीकल इलनेस पॉलिसी / गंभीर बीमारी की योजना :

यह वो गंभीर बीमारियां हैं जिनकी व्याख्या बीमा कंपनियों द्वारा की जाती है । मल्टिपल स्टेज आरोसिस, कैंसर, अंग प्रत्यारोपण और दूसरी बड़ी बीमारियां गंभीर बीमारियों की श्रेणी में आती हैं । अगर बीमा धारक को कोई गंभीर बीमारी हो जाती है तो ऐसे में बीमा कंपनी कुछ नियम व शर्तों को देखते हुए बीमारी का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार रहती हैं ।

विकलांगता बीमा :

यह बीमा का वह रूप है जो कि आंशिक विकलांगता या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में बीमा धारक विकलांग व्यक्ति को हर महीने कुछ पैसे देते है । इस विकलांगता का कारण बीमारी या दुर्घटना हो सकती है लेकिन यह पैसे तभी दिये जाते हैं जब कि विकलांग उस व्यक्ति के व्यवसाय को प्रभावित कर दे ।

निवास का अस्पताल/ डोमिसिलियरी हास्पिटलाइजे़शन :

डोमिसिलियरी हास्पिजटलाइजे़शन वो स्थिति है जबकि मरीज़ की चिकित्सा घर पर ही की जाती है जबकि वह अस्पताल ले जाने की स्थिति में ना हो । यह उस स्थिति में भी हो सकता है जब मरीज़ को चिकित्सा के दौरान अस्पताल में वो सुविधाएं नहीं मिल सकतीं जो कि घर पर मिलती हैं ।

बहिष्करण:

यह वो बीमारियां या स्थितियां हैं जो कि बीमा योजना के अंतर्गत कवर नहीं होतीं । यह दो प्रकार की हो सकती...

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