बीते वर्ष स्वाइन फ्लू ने कुछ ही समय में पूरे देश में दहशत सी मचा दी थी। अस्पताल, मीडिया हाउस, एयरपोर्ट, सोशल गेट टुगेदर हो या आपका आफिस हो हर जगह स्वाइन फ्लू की ही चर्चा हो रही थी । ऐसे समय में आपके किसी सहकर्मी या मित्र को फ्लू भी होता, तो आपके अंदर स्वाइन फ्लू का डर बैठ जाता।
मास्क जिनका उपयोग सामान्यत: अस्पतालों में, प्रयोगशाला में या फैक्टरी में किया जाता है वो धड़ल्ले से कुछ इस प्रकार इस्तेमाल में लाये गये कि अस्पतालों में उनकी कमी होने लगी और एक बार फिर कुछ वैसी ही स्थितियां बनती जा रही हैं। हालांकि बीते वर्ष लोगों को इस बीमारी के विषय में ठीक प्रकार की जानकारी नहीं थी इसलिए भी स्थितियां गंभीर होती गयीं।
स्वाइन फ्लू के नाम का प्रयोग एक नए प्रकार के इंफ्लुएंजा को दर्शाने के लिए किया जाता है । हालांकि यह मूल रूप से सूअरों में पाया जाता है। यह वायरस आम तौर पर इंसानों में संक्रमित नहीं होता, लेकिन यह बीमारी उन लोगों को अपना शिकार बना सकती है जो सुअरों के नज़दीकी संपर्क में होते हैं ।
स्वाइन फ्लू के वायरस बरसात में अति सक्रिय हो जाते हैं इसलिए इनसे बचने के लिए सुरक्षा के उपाय अपनाना और इनके लक्षणों को जानना भी अति आवश्यक है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण आम फ्लू के लक्षणों के समान होते हैं:
1. मांसपेशियों में दर्द के साथ बुखार
2. गले में खराश के साथ दर्द और सूखी खांसी
3. अत्यधिक थकान
4. ठण्ड लगना या नाक निरंतर बहना
5. गले में खराश
6. कफ
7. सांस लेने में तकलीफ
8. भूख कम लगना
9. मांसपेशियों में बेहद दर्द
10. उल्टी या दस्त होना
वायरस के संक्रमण की अवधि दो से पांच दिनों या फिर सात दिनों की हो सकती है। सूत्रों के अनुसार जिन इलाकों में बारिश अधिक होगी वहां स्वाइन फ्लू के केसेज़ के भी अधिक होने की सम्भावना बढ़ेगी।
अगर आप नीचे दी गयी किसी स्थिति से गुज़र रहे हैं, तो आपको अधिक सुरक्षा की आवश्यकता है।
• आपने पिछले तीन सालों से अस्थमा का उपचार कराया है
• आप गर्भवती हैं
• आपकी उम्र 65 वर्ष से अधिक है
• आपके बच्चे की उम्र 5 साल से कम है
स्वाइन फ्लू का उपचार:
स्वाइन फ्लू का उपचार सामान्य फ्लू के जैसे ही किया जाता और ठंड, कफ, बुखार से बचने के लिए पैरासिटामाल या एंटीरेट्रोवायरल जैसी विषाणुरोधक दवाएं भी दी जाती हैं ।
• युवाओं में बुखार और ठंड से बचने के लिए पैरासिटामाल दिया जाता है।
• बच्चों को कभी कभी अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता होती है ।
• 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को एस्पिरिन जैसी दवाएं नहीं देनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू से बचने के लिए सुरक्षा के उपाय अपनायें। ऐसी जगह जहां संक्रमण होने की सम्भावना है वहां मास्क लगाना ना भूलें। ऐसे क्षेत्रो का दौरा करने से बचें जहां स्वाइन फ्लू फैला हो।

