लगातार बढ़ती बीमारियों में बीमारियों की पहचान करना मुश्किल होता है। वर्तमान में बहुत सी बीमारियां ऐसी है जिनके लक्षण शुरूआती दौर में एक जैसे ही दिखाई पड़ते हैं लेकिन जब बीमारी अधिक गंभीर होती तो उसके लक्षण अलग से पता चल जाते हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू वायरस हो या डेंगू, मलेरिया इनके लक्षणों को शुरूआती दौर में जानना आज बड़ी समस्या हो गई है। अब आप साधारण फ्लू और स्वाइन फ्लू को ही देख लें। दोनों ही बीमारियों के शुरूआती लक्षण सामन है लेकिन जांच के बाद ही इनकी पहचान हो पाती है। बहरहाल, आइए जानते हैं स्वाइन फ्लू और सामान्य फ्लू के अंतर को।
- फ्लू इनफ्लुएंजा वायरस के संक्रमण से होता है। यह सामान्यतः ठंड के मौसम में या उसके आसपास होता है। इसके लक्षण में सामान्य सर्दी, खाँसी, तेज बुखार, हाथ-पैर व कमर में दर्द, ठंड के साथ बुखार व थकावट आदि होते हैं।
- सामान्य फ्लू में जहां सर्दी-खाँसी ही होते हैं वही स्वाइन फ्लू में बुखार, हाथ-पैरों कमर में दर्द, सिर दर्द, थकावट आदि लक्षण साथ में होते हैं।
- स्वाइन फ्लू और साधारण फ्लू के लक्षण सामान्य तौर पर तो एक जैसे ही होते हैं लेकिन सर्दी-खांसी जहां आम होते है और जल्द ही इनके सही होने की संभावना होती है वहीं स्वाइन फ्लू में व्यक्ति को अधिक तकलीफ होने लगती है। वहीं ठीक तरह से सांस भी नहीं ले पाता।
- सामान्यं सर्दी-खांसी से नहीं बल्कि संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से स्वाइन फ्लू फैलता है और उन वस्तुओं को हाथ लगाने से जिसे संक्रमित व्यक्ति ने छुआ हो।
- सामान्यत फ्लू जहां बहुत अधिक खतरनाक नहीं होता वही स्वाइन फ्लू बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
- स्वाइन फ्लू में संक्रमित व्यक्ति एक सप्ताह तक स्वस्थ व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है।
- सांस लेने में परेशानी,सीने में दर्द या दबाव महसूस होना, लगतार उल्टियां होना, उबकाई होना, जी मिचलाना सभी स्वा्इन फ्लू वायरस के लक्षण है।
- स्वाइन फ्लू की आंशका होने पर यदि उसके इलाज में देरी हो तो स्वाइन फ्लू बिगड़ सकता है लेकिन साधारण फ्लू में ऐसा कुछ नहीं है।
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