स्‍थूल गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी है कार्बोहाइड्रेट और फाइबर युक्‍त आहार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 02, 2011
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Quick Bites

  • महिलाओं मेे मोटापा आता है अधिक कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और कैल्शियम से।
  • मोटापाग्रस्त महिलाओं को गर्भावस्था के समय कम कैलोरी लेनी चाहिए।
  • महिलाओं में इस्ट्रोजन हार्मोंस के स्राव पर असर पड़ता है फैट के कारण।
  • आहार और व्यायाम के तालमेल कम होती है गर्भावस्था की जटिलताएं।

गर्भावस्था के दौरान हर स्त्री को न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने होने वाले बच्चे के लिए भी स्वस्थ व संतुलित आहार लेना होता है। ऐसे में आमतौर पर महिलाएं एक दिन में जितनी कैलोरी ले रही हैं उससे दुगुनी लेनी होती है। कई बार अधिक कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और कैल्शियम लेने के कारण महिलाएं जल्दी मोटी हो जाती हैं।

pregnancy diet for overweight women

 

यह सही है कि गर्भावस्था के दौरान आमतौर पर वजन बढ़ जाता है लेकिन जरूरत से अधिक वसा वाला भोजन करने से न सिर्फ मोटापा बढ़ता है, बल्कि महिला और होने वाले बच्चे के स्‍वास्‍थ्‍य को भी खतरा होने लगता है। लेकिन जो महिलाएं पहले से ही मोटी है, यानी स्‍थूल महिलाओं की पहली गर्भावस्था में उन्हें अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ऐसे में उन्हें गर्भावस्था में व्यायाम तो करना ही चाहिए साथ ही आहार और व्यायाम में तालमेल भी बिठाना चाहिए। आइए जानें स्थूल गर्भवती महिलाओं के लिए आहार में क्या-क्या होना चाहिए।

 

स्थूल गर्भवती महिलाओं के लिए आहार

  • मोटापाग्रस्त महिलाओं को गर्भावस्था के समय कम कैलोरी लेनी चाहिए। हालांकि डॉक्टर्स गर्भावस्था के दौरान हाई कैलोरी की बात करते हैं, लेकिन मोटापाग्रस्त महिलाओं को कम कैलोरी लेकिन पौष्टिक आहार ज्यादा लेने चाहिए। 
  • मोटापाग्रस्त गर्भवती महिलाओं को अधिक फैट वाले खाद्यान्न वस्तुओं का त्याग और नियमित व्यायाम करना बेहद जरूरी होता है। 
  • मोटापा कम करने और स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए खान-पान पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। 
  • गर्भावस्था में स्थूल महिलाओं को खाने में जैतून और सरसों का तेल, बादाम और अखरोट खाना चाहिए। 
  • घी से तर भोजन, तला-भुना खाना, जंकफूड, केक, पेस्ट्री , बाहर की चीजें, कोकटेल इत्यादि से परहेज करना चाहिए। 
  • सुबह के समय कार्बोहाइड्रेट्रस से भरपूर स्नैक्स लेने चाहिए।
  • खान-पान, जीवनशैली में बदलाव और नियमित सैर करनी चाहिए।
  • फाइबर युक्त भोजन को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
  • फल, सब्जी, जूस, पौष्टिक पेय पदार्थ और दालों के संतुलित आहार से मां और होने वाले बच्चे दोनों को लाभ होगा।
  • प्रोटीन की अतिरिक्त ज़रूरत के लिए दूध, अंडा, मीट, मछली, दाल, सोयाबीन, और मूंगफली खाना चाहिए।
  • शरीर में खून की कमी ना होने पाए,दूसरे खनिज लवण या विटामिन भी पूरी मात्रा में मिलते रहें इसके लिए रोजाना , पालक, बन्दगोभी, गाजर, मूली, खीरा, सलाद, टमाटर, सन्तरा, अंगूर, आम, पपीता जैसे फल या मौसमी फल लिए जाने चाहिए।
  • दूध, मांस, अण्डा, हरे पत्ते वाली सब्जी, अनाज, शर्करा तथा गुड़ इत्यादि को प्राथमिकता देनी चाहिए। 
  • कहने का अर्थ है मोटापाग्रस्त महिला भी वह सब कुछ खा सकती है जो सामान्य गर्भवती महिला खाती है, लेकिन कम वसा वाले भोजन को मोटापाग्रस्त गर्भवती महिला को अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए। खाने की मात्रा से अधिक खाने के पौष्टिक होने पर ध्यान देना चाहिए।
  • मोटापाग्रस्त गर्भवती महिलाओं को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं मोटापे के कारण गर्भावस्था जांच के दौरान भी दिक्कतें आती हैं। मोटापाग्रस्त महिलाओं को गर्भधारण करने में भी समस्या आ सकती है। फैट के कारण महिलाओं में इस्ट्रोजन हार्मोंस के स्राव पर असर पड़ता है और इससे बच्चे के विकास पर भी प्रभाव पड़ सकता है।  इसके साथ ही गर्भपात होने का खतरा भी अधिक रहता है। दरअसल ऐसी महिलाओं के साथ हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज का खतरा ज्यादा रहता है। 
  • स्थूल महिलाओं की पहली गर्भावस्था में बहुत कठिनाई होती है लेकिन वे व्यायाम करके इस कठिनाई को कुछ कम अवश्य कर सकती हैं।
  • गर्भावस्था में मोटापा कोई बीमारी नहीं है लेकिन मोटापे से गर्भावस्था में मां और होने वाले बच्चे को कई बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में गर्भवती स्त्री को अपने आहार और व्यायाम में तालमेल बनाकर गर्भावस्था की जटिलताओं को कम करना चाहिए।
  • मोटापाग्रस्त महिलाओं का गर्भावस्था के दौरान वजन तेजी से बढ़ता है, इसलिए उन्हें नियमपूर्वक रोजाना आधा घंटा व्यायाम करना चाहिए।

 

 

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टिप्पणियाँ
  • gaurav23 Aug 2011

    Said is very good..........

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