सोरियाटिक अर्थराइटिस एक खास किस्म की अवस्था है जो सोरियासिस से पीडि़त रोगियों में प्रकट होता है। सोरियासिस में रोगी का पहले त्वचा प्रभावित होता है फिर धीरे–धीरे शरीर के अंगों के जोड़ो में भी इसका असर होने लगता है।
कारण
सोरियाटिक अर्थराइटिस के निश्चित कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। लेकिन आनुवांशिक, दूषित वातावरण और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने आदि जैसे अनेक कारणों को इस बीमारी का जिम्मेदार माना जाता है।
लक्षण
सोरियाटिक अर्थराइटिस में एक साथ कई लक्षण प्रकट होते है। इसमें शरीर का कोई भी जोड़ प्रभावित हो सकता है और उसमें दर्द उत्पन्न हो सकता है। यह विशेषकर गुणात्मक जोड़ों का प्रभावित करता है। सोरियासिस से हाथ–पावं दोनों के नाखूनों को प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी में मरीज के अंगुली का जोड़ तक प्रभावित हो जाता है और मूवमेंट करना बंद कर देता है। इसमें जोड़ों में दर्द और मूवमेंट में होनी वाली समस्याएं के साथ निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकती है;
- बेहोशी
- हाथ और पावं के अंगुलियों में सूजन
- सुबह के समय जोड़ों में अकड़न
- पीठ में दर्द
- कनजंकटीवाइटिस, आखों लाल होना ओर पानी आना
- जोड़ का कमजोर हो जाना
जांच और निदान
इसमें सही दिशा में और सही समय पर उपचार शुरू करना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए कोई विशेष क्लिनिकल, लैबोरेटरी या रेडियोग्राफिक जांच आदि उपलब्ध नहीं है। आमतौर पर दूसरी तरह के अर्थराइटिस में की जाने वाली खून की जांच, एक्स–रे ,सिटी स्कैन, एमआरआई और शारीरिक परीक्षण जैसी विधियों के द्वारा बीमारी की जांच की जाती है।
- रूमेटिक फैटर और एनिमिया की जांच के लिए रक्त की जांच
- सोराइटिक अर्थराइटिस और अन्य तरह के अर्थराइटिस में फर्क देखने के लिए एक्स रे
- सिटी स्कैन, पीठ और गुदा मार्ग और चूतर के पास दर्द होने पर की जाती है।
- एमआरआइ, अगर फ्रंश जांच से बीमारी की पहचान न हो तो विशेषकर हाथ और पांव के जोड़ों के दर्द में एमआरआई किया जाता है।
उपचार
सोरियाटिक अर्थराइटिस के उपचार का उद्देश्य दर्द और सूजन से मरीज को राहत पहुंचाना होता है। उपचार से मरीज को दर्द से आराम, सूजन में कमी और जोड़ों को सही ढंग से काम करने में मदद मिलती है और भविश्य में जोड़ों में होने वाले बड़े नुकसान के खतरे में कमी होती है। इस बीमारी में डॉक्टर बीमारी की गंभीरता और इसके प्रति मरीज के प्रतिक्रिया को देखते हुए इलाज का सुझाव देता है।
- समय पर इस बीमारी की पहचान और इलाज शुरू कर देने से इसे गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता हैं और जोड़ों में मुवमेंट बनाए रखा जा सकता है।
- दवा: सोराइटिक अर्थराइटिस में दर्द और सूजन को नियंत्रित करने के लिए स्टेरायड रहित दर्द निवारक गोलियां, डीएमएआरडी और जैविक दवाएं दी जाती है।
- आइबेपरोफेन, डिक्लोफेन्स, स्प्रिन, नैपरोक्सिन जैसी स्टारॉयड रहित दवाए सुबह में दर्द और मांसपेषियों के खिचाव से आराम पहुंचाता है।
- कोक्स–2, सेलिकोक्सिक जैसी दवाए भी दर्द और खिचाव से राहत प्रदान करती है।
- सोरियाटिक अर्थराइटिस में गंभीर दर्द के और जोड़ों के उतकों के क्षतिग्रस्त होने के लक्षणों में डीएमएआरडी यानि एण्टी रूमेटिक दवाओं के नवीनतम संस्करण का प्रयोग किया जाता है।
- दर्द और सूजन के गंभीर स्थिति में दर्द को कम करने के लिए डाक्टर स्टॉरायड का का इंजेक्शन भी लगा सकता है।
- अन्य उपचार : सोरियाटिक अर्थराइटिस में दवाओं के साथ–साथ आराम,गर्म सेक और फिजिकल उपचार से भी दर्द और सूजन से काफी राहत मिलता है।दर्द और सूजन के गंभीर स्थिति में मरीज को बिलकुल आराम की स्थिति में कुछ दिनों तक रहना चहिए।इस दौरान जोड़ों को प्रभावित करने वाला एक्सरसाइज करना चाहिए। इससे धीरे–धीरे बीमारी की तीव्रता कम होने लगेगी और मरीज को आराम मिलने लगेगा। प्रभावित अंगों या जोड़ों की गर्म पानी या गर्म ईंट से सेकाई करने पर भी दर्द से राहत मिलता है। प्रभावित जोड़ों पर कोल्ड पैक का प्रयोग करने से भी सूजन में कमी आती है और जोड़ों में गतिशीलता लाने में काफी मदद मिलती है। इस बीमारी में फिजिकल थैरेपी भी काफी उपयोगी सिद्ध होती है, इससे जोड़ों में मूविलीटी आती है, जोड़ अधिक लचीला और शक्तिशाली बनता है और इससे मरीज के अन्दर बीमारी को लेकर एक साकारात्मक विचार भी उतपन्न होता है। मरीज धीरे–धीरे खुद को ठीक...

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