सिर्फ 15 मिनट में पहचाना जाएगा ऑटिज्म

By  ,  सखी
Oct 11, 2010
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

 वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका ढूंढ निकाला है जिससे युवाओं में ऑटिज्म (स्वलीनता) की पहचान मात्र 15 मिनट के अंदर कर ली जाएगी। हालांकि अभी तक ऑटिज्म की पहचान करने के लिए पीडित व्यक्ति के परिवार वालों और दोस्तों से ली गई व्यक्तिगत जानकारियों को ही आधार बनाया जाता है।
एक खबर के अनुसार लंदन के किंग्स कॉलेज के वैज्ञानिकों की एक टीम ने युवाओं में ऑटिज्म की पहचान करने के लिए ब्रेन स्कैन का तरीका ढूंढा है, जो मात्र 15 मिनट में ही इस बीमारी की पहचान कर लेगा। सबसे बडी बात है कि इस स्कैन की प्रामाणिकता 90 प्रतिशत से भी ज्यादा होगी। अपने इस प्रयोग में किंग्स कॉलेज के मनोचिकित्सा संस्थान के वैज्ञानिकों ने पहले एमआरआई स्कैनर के जरिये मस्तिष्क के कुछ भागों का चित्र लिया। इसके बाद एक भिन्न प्रकार की इमेजिंग तकनीक के सहयोग से इन स्कैन किए हुए चित्रों को त्रिआयामी (थ्रीडी) चित्रों में पुनर्निर्मित किया गया, जिसके आकार, प्रकार और बनावट का कंप्यूटर के जरिये आंकलन किया गया। इन जटिल प्रक्रियाओं के द्वारा ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर को स्पष्ट किया गया। हालांकि इस बारे में आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया को उपयोग में लाने के लिए विशेषज्ञों के समूह की जरूरत होगी, जो प्राप्त जानकारी की व्याख्या कर उसकी पहचान कर सकें।
हृदय रोगियों के लिए घातक हो सकती है सर्दी दिल के मरीजों के लिए सर्दी का मौसम खतरनाक साबित हो सकता है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन से जुडे भारतीय मूल के शोधकर्ता कृष्णन भास्करन और उनके सहयोगियों ने अध्ययन में पाया कि ठंड के मौसम में दिल का दौरा पडने का खतरा बढ जाता है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के अनुसार शरीर से बाहर के तापमान में गिरावट का सीधा संबंध दिल का दौरा पडने के खतरे में इजाफे से होता है। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में बाहरी तापमान में हर एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने से रोजाना दिल का दौरा पडने के 200 अतिरिक्त मामले सामने आते हैं। हालांकि ठंड में दिल के दौरे का खतरा बढाने के कारण अब तक स्पष्ट नहीं हुए हैं। महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अंशुल जैन कहते हैं, हालांकि इस बात पर रिसर्च जारी है लेकिन माना जाता है कि रक्तचाप में बदलाव और ठंड के मौसम में खून के गाढा होने की वजह से यह खतरा बढ जाता है। इस अध्ययन के लिए वर्ष 2003 से 2006 के बीच अस्पताल में भर्ती हुए 84010 हृदय रोगियों से संबंधित डाटा का विश्लेषण किया गया। साथ ही इसमें ब्रिटिश एट्मॉस्फेरिक डाटा सेंटर से जुटाए गए तापमान संबंधी आंकडों का भी अध्ययन किया गया। दिन के औसत तापमान में एक डिग्री गिरावट और दो डिग्री बढत दिल के दौरे के खतरे को 28 दिनों तक के लिए बढा सकती है। दो सप्ताह तक दिल के दौरे का सबसे अधिक खतरा रहता है। ब्रिटेन में प्रति वर्ष एक लाख 46 हजार दिल के दौरों के मामले सामने आते हैं। इनमें से एक लाख 16 हजार 29 दिन की अवधि के दौरान होते हैं। इससे सबसे अधिक खतरा 75 वर्ष से 84 वर्ष की आयुवर्ग वालों और दिल की बीमारियों से पीडित लोगों को होता है। एस्प्रिन का सेवन करने वालों को भी सतर्कता बरतने की जरूरत है क्योंकि वे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

 

Write a Review
Is it Helpful Article?YES5 Votes 12576 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर