सांसों से पता चलेगा मर्ज

By  ,  दैनिक जागरण
Nov 24, 2010
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बीमारियों का पता लगाने के लिए श्वसन परीक्षण हो सकता है सस्ता व कारगर तरीका

 

आपकी सांसों से शरीर की बीमारियों का पता चल सकता है। वह भी काफी सस्ते में। महज सर्दियों में सांसों को कभी-कभार भाप की शक्ल में निकलते देखा जा सकता है। लेकिन एक हकीकत है कि सांस में एक हजार से अधिक यौगिकों की पहचान मौजूद होती है।

 

अग्रणी शोधकर्ता जून-यी की टीम द्वारा किया गया अध्ययन दर्शाता है कि एक आप्टिकल तकनीक के जरिए सांसों में मौजूद यौगिकों की पहचान लगे हाथ की जा सकती है। इस तकनीक के जरिए बीमारियों की शीघ्र पहचान करने वाला, सस्ता उपकरण विकसित किया जा सकता है।

 

जून-यी का इस संबंध में कहना था- यह संभावना काफी रोमांचित करने वाली है कि एक ही बार सांस के परीक्षण में सभी बड़े बायोमार्कर का विश्लेषण किया जा सकता है। बतौर उदाहरण जून-यी ने बताया कि नाइट्रिक आक्साइड दमा का संकेत देता है। लेकिन सांसों में नाइट्रिक आक्साइड की मौजूदगी फेफड़ों से संबंधित अन्य कई बीमारियों के कारण भी हो सकती है, मसलन-साइस्टिक फाइब्रोसिस और ब्रोंकाइटिस। लेकिन अगर नाइट्रिक आक्साइड के साथ लगे हाथ कार्बन मोनोआक्साइड, हाइड्रो-पेरोक्साइड, नाइट्राइट्स, नाइट्रेट्स, पेनटान, एथान सरीखे दमा के अन्य बायोमार्कर की जांच कर ली जाए तो इस बीमारी के तयशुदा इलाज के प्रति आश्वस्त हुआ जा सकता है।

 

शोधकर्ताओं का मानना है कि सांसों में यौगिकों की मात्रा की पहचान के लिए मौजूदा तकनीक या तो काफी बोझिल, धीमा और कुछ खास यौगिकों के लिए ही है या फिर यौगिकों की सांद्रता की सटीक जांच करने में अक्षम है।

 

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