सरदर्द

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 24, 2009
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बहुत लोगों की आम समस्या, सिरदर्द पूरे सिर या इसके अलग-अलग हिस्सों और गरदन तक हो सकता है। सिरदर्द के कई कारण हो सकते हैं-

 

कारण

 

सिरदर्द के कई कारण हैं और इसकी तीन मुख्य श्रेणियां हैं

  • प्राथमिक सिरदर्दः प्राथमिक सिरदर्द में माइग्रेन, तनाव, क्लस्टर सिरदर्द और अनेक कम पाए जाने वाले सिरदर्द के प्रकार शामिल हैं। प्राथमिक सिरदर्द में तनाव से होनेवाला सिरदर्द सबसे ज्यादा पाया जाता है। लगभग 90 प्रतिशत वयस्क लोग जीवन में कभी ना कभी तनाव से होनेवाले सिरदर्द का सामना करते हैं। यह पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक पाया जाता है। दूसरा सबसे ज्यादा मिलनेवाला प्राथमिक सिरदर्द है-माइग्रेन। कुछ लोगों को कभी-कभी सिरदर्द की शिकायत होती है, जो जल्दी ही ठीक भी हो जाती है, जबकि दूसरों को यह लाचार और निर्बल बना देता है। तनाव, माइग्रेन और क्लस्टर सिरदर्द जीवन के लिए घातक नहीं हैं। अगर प्राथमिक सिरदर्द लंबे समय तक रहे तो यह जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
  • द्वितीय सिरदर्दः इस प्रकार के सिरदर्द सिर या गरदन के संरचनात्मक समस्याओं के कारण होते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे-मस्तिष्क में रक्तस्राव, ट्यूमर, सिर या गरदन में चोट, आँखों की समस्या, मेनिन्जाइटिस और एनसेफेलाइटिस।
  • क्रेनियल न्यूराल्जिया, फेशियल पेन और दूसरे सिरदर्दः  क्रेनियल न्यूराल्जिया में सिर और ऊपरी गरदन के नर्व में सूजन के कारण होने वाले सिरदर्द आते हैं, और ये ट्राइगेमिनल न्यूरॉल्जिया जैसे सिरदर्द के स्रोत हैं। सिरदर्द के इस समूह में फेशियल पेन् और सिरदर्द के कुछ अन्य कारण भी शामिल हैं।

लक्षण

 

विभिन्न प्रकार के सिरदर्द के अपने-अपने विशिष्ट लक्षण और दर्द की जगह इस बात पर निर्भर करती है कि दर्द किस कारण से हो रहा है। वयस्कों में सर्वाधिक पाया जाने वाला सिरदर्द तनाव से होनेवाला सिरदर्द है, जिसके लक्षण हैं-

  • सिर के पिछले हिस्से और गर्दन में दर्द होता है और लगता है जैसे कोई कसकर दबा रहा हो। दबाव इतना ज्यादा होता है कि लगता है जैसे पूरे सिर को दबाया जा रहा है और भौंह के पास सबसे ज्यादा दर्द होता है।
  • तनाव से होनेवाले सिरदर्द में पूरे सिर में दर्द होता है,लेकिन यह दर्द अधिक कष्टकर नहीं होता। कई लोग इस प्रकार के सिरदर्द के रहने के बावजूद अपना दैनिक कार्य़ जारी रखते हैं। इसमें दर्द से जुड़े कोइ अन्य लक्षण, जैसे-जी मिचलाना, उल्टी, प्रकाश या ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता आदि नहीं होते।
  • प्रायः यह बार-बार नहीं होता और इसका कोई निश्चित पैटर्न या अचानक दर्द की शुरूआत करने वाला कोई कारण नहीं होता लेकिन कुछ लोगों में यह बार-बार और यहां तक कि रोज भी हो सकता है।

जांच और रोग की पहचान

 

किसी भी तरह के सिरदर्द की पहचान के लिए रोगी के पहले के चिकित्सकीय और अन्य परिस्थितियों की जानकारी आवश्यक होती है। डॉक्टर आपसे सिरदर्द कैसे शुरू होता है, इसमें कैसा महसूस होता है, दर्द कितनी देर तक रहता है, इससे जुड़े अन्य लक्षण, जैसे जी मिचलाना, उल्टी, या प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता से संबंधित प्रश्न पूछ सकता है।

 

तनाव से होनेवाला सिरदर्द असह्य नहीं होता, सिर के दोनों ओर रहता है, सिर को कसकर दबाने जैसा एहसास होता है जिसमें धकधक(नस फड़कने) जैसा अनुभव नहीं होता, काम करने से यह नहीं बढ़ता और इसमें जी मिचलाने, उल्टी या प्रकाश से दूर रहने की इच्छा जैसे लक्षण नहीं होते।


सिरदर्द के अवस्था में शारीरिक जांच आवश्यक होती है। तनाव से जुड़े सिरदर्द के कुछ रोगी के सिर या गरदन की मांसपेशियां कुछ अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। अगर शारीरिक या न्यूरोलजिकल परीक्षण में कुछ असामान्यता पाई गई तो इसे तनाव से संबंधित सिरदर्द नहीं माना जाएगा।

 

सेकेंडरी सिरदर्द के रोगी में, सिरदर्द से जुड़े सभी तथ्य और शारीरिक जांच इसके पहचान औऱ कारण जानने का मुख्य माध्यम हैं।

 

अंदरूनी रोग की पहचान के लिए निम्नलिखित जांच किए जाते हैं

  • खून की जांचः खून की जांच अनिवार्य है और दूसरी जानकारियों के साथ यह रोग की पहचान में मदद करती है। खून की जांच के विभिन्न विवरणों से संक्रमण या सूजन की पहचान करने में सहायता मिल सकती है। इससे इलेक्ट्रोलाइट्स की गड़बड़ी, लीवर या किडनी एवं थायरॉयड के कार्यप्रणाली में बदलाव या गड़बड़ियों की पहचान करने में भी मदद मिलती है।
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