विश्व विकलांग दिवस पर विकलांगों (फिजिकली चैलेंज्ड) लोगों के लिए अलग-अलग जगहों पर विभिन्न कार्यक्रम होते हैं, रैलियां होती हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद, लोग इन बातों को भूल कर अपने काम में लग जाते हैं।
वो लोग जो किसी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं, समाज भी उन्हें हीन दृष्टि से देखता है। हालांकि विकलांगता शारीरिक या मानसिक हो सकती है, लेकिन सबसे बड़ी विक्लांगता हमारे समाज में है, जिसके कारण एक असक्षम व्यक्ति स्वयं को असहज महसूस करता है। आज विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है, लेकिन आज भी हमारे देश में कुछ बातें नहीं बदली हैं।
फिजिकली चैलेंज्ड की समस्याएं:
• मानसिक तनाव: शारीरिक या मानसिक विकलांगता की स्थिति में व्यक्ति को सहयोग की आवश्यकता होती है। ऐसे में परिवारजन या मित्रों से सहायता की उम्मीद की जाती है। लेकिन अगर इस स्थिति में व्यवक्ति को किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिलता है, तो वह तनावग्रस्त हो जाता है और कई बार तो जीवन की आशा भी छोड़ देता है।
• शारीरिक श्रम: हमारे देश में अभी भी बहुत कम ऐसी जगह है, जहां पहुंच पाना शारीरिक रूप से विकलांग वयक्ति के लिए ठीक हो। चाहे सामान्य बस की यात्रा को ही ले लें।
• मनोरंजन की कमी: ऐसा व्यक्ति जो शारीरिक या मानसिक तौर पर कमज़ोर है, उसके लिए थोड़ा मनोरंजन भी आवश्यकक है। ऐसे व्य क्ति का मनोरंजन करें और उसे इस बात का एहससास ना होने दें कि वो आप जैसा नहीं है।
• लोगों का असहयोग: आपके घर के आसपास अगर कोई व्य क्ति विकलांग होता है, तो उसके लिए लोगों का नज़रिया ही बदल जाता है। लोग ऐसे व्यगक्ति के साथ बाहर नहीं जाना चाहते। याद रखें, ऐसी बातें एक विक्लांजग व्य क्ति को और कमज़ोर बनाती है।
हमारे सहयोग से फिजिकली चैलेंज्ड भी एक आम इन्साहन जैसा जीवन यापन कर सकते हैं।

