विज्ञान की अच्छी खबर पर जल्दी विश्वास करते नहीं करते लोग

By  ,  दैनिक जागरण
Dec 21, 2011
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-शोध में सामने आई बात


अमेरिका में हुए एक अध्ययन में पता चला है कि वैज्ञानिक अध्ययनों के सकारात्मक नतीजों को लोग गंभीरता से नहीं लेते। जबकि नकारात्मक बातों पर सहज विश्वास कर लेते हैं।


एक शोध पत्रिका 'पब्लिक अंडरस्टैंडिंग ऑफ साइंस' के अध्ययन में बताया गया है कि लोगों का नजरिया बदलने में वैज्ञानिक शोध ज्यादा प्रभावशाली नहीं हो पाते। शोध में 1,475 लोगों को शामिल किया गया।


वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्यादातर लोग मानते हैं कि वैज्ञानिक शोधों के पीछे राजनीतिक उद्देश्य होता है। शोध से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार, 'लोग अपने से जुड़ी अच्छी खबरों को जानने के इच्छुक नहीं होते। यदि वैज्ञानिक बताते हैं कि फ्लू वैक्सीन सुरक्षित हैं, तो वे उस पर भरोसा जताने के बजाय भयभीत करने वाले वैज्ञानिक नतीजों को ज्यादा सहजता के साथ स्वीकार करते हैं।'


कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सर्वे के विश्लेषण में पाया कि बहुत थोड़े से लोगों ने उन बातों पर गौर किया जो उनके फायदे की थी। शोध में बताया गया है कि कुछ समय पहले ओटावा (कनाडा) के सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा था। यहां चिकित्सकों के दावों के बावजूद लोगों ने एच1एन1 टीके की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे।


शोध में पता चला कि 'बड़ी संख्या में लोग टीका लगाए जाने को लेकर आशंकित थे। लोगों का टीके में विश्वास नहीं था। ऐसे में मात्र 50 प्रतिशत लोगों को ही टीका लगाया जा सका।'

 

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