ल्यूकीमिया के लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 04, 2012
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leukemia ke lakshan

यह तो आप जानते ही हैं ल्यूकीमिया को रक्त कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। यानी ल्यूकीमिया रक्त बनने की प्रक्रिया को बहुत अधिक प्रभावित करता है। ल्यूकीमिया के लक्षण कैंसर के लक्षणों के जैसे ही होते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं ल्यूकीमिया को पहचानने के कुछ खास लक्षण भी हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि ल्यूकीमिया के लक्षणों को निदान के जरिए पहचाना जाता है या फिर ल्यूकीमिया को सामान्य रूप से पहचाना जा सकता है। आखिर वे कौन से लक्षण हैं जिनसे ल्यूकीमिया की पहचान आसानी से हो जाती है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि यदि ल्यूकीमिया के लक्षण पहचान में आ जाते हैं तो क्या करना चाहिए। क्या ल्यूकीमिया कैंसर का कोई इलाज भी है। तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए हमें सबसे पहले जानना होगा ल्यूकीमिया के लक्षणों को। तो आइए जानें ल्यूकीमिया के लक्षण कौन से हैं।

  • यह तो आप जानते ही हैं कि ल्यूकीमिया के लक्षण कैंसर जैसे ही होते हैं। यानी कैंसर की वे कोशिकाएं जो शरीर के अन्य भागों को सक्षम रूप से काम करने से रोकती है।
  • ल्यूकीमिया सेल्स आमतौर पर ब्लड सेल्स और शरीर के विभिन्न अंगो में धीरे-धीरे फैलते हैं लेकिन कुछ ल्यूकीमिया सेल्स बहुत ही तीव्र गति से शरीर में फैलते हैं।

 

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ल्यूकीमिया के लक्षण


बार-बार एक ही तरह का संक्रमण होना।

  • बहुत तेज बुखार होना।
  • रोगी का इम्यून सिस्टम कमजोर होना।
  • हर समय थकान और कमजोरी महसूस करना।
  • एनीमिया होना।
  • नाक-मसूड़ों इत्यादि से खून बहने की शिकायत होना।
  • प्लेटलेट्स का गिरना।
  • शरीर के जोड़ों में दर्द होना।"
  • हड्डियों में दर्द की शिकायत होना।
  • शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन आना।
  • शरीर में जगह-जगह गांठों के होने का महसूस होना।

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  • लीवर संबंधी समस्याएं होना।
  • अकसर सिरदर्द की शिकायत होना। या फिर माइग्रेन की शिकायत होना।
  • पक्षाघात यानी स्ट्रोक होना।
  • दौरा पड़ना या किसी चीज के होने का बार-बार भ्रम होना। यानी कई बार रोगी मानसिक रूप से परेशान रहने लगता हैं।
  • उल्टियां आने का अहसास होना या असमय उल्टियां होना।
  • त्वचा में जगह-जगह रैशेज की शिकायत होना।
  • ग्रंथियों/ग्लैंड्स का सूज जाना।
  • अचानक से बिना कारणों के असामान्य रूप से वजन का कम होना।
  • जबड़ों में सूजन आना या फिर रक्‍त का बहना।
  • भूख ना लगने की समस्या होना।
  • यदि चोट लगी है तो चोट का निशान पड़ जाना।
  • किसी घाव या जख्म के भरने में अधिक समय लगना।

     


हालांकि ल्यूकीमिया के आरंभिक लक्षणों में फ्लू और दूसरी कई गंभीर बीमारियां होती हैं लेकिन जब ल्यूकीमिया अधिक बढ़ने लगता है तो उपरलिखित तमाम समस्याएं होने लगती हैं। कई बार इन समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है तो ल्यूकीमिया कैंसर कोशिकाएं यानी ये ट्यूमर कोशिकाएं शरीर के अन्य भागों में भी फैल जाती हैं। जिससे शरीर में असामान्य रूप से सूजन आने लगती हैं और शरीर बहुत भद्दा दिखाई पड़ने लगता हैं। यदि आप सही समय पर ल्यूकीमिया के लक्षणों की पहचान कर पाते हैं और उसका उपचार करवा लेते हैं तो आप ल्यूकीमिया के जोखिम से बाहर निकल सकते हैं।

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