रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर की चिकित्‍सा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 12, 2013
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ridh ki haddi ke tumor ki chikitsa

आमतौर पर नॉन-कैंसरस और कैंसरस प्राथमिक रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के लिए सर्जरी का सुझाव दिया जाता है और आमतौर पर ये रीढ़ की हड्डी के बाहर स्थित ट्यूमर के लिए सफल हैं। हालांकि, स्‍पाइनल ट्यूमर रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचाता है इसलिए ट्यूमर को बढ़ने से रोकने के लिए रेडियेशन थैरेपी का उपयोग किया जा सकता है।

सर्जरी के द्वारा रीढ़ की हड्डी के आसपास के सेल्‍स को हटाने से रीढ़ की हड्डी में नर्व पर दबाव कम होता है जिससे दर्द और अन्य लक्षणों में राहत मिल सकती है। यदि सर्जरी के बाद भी ट्यूमर बढ़ रहा है तो इसके लिए रेडियेशन थेरेपी और कीमोथेरेपी का सुझाव दिया जाता है।

रेडियेशन थैरेपी में हड्डी के आसपास के ऊतक नष्‍ट हो सकते हैं इसलिए इस थेरेपी में सावधानी बरतनी चाहिए। रीढ़ की हड्डी ब्रेन या अन्‍य टिशूज की रेडियेशन के प्रभाव के प्रति ज्‍यादा संवेदनशील है। विशेष रूप से रिब्सन के एरिया में जहां सभी रीढ़ की हड्डी के ट्यूमरों का लगभग आधा हिस्‍सा पाया जाता है।


स्‍पाइनल ट्यूमर की चिकित्‍सा के तरीके -

ग़ैर-सर्जिकल उपचार -

नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट ट्यूमर के अनुसार होता है, इसमें यह देखते हैं कि ट्यूमर बिनाइन है या मेलिग्‍नेंट -

ब्रेसिंग - ब्रेस या कॉर्सेट से रीढ़ की हड्डी को सहारा मिलता है और दर्द कम होता है। मरीज़ की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप ख़ास ब्रेस तैयार करने में ऑर्थोटिस्ट की सहायता ली जा सकती है।

कीमोथेरेपी - कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि और प्रजनन क्षमता को कीमोथेरेपी के जरिए रोका जाता है। उन्हें नष्ट करने वाली दवाओं के प्रयोग से कैंसर का इलाज और उस पर नियंत्रण किया जाता है। कीमोथेरेपी की ऐसी कई प्रकार की दवायें हैं, जिन्हें अन्य उपचारों के साथ भी समन्वित किया जा सकता है।

रेडियेशन थेरेपी - रेडियेशन थेरेपी कै जरिए कैंसर की कोशिकाओं को समाप्‍त किया जाता है। ट्यूमर को छोटा करके या उसका बढ़ना रोककर, बीमारी पर काबू पाने में सहायता मिल सकती है। रेडियेशन मैलिग्नेंट कोशिका के डीएनए को निशाना बनाता है।


सर्जिकल उपचार -
स्पाइनल ट्यूमर बिनाइन हो या मैलिग्नेंट, सर्जरी का लक्ष्य दर्द कम करना और तंत्रिकाओं का कामकाज सुचारु करके उनकी क्रियाशीलता बरकरार रखकर रीढ़ की हड्डी को स्थिरता प्रदान करना है। सर्जरी से आंशिक रूप से या पूरी तरह हटा दिये जाने के बाद भी कुछ ट्यूमर्स को रेडियेशन या कीमोथेरेपी जैसे ग़ैर-सर्जिकल इलाज की ज़रूरत पड़ती है।


स्पाइनल ट्यूमर के इलाज में अक्सर कई विशेषज्ञों की ज़रूरत पड़ती है, जिनमें स्पाइन सर्जन, न्यूरो-रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ऑन्कोलॉजिस्ट, और दर्द नियंत्रण विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

 

 

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