रक्त कैंसर के इलाज में मददगार मछली का तेल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 30, 2012
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machli ka tel

मछली के तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो हमारे शरीर के लिए बहुत जरुरी होता है। यह एसिड हमारे शरीर को रोगों से दूर रखता है, लेकिन यह एसिड शरीर में नहीं बनता है इसलिए इस अम्ल के लिए हमें ओमेगा 3 फैटी एसिड वाले पदार्थ को अपने खाने में शामिल करना चाहिए। हाल ही में हुए शोध में पता चला है कि मछली का तेल ब्लड कैंसर के ईलाज में मदद करता है। वैज्ञानिक की टीम ने मछली के तेल से ऐसा अवयव निकाला है जो ल्यूकेमिया की स्टेम कोशिकाओं को निशाना बना कर उनका खात्मा करता है. इस खोज से रक्त कैंसर के इलाज का नया और प्रभावी रास्ता तैयार हो सकता है.

क्या है ल्यूकेमिया

 

ल्यूकेमिया रक्त कोशिकाओं का कैंसर हैं। शरीर में ल्यूकेमिया के सेल्स की कोई खास वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। लेकिन ल्यूकेमिया होने का खतरा किन कारणों से होता है, इसकी पहचान करने में सफलता मिल चुकी है। ल्यूकीमिया चार प्रकार के होते हैं एक्यूट लिम्फोसाईटिक ल्यूकीमिया, क्रोनिक लिम्फोसाईटिक ल्यूकीमिया, एक्यूट माइलोसाईटिक ल्यूकीमिया और क्रोनिक माइलोसाईटिक ल्यूकीमिया। ल्यूकेमिया के इलाज के लिए कीमोथेरेपी व रेडिएशन थेरेपी का प्रयोग किया जाता है। ल्यूकेमिया का पता शुरुआती अवस्था में चलने पर इसकी तुरंत रोक थाम कर इसे पूरी तरह से नष्ट किया जा सकता है।

मछली के तेल से ल्यूकेमिया का ईलाज

 

मछली का तेल रोगी के शरीर से कैंसर के सेल्स को ढूंढ कर खत्म कर देता है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में उन्होंने पाया कि मछली का तेल में पाए जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड से बना यौगिक ल्यूकेमिया के सेल्स को पूरी तरह से नष्ट करने में कामयाब रहा। इस यौगिक का नाम डेल्टा-12-प्रोटाग्लैंडिन जे 3 (डी12-पीजीजे3) है। ओमेगा-3 में ल्यूकेमिया की वजह बनने वाली कोशिकाओं को खत्म करने की क्षमता होती है।

 

अन्य ईलाजों की अपेक्षा में मछली के तेल से ब्लड कैंसर के ईलाज के कई लाभ हैं। आईए जानें क्या हैं वे लाभ।

  • बिना किसी सेल  के नुकसान के मछली के तेल से ल्यूकेमिया का इलाज संभव है।
  • रेडिएशन व कीमोथेरपी की अपेक्षा इसके दुष्प्रभाव काफी कम होते हैं।
  • इससे रक्त कोशिकाओं की संख्या तेजी से बढ़ती है और स्पलीन (spleen) अपने सामान्य आकार में वापस आता है।
  • अन्य ईलाजों में रोगी को हमेशा दवा लेनी पड़ती है और दवा छोड़ने पर कैंसर के सेल्स के फिर से होने का खतरा रहता है। लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक इस ईलाज से कैंसर के सेल्स की वापसी की संभावना बहुत कम होती है। 
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