मलेरिया की जांच कैसे होती है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 19, 2013
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

maleria ki jaanch

किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी होता है और अगर बीमारी गंभीर है तो उसके लिए डॉक्टर की सलाह पर कुछ जांच भी करवाई जाती है। ब्लड टेस्ट, एक्स-रे आदि करवाए जाते है। बीमारी को जांचने के लिए, बीमारी की पहचान करने के लिए टेस्ट कराना ही बेहतर उपाय है। मलेरिया को जांचने के लिए भी ब्लड टेस्ट करवाए जाते हैं। मलेरिया परजीवी के कौन से कण रोगी में मौजूद है इसका पता भी मलेरिया सूक्ष्मदर्शी परीक्षण से लगता है। आइए जाने मलेरिया जांच के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाएं जा सकते है।

 

इसे भी पढें - कैसे होता है मलेरिया


सूक्ष्मदर्शी जांच


मलेरिया की पहचान करने के लिए ब्लड प्लेटलेट्स का सूक्ष्मदर्शी से परीक्षण करना सबसे बेहतर, भरोसेमंद और अच्छा तरीका है। इससे मलेरिया के सभी परजीवियों की पहचान कर उसकी रोकथाम अलग-अलग रूपों में की जा सकती है। ब्लड प्लेटलेट्स मुख्य रूप से दो तरह की बनती है। इनमें पतली प्लेटलेट्स में परजीवी की बनावट को सही ढंग से पहचाना जा सकता है। वहीं मोटी प्लेटलेट्स में रक्त‍ की कम समय में अधिक जांच की जा सकती है। मोटी प्लेटलेट्स के जरिए कम माञा के संक्रमण को भी जांचा जा सकता है। इतना ही नहीं, मलेरिया जांच के दौरान परजीवियों के कई चरणों की जांच के लिए भी इन दोनों ब्लड प्लेसटलेट्स की जरूरत पड़ती है।

 

इनके बारे में भी जानें- डेंगूचिकनगुनिया


एंटीजन टेस्ट


मलेरिया की जांच के लिए कई मलेरिया रैपिड एंटीजन टेस्ट भी उपलब्ध हैं। इन परीक्षणों में रक्त की एक बूंद लेकर 15-20 मिनट में ही परिणाम सामने आ जाते है। हालांकि सूक्ष्मदर्शी जांच के आगे बहुत महत्तव नहीं रखते लेकिन जहां लैब का प्रबंध नहीं होता वहां मलेरिया परीक्षण के लिए एंटीजन टेस्ट कारगार साबित होते है। इन परीक्षणों को लगातार विकसित किया जा रहा है जिसके चलते इन परीक्षणों का प्रयोग इलाज के सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम जानने के लिए भी किया जाने लगा है। इनके माध्यम से मलेरिया का सवरूप क्या है इसका भी आसानी से पता लगाया जा सकता है।

 

इसे भी पढें- मलेरिया में कैसा हो आपका खानपान



आणविक विधियां इनके अलावा  पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) के इस्तेमाल और आणविक विधियों के प्रयोग से भी कुछ परीक्षणों को प्रयोग होता है लेकिन उनका प्रयोग स्पेशल प्रयोगशालाओं में ही उपलब्ध हैं।


मलेरिया आरटीएस


हाल ही में मलेरिया आरटीएस (एस वैक्सीन) का हाल ही में परीक्षण किया गया जो कि सफल भी हुआ है लेकिन सार्वजनिक तौर पर अभी इसका उत्पादन किया गया है। लेकिन 2012 तक यह परीक्षण प्रणाली सार्वजनिक होने की उम्मीद है। हालांकि ये टेस्ट 50 से 60 फीसदी ही कारगर है।

 

Write a Review Feedback
Is it Helpful Article?YES30 Votes 16031 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर