मधुमेह से ग्रस्त गर्भवती महिलाएं और उपवास

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 25, 2012
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हर कुछ घंटो के बाद कुछ न कुछ खाएं ताकि मधुमेह का स्तर सही रहे और इस समय रक्त शर्करा का स्तर भी तेजी से नही बढ़ना चाहिए।

 

फूड जोकि नवरात्रि के दौरान खाये जा सकते है।

 

    लोकी का रायता
    लौकी (लौकी)
    नाश्ते के रूप में बीच-बीच में बादाम खाएँ।
    कुट्टू की रोटी में कद्दू को भर कर उसकी चपाटी बनाए।
    पपीता, नाशपाती और जामुन जैसे फलों को नियमित अंतराल पर फल खाएं।

 

 

मधुमेह के रोगियों को देखभाल की जरूरत होती है। एक गर्भवती महिला को तो और भी अधिक ख्याल रखने की जरूरत है। इस प्रकार एक मधुमेह और गर्भवती महिला को, दिए गए तथ्यों के अनुसार ख्याल रखने की जरूरत है।

 

गर्भवती महिलाएं जो गर्भवती होने से पहले मधुमेह से ग्रस्त हो गयी है, उनके लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहे, ध्यान रखे। गर्भावस्था के लिए देखभाल के लिए पूरक फूड आवश्यक है जो आपके रक्त शर्करा के स्तर को आपकी दवाओं के प्रबंधन के साथ-साथ नियंत्रित और जांच करता है। कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेः

 

तैयारी/प्रबंधन

 

गर्भवती बनने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। रक्त परीक्षण के साथ, आपका चिकित्सक यह मूल्यांकन कर पाएगा कि पिछले 8-12 सप्ताह में आपका मधुमेह कितना नियंत्रित हुआ है, और यदि यह निंयत्रित है तो जन्म नियंत्रण गोलिया लेना बंद कर देना सुरक्षित होगा।

 

 

 

अन्य चिकित्सा जांच करवाएं

 

जैसे कि यूरिनालायसिस, कोलेस्ट्रॉल की जांच के साथ-साथ ग्लॉकोम, मोतियाबिंद और रेटिनोपैथी के लिए आंखो की जांच – गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से संबंधित समस्याओं के विकास को रोकने में आपके डॉक्टर की मदद कर सकता है।

 

अपने चिकित्सक से पूर्व गर्भाधान परामर्श करने के लिए मिलना एक अन्य महत्वपूर्ण कदम है। यह गर्भावस्था में स्वस्थ होने के साथ साथ शिक्षित महिलाओं को शारीरिक और भावनात्मक रूप से भी तैयार होने में सहायता करता है।

 

गर्भावस्था से पहले और गर्भावस्था के दौरान रक्त शर्करा का नियंत्रण

संतुलन भोजन, व्यायाम और मधुमेह की दवाओं के अलावा - रक्त शर्करा का एक उचित नियंत्रण आदर्श सीमा के भीतर रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने से संबंधित है।

 

एक अच्छा रक्त शर्करा का नियंत्रण गर्भवती बनने से पहले महत्वपूर्ण है क्योंकि कई महिलाओं को गर्भावस्था के 2-4 सप्ताह बितने के बाद ही पता चलता है कि वह गर्भवती है। गर्भावस्था में पहले(13 सप्ताह से पहले) से ही रक्त शर्करा का उच्च स्तर जन्म दोष का कारण बन सकता है और गर्भावस्था के दौरान, यह गर्भपात का खतरे को बढ़ाता है तथा मधुमेह से संबंधित जटिलाताओं को विकसित करने के खतरे में भी इजाफा कर सकता है।

 

मधुमेह का बच्चे पर प्रभाव

 

मधुमेह महिलाओं के शिशु दूसरे शिशुओं की तुलना में काफी बड़े हो सकते है ( इसे मक्रोसोमिया भी कहा जाता है)। ये बच्चे बहुत अधिक शुगर प्राप्त होते है क्योंकि उनकी माँ का रक्त शर्करा का स्तर उच्च होता है। जब अतिरिक्त शुगर वसा में तबदील होती है, यह एक मोटे बच्चे का निर्माण करती है। कभी कभी बच्चे भी योनि प्रसव करते समय बच्चा इतना बड़ा होता है कि सीजेरियन प्रसव करना आवश्यक हो जाता है।

 

यदि आप को गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्त शर्करा का स्तर लगातार रहता है(विशेष रूप प्रसव से पहले के 24 घंटे में), आपके बच्चे को प्रसव के ठीक बाद से कम रक्त शर्करा  का विकास खतरनाक हो सकता है। आपके बच्चे में कैल्शियम या मेग्नेशियम जैसे खनिज पदार्थो का असंतुलन भी हो सकता है जिनकी दवाओं के जरिये पूर्ति की जा सकती है।

 

गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की दवाएं - चिकित्सक आपको बता सकते है कि गर्भावस्था के दौरान अपनी दवाओं/इंसुलिन के साथ कैसे समायोजित कर सकते हैं। आम तौर पर आपके शरीर को गर्भावस्था के दौरान विशेष रूप से तीसरी तिमाही के दौरान अधिक इंसुलिन की आवश्यकता होती है।

 

यदि आप अपना मधुमेह नियंत्रण करने के लिए ओरल दवाएँ ले रहे है, तो आपका चिकित्सक आपको गर्भावस्था के दौरान इंसुलिन से दवाएं दे सकते है, चूंकि कुछ ओरल दवाओं का उपयोग सुरक्षित नही माना जाता और/या इंसुलिन से बेहतर रूप से शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है।

 

आहार योजना

आपका डॉक्टर और आप दोनो आपकी आहार योजना को समायोजित करने के लिए एक साथ काम करना चाहिए जो कि जांच में आपके रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने के साथ साथ आपके बढ़ते बच्चे को भी अधिक कैलोरी प्रदान करें।

 

गर्भावस्था का समय

 

हल्के मधुमेह या वे महिलाएं जिन्होने अपना शुगर का स्तर काफी बेहतर तरीके से नियंत्रित किया हुआ है, वे अक्सर बिना किसी समस्या के अपने बच्चे संभालती है। हालांकि, कई चिकित्सक मधुमेह महिलाओं को बच्चे के पूर्व प्रसव में आमतौर पर 38-39 सप्ताह के लिए योजना बनाना पसंद करते है।

 

 

प्रसव पीढ़ा और प्रसव के दौरान रक्त शर्करा की जांच करते रहें।

प्रसव के दौरान रक्त शर्करा के स्तर के नियंत्रण को बनाए रखना महत्वपूर्ण है, जो माँ और बच्चे दोनो के लिए काफी तनावपूर्ण समय हो सकता है। ऐसे मामले में आपको गर्भावस्था के दौरान इंसुलिन ले, आप को इंसुलिन इंजेक्शन या प्रसव की शुरूआत के साथ नसों के द्वारा दिया जा सकता है। प्रसव के ठीक बाद, इंसुलिन में तुरंत कटोती करने की जरूरत होती है।

 

 

दिमाग में इन तथ्यों को रखने के अलावा, धूम्रपान को छोड़ना भी आवश्यक है।

 

धूम्रपान आपके बच्चे को नुकसान पहुँचा सकता है और आपके मधुमेह की समस्याओँ की संभावना बढ़ता है। गर्भवती होने से पहले फोलिक एसिड की खुराक लेने से बच्चे में न्यूरल ट्यूब(स्नायु संबंधी) दोष को रोकने में मदद मिल सकती है।

इस प्रकार, हालांकि गर्भवती होना बहुत आसान नही है, मधुमेह से ग्रस्त महिलाओं के लिए तो यह दोगुना मुश्किल है। हालांकि असंभव कुछ भी नही है। एक डॉक्टसे सही सहायता के साथ, एक स्वस्थ आहार और व्यायाम, के साथ साथ पति और परिवार से प्यार भरा सहयोग के साथ- एक मधुमेह से ग्रस्त महिला भी मातृत्व के सुख का आनंद ले सकती है।

 

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