क्या है फ्लोरोसिस और दांतों पर इसका कितना पड़ता है प्रभाव

By  , विशेषज्ञ लेख
Jan 01, 2013
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Quick Bites

  • इनेमल में परिवर्तन जिसे केवल एक दंत पेशेवर हीं नोटिस सकते हैं।
  • इनेमल का सफेद या भूरे रंग का होने लगना या इनेमल पर काले धब्बे पड़ने लगना ।
  • दांतों की सतह पर अनियमितता दिखलाई देना (दाग का भी नजर आना) ।

स्थायी दांत बचपन में ही आपके मसूड़ों के जबड़े की हड्डी में विकसित होने लगते हैं  ।  बुद्धि वाले दांत (अक्ल दांत) को छोड़कर बाकि  सारे दांत ८ साल की उम्र तक पूरी तरह विकसित हो जाते हैं  ।   ताज दांत का वह हिस्सा होता है जो मुँह में देखा जाता है  । अगर बचपन में (८ साल से कम की उम्र में)  कोई बहुत ज्यादा  फ्लोराइड का इस्तेमाल करता/करती है तो उसके दांतों के इनेमल को नुकसान पहुँच सकता है।

 

तामचीनी (इनेमल) दांत का बाहरी हिस्सा होता है  । ज्यादा फ्लोराइड के इस्तेमाल से फ्लोरोसिस हो जाता है जिसमें दांतों का रंग हल्का हो जाता है (लघु मलिनकिरण) या दांतों की सतह पर अनियमितताये पैदा हो जाती हैं  । एक बार दांत पूरी तरह से विकसित हो जाता है तब उसपर ज्यादा फ्लोराइड का प्रभाव नहीं पड़ता  ।

 

फ्लोरोसिस दांत की बीमारी से ज्यादा कॉस्मेटिक समस्या है  । कई मामलों में यह इतना हल्का होता है कि इसे डेंटिस्ट हीं पहचान सकते हैं  ।  पीने के पानी में पर्याप्त मात्रा में फ्लोराइड होने के बावजूद अगर बच्चे फ्लोराइड की अतिरिक्त खुराक (दवा या टूथ पेस्ट  निगलने के रूप में लेते हैं) तो उन्हें   फ्लोरोसिस  हो सकता है  ।

लक्षण

फ्लोरोसिस दांत की बीमारी से ज्यादा एक कॉस्मेटिक समस्या है। फ्लोरोसिस दांतों में निम्न बदलाव ला सकता है:

  • इनेमल में परिवर्तन जिसे केवल एक दंत पेशेवर हीं नोटिस सकते हैं।
  • इनेमल का सफेद या भूरे रंग का होने लगना या इनेमल पर  काले धब्बे पड़ने लगना ।
  • दांतों की सतह पर अनियमितता दिखलाई देना (दाग का भी नजर आना) ।

निदान

आपके डेंटिस्ट आपके बच्चे के दांतों का   परीक्षण  करेंगे और यह पता करेंगे कि  उसने कितने  फ्लोराइड  का सेवन किया है तथा अब तक किस तरह की दवाइयां खाई हैं  । इन जानकारियों से डेंटिस्ट यह जान सकेंगे की दांतों में दाग पड़ने की वजह कहीं फ्लोरोसिस हीं तो नहीं है  । आपके डेंटिस्ट, यह जानने के लिए कि बच्चे के दांतों में केविटिज या अन्य समस्या तो नहीं है, वे उसकी दांतों का   एक्स -रे निकलवा सकते हैं  । कुछ मामलों में दांतों पर धब्बे फ्लूरोसिस जैसा हीं लगता है जबकि   कर्निओफ़ेसिअल   या सदमे की समस्या से भी ऐसा हो सकता है  ।

कितने समय की उम्मीद की जानी चाहिए

फ्लोरोसिस के कारण दांतों का मलिनकिरण  आमतौर पर स्थायी होता है समय बीतने के साथ साथ यह और गहरा होता चला जाता है  ।

बचाव

  • आप अपने टूथपेस्ट के बारे में सजग रहें
  • अगर आपका बच्चा ६ साल से कम का है तो उसके टूथब्रश पर थोडा हीं पेस्ट दें  ।
  • अपने बच्चों को   सिखलाएँ  कि  ब्रश करने के बाद पेस्ट को थूक दें  ।
  • ज्यादा  स्वादिस्ट पेस्ट का इस्तेमाल न करें वरना बच्चे उसे निगल सकते हैं  ।
  • अगर आपके पीने के पानी में पर्याप्त    मात्रा में फ्लोराइड है तो बच्चे को अलग से किसी और रूप में  फ्लोराइड न दें  ।

इलाज

फ्लोरोसिस दांतों की कोई गंभीर बीमारी न होकर कॉस्मेटिक की एक समस्या है क्योंकि इससे सिर्फ दांतों की सुन्दरता प्रभावित होती है; केविटिज वगैरह का निर्माण नहीं होता  ।   इसलिए फ्लोरोसिस के इलाज में दाग को हटाने का प्रयास किया जाता है  ।

  • हल्के मामलों में किसी उपचार की आवश्यकता भी  नहीं होती  ।  हाँ, यदि दाग सामने वाले दांतों पर हों तो यह चिंता का विषय है और दागयुक्त क्षेत्र को हटाने के लिए दन्त सफेदी की प्रक्रिया अपनाई जाती है  ।
  • अगर  फ्लोरोसिस गंभीर हो तो मुकुट, वीनिर्स या दूसरे उपायों से उसे ढका जाता है  ।

रोग का निदान

फ्लोरोसिस दांत की कोई गंभीर बीमारी नहीं है क्योंकि यह सिर्फ दांतों की सुन्दरता को ख़राब करता है; केविटिज या दांतों का अन्य रोग पैदा नहीं करता  ।

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