फेफड़े का कैंसर क्‍या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 17, 2013
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आमतौर पर लंग कैंसर कार्सीनोज कहे जाने वाले कुछ बा‍हरी कारकों से उत्पन्न होता है। ये फेफड़े में कैंसरयुक्त सेल्स की असामान्य वृद्धि को बढ़ाते हैं। जब ये कैंसरयुक्त सेल्स अनियंत्रित रूप से बढ़ती जाती हैं तब मिलकर ट्यूमर का निर्माण करती हैं। जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है यह फेफड़े के नजदीकी हिस्सों को नष्ट करता जाता है।

lung cancer kya haiजिसके फलस्वरूप ट्यूमर की असामान्य सेल्स गांठों और दूर स्थित अंगों जैसे लीवर, हड्डी, ऐड्रेनल ग्लै‍ण्ड्स या दिमाग तक फैल सकती हैं। ज़्यादातर मामलों में लंग कैंसर को बढ़ाने वाले कार्सीनोज के केमिकल्‍स सिगरेट में पाये जाते हैं।

फेफड़ों के कैंसर का मुख्‍य कारण स्‍मोकिंग है। लंग कैंसर होने पर सांस लेने में दिक्‍कत होती है, सीने में दर्द और थूक के साथ खून निकलने लगता है। आइए हम आपको फेफड़ों के कैंसर के बारे में बताते हैं।

 

[इसे भी पढ़ें : ऐसे उपाय जो कैंसर से बचाये]

 

लंग कैंसर या फेफड़ों का कैंसर -  

लंग कैंसर को दो मूलभूत वर्गों में बांटा जा सकता है - नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर और स्माल सेल लंग कैंसर। इन दोनों प्रकारों के लिए अलग-अलग उपचार के तरीके हैं। निदान के समय पाये जाने वाले अन्तर से पता चलता है कि क्या कैंसर छाती या फिर इसके इस अन्‍य हिस्से में फैलने की सम्भावना है या नहीं।

इसके लिए सबसे उपयुक्त उपचार का पता लगा पाना काफी मुश्किल है। स्माल लंग कैंसर का निर्धारण मुश्किल से होता है, जबकि इसका पता शुरूआत में ही चल जाता है और शायद ही प्राथमिक कैंसर के सर्जिकल रिमूवल द्वारा इसका उपचार किया जाता हो। इसके विपरीत नॉन-स्मॉल लंग कैंसर होने पर इसका उपचार सर्जरी के जरिए होता है। इसलिए इसके उपचार से पहले लंग कैंसर के प्रकार का पता लगाया जाता है।



नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर -
निदान के समय स्मॉ‍ल सेल कैंसर की अपेक्षा नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के निर्धारण की सम्भावना अधिक होती है। स्मॉ‍ल सेल कैंसर की अपेक्षा सर्जरी द्वारा उपचार की सम्भासवना भी अधिक होती है लेकिन अक्सर यह कीमोथेरेपी के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया नहीं देता है। नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर को कई उप-समूहों में बांटा जाता है -



एडीनोकार्सीनोमा -
यह सर्वाधिक पाया जाने वाला लंग कैंसर है। हालांकि जो लोग ज्‍यादा धूम्रपान करते हैं उनको यह होता है, लेकिन धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी यह देखा जाता है। अक्सर एडीनोकार्सीनोमा लंग कैंसर को महिलाओं और 45 साल से कम उम्र के लोगों में देखा जाता है। आमतौर पर यह फेफड़े के किनारों पर विकसित होता है पर यह फेफड़े को ढकने वाली झिल्ली पर फैल सकता है।

[इसे भी पढ़ें : कैसे होता है फेफड़े का कैंसर]

 

स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा -
इस कैंसर में फेफड़ों के बीच वाले हिस्सें के आस-पास असामान्य रूप से मांस विकसित हो जाता है। मांस बढ़ने पर यह वायुमार्ग में उभार पैदा कर सकता है जो ब्रान्ची कहलाते हैं। 10 से 20 प्रतिशत मामलों में ट्यूमर फेफड़ों में खाली जगह (कैविटीज़) बना देता है।


लार्ज सेल कार्सीनोमा -
एडीनोकार्सीनोमा की तरह लार्ज सेल कार्सीनोमा भी फेफड़ों के किनारों पर विकसित होता है और प्यूविरा तक फैल जाता है। स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा की तरह यह 10 से 20 प्रतिशत रोगियों में खाली जगह बना देता है।



स्मॉल सेल लंग कैंसर -
निदान के समय नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर की अपेक्षा स्मॉल सेल लंग कैंसर फेफड़े के बाहर फैलने की सम्भावना अधिक होती है।  इसे 'ओट सेल कार्सिनोमा' भी कहा जाता है। धूम्रपान करने वालों को कैंसर का यह प्रकार सबसे ज्‍यादा होता है। स्‍मॉल सेल लंग कैंसर का सीधा संबंध धूम्रपान से है।

 

 

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